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पंजाब

शेयर ट्रेडिंग की आड़ में शेयर ट्रांसफर स्टांप ड्यूटी राजस्व लूट रहे शेयर ब्रोकर

July 12, 2020 11:23 AM

बरनाला, अखिलेश बंसल/करन अवतार:
एक ओर प्रदेश सरकार सरकारी कोष खाली होने का शोर कर शहरियों के चालान काट रही है और बिजली बिलों व बसों के किराए में बढ़ौतरी करने सहित लोगों को मिलती तमाम सहूलतों पर कट लगा रही है, दूसरी ओर चोरों व लुटेरों के लिए चारों किवाड़ खोल दिए गए। सरकार को बताने के बावजूद कि शेयर ट्रांसफर स्टांप ड्यूटी चोर गत पांच वर्षों के दौरान सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए की चपत लगा चुके हैं और अभी भी निरंतर शेयर ट्रांसफर स्टांप ड्यूटी चोरी कर रहे हैं उसके बावजूद आंखें मूंद कर बैठे हैं और अपनी ही भोली-भाली जनता को लूटने में लगी हुई है। लोगों के पैरों तले से मिट्टी उस वक्त खिस्क जाती है जब उन्हें अहसास होता है कि भारत देश की मुद्रा 15 लाख करोड़ रुपए है, जबकि शेयर ट्रेडिंग मार्कीट में भारत देश की मुद्रा के मुकाबले अढ़ाई गुणा ज्यादा लेन-देन एक दिन में हो रहा है।  

ना इंतकाल के रेट बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी और ना सरकार को राज्य वासियों से अगामी पच्चीस साल तक किसी किस्म के टैक्स लेने की पड़ेगी जरूरत, यदि राज्य सरकार केवल शेयर ब्रोकरों से शुरु कर दे पिछले पांच साल की जुर्माना सहित स्टांप ड्यूटी की रिकवरी।


यह है शेयर ट्रेडिंग की चेन:
वैसे तो शेयर ट्रेडिंग व्यापार ने पूरे देश में जाल बिछा रखा है लेकिन इसकी तीन बड़ी मार्किट्स हैं। जिनका राष्ट्रीय मुख्यालय नेश्नल स्टॉक एक्सचेंज मुंबई में है। जिसकी डोर वहां मनोनीत किए चेयरमैन के हाथ में है। उसके साथ मुंबई स्टॉक एक्सचेंज और लुधियाना स्टॉक एक्सचेंज जुड़ी हुई हैं। जिनके जरिए रोजाना अरबों-खरबों का लेन-देन होता है। चेयरमैन के नीचे ब्रोकर, उसके नीचे सब-ब्रोकर होतें हैं, लेकिन आखिर में एक ऐसा वर्ग भी है जिसे डिब्बा ब्रोकर की संज्ञा दी गई है।
इन्वेस्टर अपना पैसा सही कंपनी में इन्वेस्ट करने के लिए ब्रोकर का चयन करता है। उसके साथ बाकायदा एग्रीमेंट भी होता है। इस धंधे में यह भी सुविधा है कि यदि कोई ब्रोकर कारोबार के नियमों की उलंघना करता है तो डिफाल्टर पाए जाने के बाद उसकी सदस्यता फौरन रद्द कर दी जाती है। जिसे रद्द करने का अधिकार नेश्नल स्टॉक एक्सचेंज मुंबई के राष्ट्रीय मुख्यालय चेयरमैन को है।   

दोनों हाथों से की जा रही स्टांप ड्यूटी की चोरी:
शेयर ट्रांसफर शेयर ट्रेडिंग कारोबार में नेश्नल स्टॉक एक्सचेंज द्वारा समस्त राज्य सरकारों को अपनी जरूरतानुसार स्टांप ड्यूटी तय करने और वसूलने के अधिकार दिए हुए हैं। स्टांप ड्यूटी एक्ट केंद्र सरकार का है लेकिन उसमें राज्य सरकारें अपनी नीती के अनुसार ड्यूटी तय करती हैं और जब चाहे उसमें परिवर्तन भी कर सकती है। गौरतलब हो कि पंजाब के शेयर ब्रोकर ग्राहकों तथा सरकारी कोष (दोनों) को चूना लगा रहे हैं। जिसका खुल्लासा आरटीआई एक्ट 2005 के तहत प्राप्त हुए पत्र संख्या नंबर 8/11/18 टीकेएसबी 2 (आरटीआई) 11481 तारीख 16.09.2018 से हुआ। पत्र के अनुसार स्टांप एक्ट के आर्टीकल 62-ए के आधार पर स्टांप ड्यूटी मात्र 25 पैसे/प्रति एक सौ रुपए वसूलने की बात कही है।
कंपनी एक्ट 1956 के मुताबिक शेयर ट्रांसफर पर स्टांप ड्यूटी अति आवश्यक है। जिसके लिए ब्रोकरों को ग्राहकों (इन्वेस्टरों) का के.वाई.सी. फार्म जो कि सिक्योर्टी एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया (सेबी) से मान्यता प्राप्त है उसे भरना होता है। लेकिन ब्रोकर ग्राहक से एग्रिमेंट करते वक्त अपनी मर्जी से अलग से खर्च शामिल कर देता है, लेकिन वसूल किया गया पैसा संबंधित विभागों को अदा नहीं करते।
नेश्नल एंबलम वाला टिकट हुआ गायब:
बता दें कि वर्ष 2000 से पहले शेयर ट्रांसफर टिकटों के जरिए होता था। उन टिकटों पर बाकायदा तीन शेर मुख वाला भारत सरकार का चिन्ह भी मौजूद था। जिन्हें (नेश्नल एंबलम वाला टिकेट) संबंधित स्टॉक एक्सचेंज ने कारोबार को ऑनलाइन कर शेयर सर्टिफ़िकेट को खत्म कर डीमेट कर दिये। उसके बाद दलाल व ब्रोकर ग्राहकों से कन्ट्रेक्ट नोट में स्टांप ड्यूटी लेना शुरु कर दिया। जबकि संबंधित राज्य सरकार को स्टांप ड्यूटी देने की ज़िम्मेदारी ब्रोकरों की थी। स्टांप ड्यूटी पर उस राज्य सरकार का अधिकार है जिसपर ग्राहक का स्थायी पता है। जैसे ही यह कारोबार ऑनलाइन शुरु हुआ तो ज्यादातर ब्रोकरों ने स्टांप ड्यूटी देने से हाथ पीछे कर लिए।
यह बताया ग्राफ:
नेश्नल स्टॉक एक्सचेंज की टर्नओवर एवं ऑनलाईन के रिकार्ड अनुसार पंजाब प्रदेश में रोजाना लेन-देन का निप्टान (वायदा कारोबार) करीब 50 हजार करोड़ रुपए का होता है। जबकि नकद तौर पर शेयर खरीद-बेच का कारोबार रोजाना औस्तन 500 करोड़ रुपए का हो रहा हैं। जिसके हिसाब से स्टांप ड्यूटी लगभग 1 करोड़ 25 लाख रुपए प्रति दिन बनती है। यह कारोबार साल भर में 250 दिन होता है, उसके हिसाब से साल भर में स्टांप ड्यूटी औस्तन 362 करोड़ तथा गत पांच साल के दौरान ग्राहकों से वसूली गई 1810 करोड़ रुपए बनती है। यदि उतार-चढ़ाव को थोड़ा कम भी कर लिया जाए तो 12-15 सौ करोड़ रुपए आसानी से बनती है। यानि पंजाब सरकार को हर साल कम से कम साढ़े तीन सौ करोड़ की स्टांप ड्यूटी राजस्व का नुकसान हो रहा है और वह पूरी की पूरी राषि शेयर ब्रोकरों की जेबों में जा रही है। सूत्र बताते हैं कि स्टांप ड्यूटी चोरी करने के लिए ब्रोकरों को कई रास्तों से गुजरना पड़ता है। प्रदेश के शेयर मार्केटिंग ब्रोकरों के पास जीएसटी नंबर भी पंजाब के ही हैं। जबकि वे बिलिंग दूसरे राज्यों से कर रहे हैं। जिससे राज्य सरकार को जीएसटी का भारी नुकसान हो रहा है।
एक्ट में है यह प्रावधान:
इस कारोबार से संबंधित एक्ट में इस बात का साफ तौर पर प्रावधान है कि अगर कोई ब्रोकर कारोबार तो करता है लेकिन ग्राहकों से पैसा वसूलने के बावजूद सरकार को भुगतान नहीं करता तो उसके खिलाफ मूल रक्म+ जुर्माना भरने का प्रावधान है। अगर फिर भी कोई आना-कानी करे तों उसके खिलाफ कानून में जेल की सजा का प्रावधान भी है। यद्यपि संबंधित सरकार डिफाल्टर ब्रोकर को वांछित घोषित करती है तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के पास उसकी सदस्यता रद्द करने का अधिकार प्राप्त है।
पैसा जुटाने के लिए माथा पच्ची कर रहे राजस्व मंत्री:
पंजाब के राजस्व एवं पुर्नवास मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ ने प्रापर्टी रजिस्ट्रेशन व स्टांप ड्यूटी से 500 करोड़ जुटाने की बात कही है। जिसके चलते पंजाब में प्रापर्टी रजिस्ट्रेशन पर स्टांप ड्यूटी एवं सेल डीड बढ़ाने के लिए अपने विभाग से संबंधित आला कमान अधिकारियों से बैठक भी की है।
क्यूं चुप हो गए राजनेता:
शेयर ट्रेडिंग व्यापार के तजुर्बेकार भगवंत राय गोयल का कहना है कि उसने भारतीय होने के नाते अपनी नैतिक ड्यूटी समझते हुए एवं यह जानते हुए भी कि मौजूदा स्थिती में शेयर ट्रेडिंग की बारीकियों का पर्दाफाश करना किसी बाघ के मुंह में सिर देने से कम नहीं। उसके बावजूद उसने दो साल पहले सर्वप्रथम राज्य के कैबिनेट मंत्री ब्रह्मोहिन्दरा को मई-2018 के दौरान संपर्क किया। जिन्होंने गोयल के विचारों से सहमत होते हुए अप्रैल 2018 को अपने चंडीगढ़ निवास पर बुलाया, साथ ही फायनांस सैक्रेटरी को भी बुला लिया। मंत्री ने भगवंत राय गोयल द्वारा दिए गए तमाम तथ्य व जानकारियाँ लेकर तुरंत जांच करने के आदेश भी दिए। मामला खटाई में क्यूँ पड़ गया इसका जवाब देने के लिए मंत्री महोदय ने फोन उठाना बंद कर दिया। उसके बाद कैप्टन मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी कहलाते एवं बरनाला तथा संगरूर से विधायक व सांसद के चुनाव में किस्मत अजमा चुके कांग्रेस के दिग्गज केवल सिंह ढिल्लों से संपर्क किया। जिन्होंने मामला तो सीएम के ध्यान में लाने का आश्वासन तो दिया, लेकिन प्रार्थी को किसी किस्म की कोई फीडबैक हासिल नहीं हुई। पंजाब के मुख्यमंत्री व राज्यपाल से लेकर हर मंत्री व संतरी से संपर्क किया। जिसका नतीजा जीरो रहा।

 
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