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पंजाब

लॉकर लेने को भटक रहे भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहक

July 10, 2020 08:30 PM

बरनाला, अखिलेश बंसल/करन अवतार: 

दो दिन का बहकावा दे सात दिन बाद भी नहीं पहुंचे बैंक के उच्चाधिकारी।


कहावत है हाथी के खाने वाले दांत और दिखावे के दूसरे होते हैं, यह उदाहरण भारतीय स्टेट बैंक पर बिल्कुल सटीक है। जिसके लॉकर लेने के लिए ग्राहकों की लंबी सूचि है, जो वर्षों से भटक रहे हैं। बैंक के उच्चाधिकारियों का यह हाल है कि वे स्टेशन का हाल देखने और ग्राहकों की समस्याओं को सुनने के लिए गुप-चुप आते हैं और निकल जाते हैं। वादा करने के बावजूद ग्राहकों से संपर्क नहीं कर रहे। जिसको लेकर पीडि़त ग्राहकों ने भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्य प्रबंधक को पत्र लिखा है।
संपर्क करने पर कहा जाता है इंतजार करें:
बरनाला में भारतीय स्टेट बैंक की 6 से ज्यादा शाखाएं हैं, जिनमें अनाजमंडी में स्थापित बैंक की शाखा में लॉकर तो सरप्लस हैं लेकिन यह शाखा शहरवासियों के संपर्क से दूर है। जबकि बाकी शाखाओं में लॉकर ग्राहकों की लंबी कतारें हैं। बैंक लॉकर लेने के लिए जब भी बैंक के ग्राहक शाखा प्रबंधकों से संपर्क करते हैं तो उन्हें हमेशा इंतजार करने को कहा जाता है।
इस लिए बढ़ रही बैंक लॉकर की जरूरत:
शहर में चोरों लुटेरों व स्नेचरों का बोलबाला होने और पुलिस का चालान काटने में व्यस्तता के कारण बैंकों के ग्राहकों की बैंक लॉकर लेने की जरूरत बढऩे लगी है। गौरतलब हो कि दो सप्ताह पूर्व शहर की घनी आबादी वाली गोबिंद कालोनी में रात को एक घर में घुसे चोर ने उस कमरे में आसानी से चोरी की जिसमें परिवार के पांच लोग सो रहे थे। सुबह होने और चोरी की घटना का पता लगने पर जिला पुलिस के डीएसपी रैंक के दो अधिकारी भी पहुंचे। सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले, चोर की मोबाइल फोन लोकेशनें भी ढूंढी, उसके बावजूद चोरों का कुछ भी पता नहीं लग सका। उससे पहले और उसके बाद भी लगातार घटनाएं हुई जिनके आरोपितों का लोकल पुलिस कुछ भी खुल्लासा नहीं कर सकी। लगातार घट रही घटनाओं के मद्देनजर लोग बैंक लॉकर लेने की ओर भाग रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कुछ बैंक के शाखा प्रबंधकों ने कुछ लोगों को तो अपने ग्राहक नहीं होने के बावजूद उन्हें लॉकर दे रखे हैं। जबकि बैंक के पक्के ग्राहक लंबे समय से लॉकर लेने के लिए तरस रहे हैं।
सुविधा के नाम पर ठेंगा:
ग्राहक खाता खुलवाता है तो उसे खाता खुलवाने के लिए कम से कम निर्धारित रकम जमा करवानी पड़ती है। करंट खाते की शर्त यह है कि ग्राहक को कोई ब्याज नहीं मिलता। नोटबंदी के दौरान बैंकों ने उनके खातों से पैसे खींच लिए जिनके खाते में तीन हजार रुपए से कम की राषि थी। उसके अलावा जिन खातों में किसी कारण निर्धारित राषि से कुछ पैसे कम रह जाए तो ग्राहक को उसके बारे में सूचना नहीं दी जाती बल्कि ग्राहक के खाते से जुर्माने के तौर पर पेमेंट काट ली जाती है। इतनी कमाई करने के बावजूद अधिकांश बैंकों के पास ग्राहकों के व्हीकल खड़े करने के लिए पार्किंग की व्यवस्था नहीं। जिसका नतीजा गत दिनों कोविड-19 के कारण बैंकों के बाहर चिलचिल्लाती गर्मी में लंबी कतारों में खड़े होकर लाखों लोगों ने भुगता है। हालांकि सरकार के दिशा-निर्देश के अनुसार सैनेटाईजर और सोशल डिस्टैंसिंग का प्रबंध करने को कहा गया था उसके सहित बैंकों द्वारा पीने के पानी तक की सुविधा का प्रबंध तक नहीं किया गया। गौरतलब हो कि यदि किसी उद्योगपति ने कोई उद्योग स्थापित करना हो तो उसके सामने अनेकों शर्तें लाकर खड़ी कर दी जाती हैं। उसे वन एवं जंगलात विभाग तथा ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों, राष्ट्रिय राज मार्ग के नियमों का पालन करना और सुरक्षा प्रबंधों व अग्नि शमक यंत्रों आदि का प्रबंध करना अनिवार्य होता है।
वादा करके भी नहीं पहुंचे अधिकारी:
भारतीय स्टेट बैंक के आर.एम. कृष्ण कुमार धौलीया ने बैंक में लॉकरों का प्रबंध करने के लिए बैंक ग्राहक से बरनाला के जिला प्रबंधकीय परिसर में आने का वादा किया था, लेकिन के सप्ताह गुजरने के बावजूद अधिकारी बरनाला नहीं पहुंचे। जिसको लेकर बैंक ग्राहक ने यह मामला भारतीय रिजर्व बैंक के ध्यान में लाने के लिए पत्र लिखा है। पत्र में बैंक के अधिकारियों के विजिट एवं ग्राहकों की मिलनी की रिपोर्ट भी लेने की मांग की है।

 
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