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चंडीगढ़

युगदृष्टा लेखक थे प्रेमचंद, अपनी चेतनता एवं चिंतनशीलता से किया सत्य साबित

July 31, 2020 07:29 PM

चंडीगढ, फेस2न्यूज:
प्रेमचंद हिंदी साहित्य के सबसे युगदृष्टा लेखकों में से एक लेखक रहे हैं। प्रेमचंद ने साहित्य समाज का दर्पण की परिभाषा को अपनी चेतनता एवं चिंतनशीलता से सत्य साबित किया। यह बात पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार ने हिंदी विभाग द्वारा प्रेमचंद जयंती के अवसर पर आज आयोजित वेब गोष्ठी में कही। वह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।  

हिंदी विभाग का प्रेमचंद जयंती उत्सव 2020 संपन्न


मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. जितेन्द्र श्रीवास्तव ने 'प्रेमचन्द का स्वप्न समाज' विषय पर अपने वक्तव्य में कहा कि प्रेमचंद का स्वप्न समाज दुविधामुक्त समाज है और अंत में उन्होंने कहा कि उनका एक स्वप्न यह भी रहा होगा कि उनका साहित्य केवल ऐतिहासिक रह जाये, उस समस्या-चित्रण में कोई प्रासंगिकता न मिले। कोरोना काल में प्रेमचंद के महत्व को दर्शाते हुए प्रेमाश्रम का जिक्र किया और कहा कि प्रेमाश्रम में प्लेग की भयानक महामारी के दौर में जो कर्तव्य किसी लेखक का समाज को अवसाद से बाहर लाने का होता है वहां भी प्रेमचंद एक सफल लेखक के रूप में देखे जा सकते हैं। प्रेमचंद के निबंध-साहित्य को महत्व देते हुए कहा कि प्रेमचंद ऐसे पहले लेखक रहे जिन्होंने जाति-व्यवस्था को समूल नष्ट करने की बात अपने निबंधों के माध्यम से कही।
गौरतलब है कि कोविड-19 की वजह से जो परिस्थितियां हैं उसके कारण इस बार यह जयंती उत्सव ऑनलाइन माध्यम से मनाया गया।
विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि प्रेमचंद जयंती उत्सव पखवाड़े के तहत आयोजित कार्यक्रमों में विशेष व्याख्यान श्रृंखला की शुरुआत 17 जुलाई को 'प्रेमचंद और मैं' विषय पर प्रसिद्ध व्यंग्यकार और गगनांचल के संपादक डॉ. हरीश नवल के व्याख्यान से हुई। 24 जुलाई को आयोजित व्याख्यान में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र कुमार ने 'प्रेमचंद और हमारे समय के सवाल' विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही विभाग द्वारा लघु कहानी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में अंतिम तिथि तक 52 कहानियां प्राप्त हुईं। उन्होंने आगे कहा कि विभाग द्वारा 21 जुलाई से प्रेमचंद कहानी वाचन श्रृंखला भी शुरू की गई है। इन कहानियों का प्रसारण पहले 21 से 28 जुलाई तक हर रोज शाम 7 बजे हिंदी विभाग के फेसबुक पेज के माध्यम से किया जा रहा था।
बाद में लोगों के उत्साह को देखते हुए 29 से 31 जुलाई तक दिन में दो बार प्रातः 10 बजे और शाम 7 बजे किया गया। यह बड़े हर्ष की बात है कि इसके लिए अन्य विभागों के साथ ही कई शहरों से 14 कहानियां प्राप्त हुईं जिनमें शिक्षा विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ. किरनदीप सिंह, जनसंचार विभाग से डॉ. भवनीत भट्टी, भारतीय रंगमंच विभाग से नवी खान, अंग्रेजी विभाग से शीनम ढींगरा, पंचकूला से नेहा गुलाटी और फरीदाबाद से असिस्टेंट प्रोफेसर ममता कुमारी शामिल हैं।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से 75 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिनमें बरेली, हैदराबाद, दिल्ली और हिसार शामिल हैं। कार्यक्रम में प्रो. सत्यपाल सहगल, प्रो. अशोक कुमार, डॉ. राजेश जायसवाल और प्रो. नीरज जैन भी शामिल रहीं। विभाग की वरिष्ठतम प्रो. नीरजा सूद ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 
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