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राष्ट्रीय

व्यंग्य: शनिवार के उपाय

October 19, 2021 09:18 PM

बाबू राम लाल को कई दिनों से लग रहा था कि परिवार में कुछ ठीक नहीं चल रहा। आपस में अनबन रहती है। गुडड्ो 31 पार कर गई है। घर कोई आता नहीं। उसे कोई भाता नहीं। पुत्तर जी तीन साल से इंजीनियरिंग करे बैठे हैं, बस इंटरव्यू ही दे रहे हैं। एक बिल्डर ने फलैट के लिए एडवांस लिए और गायब हो गया। पैट्र्ोल ने पैदल चलवा दिया है। प्याज ने रुला दिया है। अच्छे की बजाय बुरे दिन आ गए हैं।
किसी ने उन्हें एक गोल्ड मेडलिस्ट, विश्व प्रसिद्ध पंडित जी का नाम सुझाया। बताया कि बड़े बड़े मंत्री तक पंडित जी के चरण दबाते रहते हैं। बाबूराम लाल ने सुबह सुबह वहां नंबर लगाया। सुबह के बैठे बैठे बैठे चार बजे नंबर आया। पंडित जी त्रिकालदर्शी थे। हाथ देखने की बजाय, चौखटा देखते ही बता दिया- घोर संकट से गुजर रहे हो। अर्श से फर्श पर आ गए हो। सड़क पर आ गए हो। लखपति हो परंतु पत्नी भी पति नहीं मानती। जाओ आसान से उपाय करो। कल्याण होगा। हर शनिवार अपने खाने में से एक भाग कुत्ते को, एक गाय को, एक कउव्वे को, एक भिखारी को और एक ब्राहम्ण को दिया करो।
इतना सरल उपाय सुनकर बाबू रामलाल पछताने लगे कि यहां पहले टोकन क्यों नहीं लिया! घर पहुंचते ही श्रीमती जी को समझाया। शनिवार को सुबह सुबह बाबू रामलाल पंचग्रास लेकर उपाय करने निकल पड़े। सोचा पहले इन पांच प्राणियों को भोजन करवा दें, उसके बाद ही अपना मुंह जूठा करेंगे।
कुत्ते वेैसे तो गली में से किसी को निकलने नहीं देते थे। लेकिन ऐसा लगा आज भूख हड़ताल पर हैं। दूर दूर तक कोई नजर ही नहीं आ रहा था। किसी से कुत्तों का पता पूछते पूछते एक नुक्कड़ पर पहुंचे जहां एक नहीं अपितु पांच पांच कुत्ते जी कूड़े के ढेर पर हाई लेवल की कान्फ्रेंस कर रहे थे । उन्हें देख कर तसल्ली हुई कि अब मनोकामना पूरी होने में बस कोई देर नहीं हैं। उन्होंने उनके आगे खीर ,पूरी, हलुवा , रायता आदि ऐसे सजा दिया जैसे श्राद्ध मे श्रद्धावश रखतेे हैं। लेकिन कूकुर बिरादरी ने खाना तो दूर ,उसे देखा तक नहीं और आराम फरमाने लगे। बाबू रामलाल ने उनसे भोजन ग्रहण करने की जेैसे ही मनुहार की तो एक श्वान महोदय गुस्से में आ गए औेर वे उनसे कटते कटते बचे। खाना वाना वहीं छोड़ कर जान बचाते हुए उल्टे पैर भागे।
अब तलाश थी काग महाराज की। जहां सारा दिन कांव कांव की आवाजें आती थी वहां पूरा सन्नाटा पसरा हुआ था। लग रहा था श्राद्ध का सीजन समाप्त होने के बाद , सब रिलैक्स करने किसी हॉलीडे टूर पर निकले हुए हैं। अब गाय ढूंढने की बारी थी। एक दिखी जो कूड़ा खा रही थी। भोजन की डिस्पोजेबल प्लेट उसके सामने रखी। उसने आखें फाड़ कर आलू, पूरी, हलवे, खीर यहां तक सिलाद पर भी नजर डाली और रिजैक्ट कर दिया।
मंदिर के आगे भिखारी जमे हुए थे। पहले तो वे ऐसा खाना देख कर टूट पड़ते थे और छीना झपटी में कपड़े तक फाड़ डालते थे। लेकिन खाना देखते ही मुंह दूसरी तरफ फेर लिया। मंदिर के अंदर हेड पुजारी की बजाय अस्सिटेंट पुजारी जी जमे हुए थे। बिना कोई भूमिका बांधे सीधे पूछने लगे, ‘वत्स क्या लाए हो?’ बाबू रामलाल ने प्लेट के उपर से दूसरी प्लेट हटाई तो वे बोले- जजमान! आज कल ये सब कोैन ग्रहण करता है? ये सब खा खा कर वेट 120 किलो हो चला है। शुगर, बी. पी और कोलेस्ट्र्ोल मंहगाई की तरह बढ़ रहा है। आप केवल दक्षिणा ही रख दें।
पहले शनिवार ही अपशकुन हो गया। सुबह से शाम हो गई। किसी अनिष्ट की आशंका बढ़ गई। कोई उपाय नहीं हो पा रहा था। बाबू रामलाल ,सात शनिवार, ट्र्ाई करने के बाद उन्हीं पंडित जी के दरबार में दक्षिणा की पर्ची कटवा कर टोकन लेकर चार घंटे बाद धक्के खाते पहुंचे । पंडित जी जानी जान थे। हाथ देखने की बजाय चौखटा देखते हुए पूछने लगे- भोजन में कया क्या रखा था ? बाबू रामलाल ने पिचकी छाती फुला कर बड़ी शान से बताया महाराज! देसी घी की पूरियां, ड्राई फू्रट से भरपूर खीर, मटर पनीर की सब्जी, कचूमर सलाद, रायता वगैरा ...। बाबू राम लाल ने ट्र्ेडिशनल मेनू एक्सप्लेन कर दिया।
पंडित जी ने डांट लगाई- अरे मूर्ख! आजकल ऐसा भोजन हम तो क्या कुत्ते तक नहीं करते। तभी तो एक महीने से तुम्हारा कोई उपाय सफल नहीं हुआ। ऐसा मेनू रखोगे तो अच्छे दिन इस जन्म तो कया अगले जन्म में भी नहीं आएंगे। आज के दिन अभी भी तुम घिसे पिटे सदियों पुराने मेन्यू से चिपके हुए हो। अपनी दृष्टि और दृष्टिकोण बदलो। जमाना बदल गया है। तुम नहीं बदले। बाबू राम लाल के ज्ञान चक्षु ओपन हो गए।
अगले शनिवार बाबू राम लाल ने उपाय किया जो बड़ा सक्सेसफुल रहा। कउव्वे भी आए, कुत्ते भी आए, भिखारी भी टूट पड़े। गाय ने भी डबल खाया। पंडित जी ने भी बड़े चाव से भोजन किया और मन से आशीर्वाद दिया।
इस बार बाबू रामलाल ने ऑन द स्पॉट ,सबके स्वादानुसार , डोमिनो , जोमैटो, स्विगी से पिज्जा ,बर्गर, केक ,कोल्ड ड्रिंक और हार्ड ड्रिंक्स , आइसक्रीम वगैरा वगैेरा का आर्डर दिया । कउव्वों और कुत्तों के लिए नॉन वेज आयटम्स आर्डर किए । सब ने उनका उपाय सफल कर दिया।
बाबू रामलाल अब अच्छे दिनों की आस में हर शनिवार यही फार्मूला अपना रहे हैं। कंपनियों ने उन्हें स्पेशल डिस्काउंट देना शुरु कर दिया है। कुछ ने उन्हें ब्रांड एम्बेस्डर बना दिया है। कुत्ते पहचानने लगे हैं। कउव्वे खुद आने लगे हैं। भिखारी शनिवार को सलाम करने उनके घर के आगे ही जमा हो जाते हैं। पंडित जी पे टी एम पर वीकली शनिवारी दक्षिणा पाकर ऑनलाइन आशीर्वाद दे रहे हैं। बस अब देखना यह है कि किस शनिवार से अच्छे दिन आने चालू होंगे ?
- मदन गुप्ता सपाटू,

 
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