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चंडीगढ़

पारस हॉस्पिटल्स पंचकुला में अब एडवांस हार्ट फ़ेल्यर सेंटर- डॉ. एच.के. बाली

December 17, 2020 08:28 PM

हार्ट फ़ेल्यर ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसमें हार्ट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और हार्ट शरीर के सभी हिस्सों तक खून पहुँचाने लायक काम नहीं कर पाता., हार्ट फ़ेल्यर के आम लक्षणों में सांस की तकलीफ, थकान, पैरों में सूजन, लगातार खांसी, भूख की कमी और शरीर में फल्यूड रिटेंशन होना हैं,  भारत में हार्ट फ़ेल्यर के लगभग 10 मिलियन मरीज़ हैं, भारत में हार्ट फेल से होने वाली मृत्यु दर काफी अधिक है, लेकिन भारत में ऐसे मरीज़ों में से 50% से कम को समुचित चिकित्सा मिल पाती है- डॉ. एच.के. बाली, हार्ट फ़ेल्यर बुजुर्गों में महामारी के रूप में बढ़ रही है - डॉ। अनुराग शर्मा 

चंडीगढ़ (अनुराधा कपूर)

सर्दियाँ आते ही हार्ट फेल होने के मामले भी बढ़ने लगे हैं. यूँ तो इन मामलों में अधिकतर मरीज़ बुजुर्ग हैं, लेकिन युवाओं में भी हार्ट फेल होने के मामले अब आम तौर पर सामने आने लगे हैं. चिंता का विषय यह है कि हार्ट फेल होने के बारे में और इसके लक्षणों के बारे में लोगों में जागरूकता का स्तर बेहद नीचे हैं.

पारस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के कार्डियक साइंसेज़ के चेयरमैन डॉक्टर एचके बाली के मुताबिक़ देश में हार्ट फ़ेल्यर से मरने वालों की तादाद बढ़ रही है. यह इसलिए भी हो रहा है कि आम तौर पर लोगों को हार्ट फेल होने और हार्ट अटैक में अंतर नहीं पता. लोगों में हार्ट फेल होने के लक्षणों के प्रति जानकारी नहीं है.

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर बाली को हृदय रोगों के इलाज का तीस वर्ष का अनुभव है और वे अब तक 15 हज़ार से अधिक दिल की गम्भीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए इंटरवेंशन कर चुके हैं.

हार्ट फ़ेल्यर से बचाव के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए पारस अस्पताल ने एक विशेष 'हार्ट फ़ेल्यर क्लिनिक' की शुरुआत की है. यह क्लिनिक हर वीरवार को काम करेगा और हार्ट फ़ेल्यर या उसके ख़तरे के दायरे में आने वाले मरीज़ों को विशेष समुचित इलाज मुहैया कराएगा. यह हार्ट फेलियर के मरीजों के लिए एक ऐसा स्टॉप सॉल्यूशन है, जहां मरीजों का मूल्यांकन किया जाता है और एआईसीडी, सीआरटी- डी, सीआरटी-पी जैसे थेरेपी दी जाती हैं।

हार्ट फ़ेल्यर से बचाव के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए पारस अस्पताल ने एक विशेष 'हार्ट फ़ेल्यर क्लिनिक' की शुरुआत की है. यह क्लिनिक हर वीरवार को काम करेगा और हार्ट फ़ेल्यर या उसके ख़तरे के दायरे में आने वाले मरीज़ों को विशेष समुचित इलाज मुहैया कराएगा. यह हार्ट फेलियर के मरीजों के लिए एक ऐसा स्टॉप सॉल्यूशन है, जहां मरीजों का मूल्यांकन किया जाता है और एआईसीडी, सीआरटी- डी, सीआरटी-पी जैसे थेरेपी दी जाती हैं।

 

इस सम्बंध में आज आयोजित एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स को सम्बोधित करते हुए डॉक्टर बाली ने बताया कि हार्ट फेल्योर एक मेडिकल स्थिति है जहाँ हृदय की मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं और शरीर को कुशलता से रक्त पंप नहीं कर पाती.

डॉक्टर बाली ने बताया कि इस समय देश में हार्ट फ़ेल्यर के लगभग 10 मिलियन मरीज़ हैं. हाल ही में हुई एक स्टडी से पता चला है कि देश में हार्ट फेल का डायग्नोज होने के एक साल के भीतर लगभग 23% मरीज़ों की मृत्यु हो जाती है।यह मॉर्टैलिटी (मृत्यु दर) प्रतिशत दुनिया भर में हार्ट फ़ेल्यर के रोगियों की तुलना से बहुत अधिक है।

डॉक्टर बाली ने बताया कि हार्ट फ़ेल्यर के मुख्य कारणों में अक्सर कोरोनरी आर्टरी रोग (CAD), हार्ट वाल्व ख़राब होने, हृदय की मांसपेशियों का कठोर हो जाना, जन्मजात बीमारी, गठिया, हाई ब्लड प्रेशर और इन्फ़ेक्शन आदि शामिल है।

हार्ट फेल होने के सामान्य लक्षण सांस फूलना, साँस की कमी (shortness of breath) और लगातार थकान बने रहना हैं। इसके अलावा दिल की अनियमित धड़कन (Arrhythmia) पैरों में सूजन, लगातार खांसी, भूख की कमी और शरीर में फल्यूड रिटेंशन हो जाना भी आम लक्षण हैं।

डॉक्टर बाली के मुताबिक़ हार्ट फ़ेल्यर के इलाज में लाइफ़ स्टाइल बदलाव के अलावा नमक के इस्तेमाल में कमी, नियमित व्यायाम, वजन में कमी, बीपी और ब्लड ग्लूकोज़ पर कंट्रोल और कोलेस्ट्रॉल, ACE inhibitors, बीटा ब्लॉकर्स, डायूरेटिक्स (पेशाब के ज़रिए बीपी कम करना) , ARNI और SGLT2 जैसी नई दवाएं शामिल की जाती हैं। दिल में रुकावट होने पर एआईसीडी, सीआरटी-पी और सीआरटी-डी जैसी डिवाइस थेरेपी भी शामिल की जाती है. हार्ट फ़ेल्यर की वजह रुकावट होने पर बैलून एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी भी की जाती है।

डॉक्टर बाली ने कहा कि हालांकि हार्ट फ़ेल्यर में विशेष और समुचित इलाज के लिए डेडिकेटेड हार्ट फ़ेल्यर क्लीनिक पश्चिमी देशों में सामान्य हैं, लेकिन अपने देश में इसकी कमी है। भारत में हार्ट फ़ेल्यर के 50% से कम रोगियों को एक्सक्लुसिव ट्रीटमेंट मिल पाता है।

प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में पारस सुपर स्पेशीयलिस्ट अस्पताल के कार्डियोलोज़ी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉक्टर अनुराग शर्मा, वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर कपिल क्षत्रिय, और वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर गगनदीप सिंह भी मौजूद थे।

इस मौक़े पर अनुराग शर्मा ने कहा कि हार्ट फ़ेल्यर एक जटिल सिंड्रोम है, जहां दिल शरीर की पोषण और ऑक्सीजन की आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम नहीं है। यह दुनिया भर में लगभग 26 मिलियन लोगों को प्रभावित कर चुकी है और हार्ट फ़ेल्यर बुजुर्गों में महामारी के रूप में बढ़ रही है। बुजुर्ग आबादी विशेष रूप से इसके ख़तरे में हैं। समय पर बीमारी का पता लगाने और एक्सक्लुसिव ट्रीटमेंट हार्ट फ़ेल्यर से होने वाली से मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।

पारस हॉस्पिटल्स पंचकूला के सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी डॉक्टर कपिल चटर्जी ने कहा कि आम जनता में गलत धारणा है कि हार्ट अटैक, कार्डिएक अरेस्ट और हार्ट फेल्योर एक ही है। ये अलग-अलग बीमारियाँ हैं.

डॉक्टर गगनदीप सिंह ने बताया कि हार्ट फ़ेल्यर के लक्षणों, एसेसमेंट और इलाज के बारे में जागरूकता इस बीमारी का मुकाबला करने के लिए ज़रूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि किया कि पारस अस्पताल पंचकूला अब चिकित्सीय सुविधाओं के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार, सीजीएचएस, सभी मुख्य टीपीएएस और कोरपोरेट्स के साथ-साथहरियाणा सरकार के साथ भी संबद्ध है।

 
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