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राष्ट्रीय

भारत आध्यात्मिक राष्ट्र : स्वामी चिदानंद

August 31, 2019 12:21 PM
ऋषिकेश/अहमदाबाद, ( ओम रतूड़ी)
रमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती , मौलाना महमूद असअद मदनी  महासचिव, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द, स्वामी नारायण गुरूकुल के स्वामी माधवप्रिय दास , अहमदाबाद ने  गुजरात राज्य के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी से भेंटवार्ता की। चर्चा के दौरान स्वामी चिदानन्द  ने कहा कि भारत आध्यात्मिक राष्ट्र है अतः हमें आध्यात्मिक पक्ष को ध्यान में रखते हुये वैज्ञानिक प्रयोग कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के विषय में ध्यान देना होगा। उन्होने बताया कि नदियों को जीवंत बनायें रखने के लिये हमने नदियों के तट पर आरती का नवोदित प्रयोग किया और देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी नदियों के तटों पर आरती आरम्भ की जिसके परिणाम भी सकारात्मक प्राप्त हुये। उन्होने बताया कि सन 1997 में परमार्थ गंगा तट पर गंगा आरती का शुभारम्भ किया गया था, आज वह आरती विश्व विख्यात हो चुकी है। साथ ही जन जागरण का उत्तम मार्ग भी है।

- वैज्ञानिक प्रयोग कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के विषय में ध्यान देना होगा, नदियों को जीवंत बनायें रखने के लिये हमने नदियों के तट पर आरती का नवोदित प्रयोग 

इस नवोदित प्रयास को हमने 1998 में गंगोत्री, सन 1999 में वाराणसी जिसे अतुल्य भारत में स्थान प्राप्त है और आज वाराणसी ही नहीं पूरे भारत की शान है। वर्ष 2000 में प्रयागराज में संगम आरती का क्रम आरम्भ किया। साथ ही रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी सहित भारत में नदियों के तटों पर बसे अनेक शहरों में आरती का क्रम आरम्भ किया। उन्होने बताया कि अमेरिका, यूरोप के अनेक देशों में, जमर्नी, माॅरीशस और विश्व के अन्य देशों में भी नदियों के तट पर आरती की गयी जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभाग किया और दिव्य संदेश को आत्मसात किया।
स्वामी जी ने अमन-एकता हरियाली यात्रा के विषय में जानकारी देते हुये बताया कि प्रथम चरण में ऋषिकेश से देवबन्द तक की यात्रा थी जिसमें हजारों की संख्या में हिन्दू-मुस्लिम भाई-बहनों ने मिलकर वृक्षारोपण किया तथा इसके माध्यम से एकता, समरसता, सद्भाव और भाईचारे का संदेश पूरे देश में गया। हमारा प्रयास है कि यह यात्रा देश के सभी राज्यों से होकर गुजरे तो हमारे राष्ट्र और पर्यावरण दोनों के लिये बेहतर परिणाम लेकर आयेगी। किसी ने क्या खूब कहा है कि ’’क्या बनाने आये थे क्या बना बैठे कहीं मंदिर बना बैठे कहीं मस्जिद बना बैठे। हमसे तो जात अच्छी परिंदों की कभी मंदिर पर जा बैठे तो कभी मस्जिद पर जा बैठे।’’ 
 उन्होंने राज्यपाल को अमन-एकता हरियाली यात्रा से सम्बंधित प्रपत्र सौंपे और इसे गुजरात के विभिन्न जिलों में प्रसारित करने का निवेदन किया।
राज्यपाल आचार्य  ने आमन्त्रण को स्वीकार किया और स्वामी जी से निवेदन किया कि आप हमारे लिये ऋषिकेश से रूद्राक्ष का पौधे का उपहार लाये है उसे साथ मिलकर लगायेंगे तो यह यादगार क्षण होगा। महामहिम के साथ सभी धर्मगुरूओं और विशिष्ट अतिथियों ने रूद्राक्ष के पौधे का रोपण किया।
 
मौलाना महमूद असअद मदनी ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिये  स्वच्छ जल, शुद्ध वायु और शुद्ध वातावरण का होना नितांत आवश्यक है। इनके अभाव में मनुष्य स्वस्थ्य नहीं रह  सकता है, इसलिये हम सभी का प्रथम कर्तव्य है कि वृक्षारोपण कर अपना और अपनी भावी पीढ़ी़ का जीवन सुरक्षित करे। उन्होने कहा कि सबसे पहले हम सब मनुष्य है, हम सभी का एक ही आसमान है और हम एक ही धरा की संतान है इसे ध्यान में रखते हुये कार्य करे न कि किसी कौम या मजहब के आधार पर। मनुष्य होने के नाते पर्यावरण का संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
स्वामी नारायण गुरूकुल के स्वामी माधवप्रिय दास ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य जीवन के लिये सबसे जरूरी हैं वायु और जल। इनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती अतः जाति, धर्म, सम्प्रदाय से उपर उठकर जीवन की मौलिक जरूरतों के लिये कार्य करना ही धर्म है।
महामहिम आचार्य देवव्रत  को अमन-एकता हरियाली यात्रा के प्रतीक के रूप में रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया और अहमदाबाद में होने वाली एक दिवसीय अमन-एकता हरियाली यात्रा में सहभाग हेतु आमंत्रित किया।
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