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चंडीगढ़

नॉर्थ जोन एआईयू मीट में भाग लेंगे 150 से अधिक वाइस चांसलर

Dharam Loona | November 25, 2021 07:22 PM
Dharam Loona

सस्टेेनेबल विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए करेंगे विचार विमर्श

  चंडीगढ़ (आर.के.शर्मा)

समानता और टिकाऊ समाज सुनिश्चित करने के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों पर विचार-विमर्श करने के लिए नॉर्थ जोन के विश्वविद्यालयों के 150 से अधिक कुलपति कल से दो दिवसीय सम्मेलन में भाग लेंगे।

बैठक का आयोजन एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से किया जा रहा है, जिसने एजेंडा निर्धारित किया है, और इसकी मेजबानी हिमाचल प्रदेश स्थित शूलिनी यूनिवर्सिटी द्वारा की जा रही है। जहां लगभग 50 कुलपतियों ने व्यक्तिगत तौर पर कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहने की पुष्टि की है, वहीं अन्य ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे।

आज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कर्नल (डॉ.) जी.थिरुवासागम, प्रेसिडेंट, एआईयू और वाइस चांसलर, एएमईटी यूनिवर्सिटी, चेन्नई और डॉ. (श्रीमती) पंकज मित्तल, महासचिव, एआईयू ने कहा कि बैठक ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मोड में आयोजित की जाएगी। इससे उन वाइस चांसलर्स को भी कॉन्फ्रेंस में शामिल होने का मौका मिलेगा जो कि फिजिकली कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हो सके। वे सभी ऑनलाइन मोड के माध्यम से इस विचार-विमर्श में हिस्सा ले सकेंगे।

उन्होंने कहा कि बैठक का एजेंडा चार सतत विकास लक्ष्यों (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स-एसडीजी) के कार्यान्वयन के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हिस्सा है। इनका उद्देश्य लैंगिक समानता प्राप्त करना, देशों के भीतर और देशों के बीच असमानता को कम करना, स्थायी शहरों और समुदायों का निर्माण करना और उच्च शिक्षा संस्थानों में स्थायी खपत और उत्पादन पैटर्न सुनिश्चित करना है। कॉन्फ्रेंस के दौरान इन विषयों पर प्रमुख तौर पर ध्यान दिया जाएगा।

शूलिनी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर अतुल खोसला, जो कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करेंगे, ने कहा कि कॉन्फ्रेंस का एजेंडा सतत विकास लक्ष्यों और विशेष रूप से हिमालयी ईकोलॉजी और पर्यावरण पर शूलिनी यूनिवर्सिटी के फोकस के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी के कई शोधकर्ता संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन और पर्यावरण के संरक्षण में लगे हुए हैं।

शूलिनी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर अतुल खोसला, जो कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करेंगे, ने कहा कि कॉन्फ्रेंस का एजेंडा सतत विकास लक्ष्यों और विशेष रूप से हिमालयी ईकोलॉजी और पर्यावरण पर शूलिनी यूनिवर्सिटी के फोकस के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी के कई शोधकर्ता संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन और पर्यावरण के संरक्षण में लगे हुए हैं।

कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव राम सुभाग सिंह करेंगे और शूलिनी यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रो.पीके खोसला विशिष्ट अतिथि होंगे। शूलिनी यूनिवर्सिटी, सोलन के वाइस चांसलर प्रो. अतुल खोसला द्वारा स्वागत भाषण दिया जाएगा।शूलिनी यूनिवर्सिटी सतत विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन को लेकर पहले से ही किए गए यूनिवर्सिटी रिसर्च, इनोवेशन उपलब्धियों और इस संबंध में की गई नीतिगत पहलों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी भी आयोजित करेगी।

शूलिनी यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एनर्जी साइंस एंड टेक्नोलॉजी और कॉन्फ्रेंस के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर एस.एस. चंदेल के अनुसार, विभिन्न विषयों पर चार तकनीकी सत्र होंगे, जिसमें प्रतिष्ठित विशेषज्ञ विशिष्ट विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

सतत विकास लक्ष्यों की अवधारणा को 2012 में रियो डी जनेरियो में सतत विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के दौरान विकसित किया गया था ताकि दुनिया के सामने आने वाली तत्काल पर्यावरणीय, राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों को पूरा करने वाले सार्वभौमिक लक्ष्यों का एक सेट तैयार किया जा सके। संयुक्त राष्ट्र एसडीजी 17 परस्पर जुड़े वैश्विक लक्ष्यों का एक संग्रह है जिसे ‘ब्लूप्रिंट टू अचीव ए बेटर एंड मोर सस्टेनेबल फ्यूचर फॉर ऑल’ यानि ‘सभी के लिए एक बेहतर और अधिक टिकाऊ भविष्य प्राप्त करने का खाका’ के रूप में तैयार किया गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2015 के वर्ष में एसडीजी की पहचान की गई थी और इसके तहत लय लक्ष्यों को वर्ष 2030 तक हासिल करने का इरादा है।इन लक्ष्यों को 2030 एजेंडा नामक संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में शामिल किया गया है। कुल 17 व्यापक और एक-दूसरे से संबंधित लक्ष्य हैं जिनमें प्रत्येक लक्ष्य के लिए विशिष्ट लक्ष्य हैं, साथ ही संकेतक भी हैं जिनका उपयोग प्रत्येक लक्ष्य की प्रगति को मापने के लिए किया जा रहा है।

शूलिनी यूनिवर्सिटी इस संबंध में पहले ही एसडीजी को लागू करने के लिए नीतिगत पहल कर चुका है क्योंकि यूनिवर्सिटी द्वारा इस संबंध में नीतिगत पहल और अनुसंधान किया जा रहा है। इसने इन लक्ष्यों की दिशा में अनुसंधान और कार्य करने के लिए यूनिवर्सिटी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन एनर्जी साइंस एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना भी की है।

सम्मेलन में भाग लेने वाले क्षेत्र के वाईस चांसलर्स प्रो. आर.सी. सोबती, पूर्व वाईस चांसलर पंजाब यूनिवर्सिटी; डॉ परविंदर सिंह, वाईस चांसलर, रयात बहरा विश्वविद्यालय, मोहाली; लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के प्रो वाइस चांसलर डॉ लोवी राज गुप्ता; प्रो. बी.आर. कम्बोज, वाईस चांसलर गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार; प्रो जी.एस.बाजपेयी, वाईस चांसलर राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, पटियाला; प्रो करमजीत सिंह, वाईस चांसलर जगत गुरु नानक देव पंजाब स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी पटियाला सहित 150 से अधिक वाइस चांसलर नॉर्थ जोन एआईयू मीट में भाग लेंगे।

 
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