चण्डीगढ़ : थिएटर आर्ट्स, चण्डीगढ़ की टीम द्वारा आज गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब, सेक्टर–34 की संचालक कमेटी के सहयोग से श्री गुरु तेग बहादुर जी, भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी की 350वीं शहीदी शताब्दी को समर्पित लाइट-साइट एंड साउंड शो "गुरु तेग बहादुर सिमरियै" का आयोजन खुले दीवान में किया गया।
यह ऐतिहासिक शो प्रख्यात लेखक, फिल्मी कलाकार और इतिहास के शोधकर्ता नाटककार बलजिंदर सिंह दारापुरी द्वारा लिखा गया तथा कई मशहूर नाटकों का निर्देशन कर चुके राजीव मेहता द्वारा निर्देशित किया गया। पार्श्व गायन पम्मी हंसराज और अनुजोत कौर ने अपनी बेहद सुंदर आवाज़ में प्रस्तुत किया।
गहन शोध के बाद तैयार किए गए इस ऐतिहासिक शो में दिल्ली फतेह के बाद दिल्ली के ऐतिहासिक स्थलों की पुनर्रचना, श्री गुरु तेग बहादुर जी का बचपन, दारुल-इस्लाम के सपने के लिए मुग़ल शासन का अत्याचार, कश्मीरी पंडितों का गुरु जी के पास आना, गुरु जी का दिल्ली में शहादत के लिए पहुँचना और गुरु जी के लाड़ले सिख—भाई मती दास जी, भाई सती दास जी एवं भाई दयाला जी की शहादत—सभी को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। गुरु जी द्वारा मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए हँसते हुए दिया गया सर्वोच्च बलिदान दर्शकों के मन को गहराई तक छू गया।
सैकड़ों की संख्या में संगत एवं रंगमंच प्रेमियों ने इस शो को देखा और प्रशंसा करते हुए कहा कि “श्री गुरु तेग बहादुर जी के आध्यात्मिक जीवन और धर्म की खातिर दिए गए महान बलिदान को दर्शाने वाले दृश्य बेहद भावुक करने वाले थे, कई बार आँखें नम हो गईं। ऐसा लगा मानो हम उसी दौर में पहुँच गए हों और 350 वर्ष पहले चांदनी चौक, दिल्ली में घटित घटनाएं हमारी आँखों के सामने फिर से जीवंत हो उठी हों।”
किसी भी लाइट साइट एंड साउंड शो का प्रभाव तभी अमिट बनता है, जब अनुभवी टीम पूरे मन और समर्पण से प्रस्तुति दे। इस शो में थिएटर और फिल्म जगत के जाने-माने कलाकारों—योगेश अरोड़ा, सतपाल सिंह, रमेश भारद्वाज, राजीव मेहता, अवदेश कुमार, अरुण शर्मा, गोरकी, कमलनैन सिंह सेखों, गीता गांधी, आशा सकलानी, कविता सिद्धू, खुशप्रीत, मलकीत सिंह संटी, जसवंत सिंह, अर्शप्रीत सिंह, सूरज भारद्वाज, हरप्रीत सिंह, राहुल वर्मा, रविंदर सिंह, गौरव मेहता, संदीप कुमार और बलविंदर सिंह—ने विभिन्न भूमिकाएं निभाते हुए बहुत श्रद्धा, सम्मान और भावनात्मक गहराई के साथ मंच पर प्रस्तुति दी। सभी कलाकारों ने अपने-अपने पात्रों की भावना, संघर्ष और विचारों को अत्यंत कुशलता और जीवंतता से प्रस्तुत किया। वहीं, करण गुलज़ार ने दृश्यों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए लाइटिंग की विशेष तकनीकों का प्रयोग किया।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की सफलता पर गुरुद्वारा साहिब की कमेटी ने पूरी टीम का सम्मान करते हुए संगत का भी धन्यवाद किया और कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम सही मार्गदर्शन करते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां गुरु इतिहास से परिचित हो सकें।