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पंजाब

संसद में कृषि मंत्री द्वारा किसानों की मौत के आंकड़े देने से इनकार करना अमानवीय: चीमा

February 14, 2021 11:06 AM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
किसान आंदोलन में शहीद होने वाले किसानों पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा संसद में दिए गए बयान पर टिप्पणी करते हुए आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि तोमर का बयान केंद्र सरकार का भारत के आमलोगों के प्रति गैर जिम्मेदार और अमानवीय व्यवहार को दर्शाता है। पार्टी मुख्यालय से जारी बयान में चीमा ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा देश के किसानों की मौत का ब्यौरा न दे पाना सरकार की विफलता को साबित करता है। इससे पता चलता है कि मोदी सरकार किसानों के प्रति कितनी गैर जिम्मेदार है। केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा संसद में यह कहना बेहद अमानवीय और अहंकारपूर्ण है कि आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों की संख्या के कोई आंकड़े सरकार के पास नहीं है। देश के किसान कई महीनों से नए कृषि कानूनों को अपना डेथ वारंट बता रहे हैं लेकिन सरकार ने किसानों के दावे को गलत ठहराने के लिए नए कृषि कानूनों के विज्ञापन पर 8 करोड़ रुपये खर्च किए। शहीद किसानों का इससे बड़ा अपमान और क्या हो सकता है कि कि मोदी सरकार गिने चुने कॉर्पोरेटरज को फायदा पहुंचाने वाले कानून का प्रचार करने के लिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए।
उन्होंने कहा कि किसान आदोलन में शामिल होने वाले 225 से ज्यादा किसानों ने अपनी जान गवां दी है। बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार के पास उन शहीद किसानों की कोई जानकारी नहीं है। देश के किसान देशवासियों के भोजन का इंतजाम के लिए दिन-रात अपने खेतों में काम कर अन्न उपजाते हैं। देश की सीमा की रक्षा भी किसानों के बेटे ही अपनी जान की बाजी लगाकर करते हैं और दुश्मनों से देश को बचाते हैं। लेकिन मोदी सरकार देश के किसान के संघर्ष को नकार रही है। देश के किसानों की बात मानने के बजाय केंद्र सरकार कहती रही कि उन्हें सरकार पर विश्वास करना चाहिए कि ये कानून किसानों के पक्ष में हैं, लेकिन जिस सरकार के पास किसानों की मौत का आंकड़ा तक नहीं है उसपर देश के किसान कैसे भरोसा कर सकते हैं?
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार कुछ कॉरपोरेट घरानों की इतनी गुलाम हो गई है कि वह उनके आदेश के बिना कोई सरकारी योजना नहीं बना सकती। देश के लोगों ने अब तक बांसुरी बजाते हुए नीरो की कहावत सुना है। आज भारत के लोग आधुनिक युग के 'नीरो' को देख रहे हैं। सडक़ों पर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हुए देश के किसान शहीद हो रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनाप-शनाप बातें करने में व्यस्त हैं।

 
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