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राष्ट्रीय

वतन को चमन बनायें रखने का लिया संकल्प

September 01, 2019 08:49 PM

अहमदाबाद, (ओम रतूड़ी)

गुजरात प्रांत से अमन-एकता हरियाली यात्रा की विदाई हुई। इस यात्रा के दौरान लोगों ने अद्भुत संकल्प लिये और जोरदार समर्थन भी किया। अनेक स्थानों पर जोरदार स्वागत के साथ हजारों की संख्या में लोगों ने सहभाग किया और मिलकर पौधे लगाये। यह यात्रा जहां से भी गुजरती ’अलविदा प्लास्टिक-अलविदा गंदगी’ के नारे लगाते हुये गुरूकुलों और मदरसों के छात्रों ने उत्साह के साथ वृक्षारोपण अभियान में सहभाग किया।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज और मौलाना महमूद असअद मदनी महासचिव, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के पावन सान्निध्य में यात्रा का प्रथम चरण पूर्ण हुआ।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि अब यह अमन-एकता हरियाली यात्रा रूकेगी नहीं। उत्तराखंड से शुभारम्भ हुई यह यात्रा उत्तरप्रदेश से होते हुये दिल्ली एवं गुजरात में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण कर दूसरे चरण का समापन किया। तीसरे चरण में इस यात्रा के माध्यम से महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान एवं देश के अन्य स्थानों में पर्यावरण एवं जल संरक्षण का अलख जगाते हुये वृक्षारोपण किया जायेगा। स्वामी जी ने कहा कि यह यात्रा जहां-जहां से गुजरी वहां पर लोगों ने इस मानसून सत्र में 11-11 पौधे लगाने का संकल्प लिया। मैं समझता हूँ यह संकल्प पूरा होता है तो यह एक बहुत बड़ी शुरूआत होगी और इसके अद्भुत परिणाम प्राप्त होंगे।

तीसरे चरण में इस यात्रा के माध्यम से महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान एवं देश के अन्य स्थानों में पर्यावरण एवं जल संरक्षण का अलख जगाते हुये वृक्षारोपण किया जायेगा। स्वामी जी ने कहा कि यह यात्रा जहां-जहां से गुजरी वहां पर लोगों ने इस मानसून सत्र में 11-11 पौधे लगाने का संकल्प लिया। मैं समझता हूँ यह संकल्प पूरा होता है तो यह एक बहुत बड़ी शुरूआत होगी और इसके अद्भुत परिणाम प्राप्त होंगे।

 स्वामी जी ने बताया कि इस यात्रा के माध्यम से हमने पर्यावरण संरक्षण, जल का संरक्षण, एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करना, भारत को खुले में शौच से मुक्त करना, वृक्षारोपण और वृक्षों का संरक्षण, शौचालय का उपयोग करना, आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखना जैसे अनेक संकल्प लिये गये, मुझे तो लगता है इनका बहुत गहरा असर होगा।

स्वामी जी ने कहा कि यही तो सेवा है पर्यावरण की; यही तो काम है महंत, मौलाना, साधु-संत, सूफी, फकीर और धर्मगुरूओं का; अब तक हम बंदगी की बात करते रहे लेकिन अब गंदगी की बात भी करें। फिर गंदगी चाहे दिमागों की हो या फिर गलियों की हो, मोहल्लों की हो या कहीं और की, कहीं भी गंदगी का नामोनिशान नहीं रहना चाहिये। हम एक नये भारत की ओर बढ़ रहे है, नये भारत में हमें नवोदित संकल्प लेना है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि कई बार देश में कुछ ऐसी घटनायें घटती है जिनमें उस वक्त नाम मुस्लिम समुदाय का लिया जाता है परन्तु ऐसा सभी मानते है कि इस्लाम तो शान्ति का प्रतीक है, तो फिर ऐसा क्योें हो जाता है कि कुछ लोग इस्लाम के रास्ते पर न जाकर इस तरह की कुछ करतूते कर देते है। इस्लाम तो शान्ति का प्रतीक है स्वामी जी ने वहां पर बैठे हुये धर्मगुरूओं से निवेदन किया कि हम सभी को इस ओर भी ध्यान ने की जरूरत है जिससे हमारे देश की जवानी इन भटकाओं के रास्ते पर न जाये, आतंक के रास्ते पर न जाये इसकी जिम्मेदारी भी हम सभी लोगों की है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि युवाओं को एक दिशा चाहिये; एक दर्शन चाहिये और वह दर्शन हो शान्ति का, प्रेम का और मोहब्बत का। स्वामी जी महाराज ने कहा कि आप चाहे किसी भी धर्म को मानने वाले हो, अब सभी को शान्ति स्थापित करने का एक संकल्प लेना होगा। उन्होने कहा कि धर्म हिंसा नहीं बल्कि अहिंसा सिखाता है, धर्म के नाम पर हिंसा, देशद्रोह, लूटपाट करना और धर्म के नाम पर किसी भी तरह की चिंगारी छोड़ देना, चिंगारी चाहे लोगों के दिलों और दिमागों में छोड़ी गयी हो या फिर दीवारों पर लिखी इबारत की चिंगारी हो इस तरह का कोई भी प्रयास नहीं किया जाना चाहिये।

स्वामी जी ने कहा कि अध्यात्म की शक्ति से आतंक की शक्ति को जीतना होगा। आतंक की शक्ति बहुत कम लोगों की शक्ति है और अध्यात्म की शक्ति पूरे संसार की शक्ति है और भारत उसमें अग्रणी भूमिका निभा सकता है और एक दिशा प्रदान कर सकता है क्योंकि भारत शान्ति की भूमि है। भारत कोई धरती का टुकड़़ा नहीं बल्कि भारत तो जीता-जागता राष्ट्र है। उन्होने कहा कि माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी कहा करते थे कि ’टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता है और छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता है’। अतः अपने दिलों को विशाल बनायें और देश को भी विशालता प्रदान करें। जैसे हम अपने घरों की हिफाज़त करते है वैसे ही अपने देश की हिफाज़त करंे। ’’ये माना की इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके हम, कुछ कांटे तो कम हुये गुज़रे जिधर से हम।’’

उन्होने कहा कि ये नफरत के कांटे, हिकारत के कांटे, भेदभाव के कांटे, गंदगी के कांटे, अशिक्षा के कांटे तथा समाज में फैली बुराईयों के कांटों से हमें निजात पाना है ताकि इस देश से अमन, चैन, एकता, मोहब्बत, प्रेम और अहिंसा की खुशबू चारो ओर फैल सके। यही तो इस देश की विरासत है इस विरासत को बचा कर रखे। भारत की संस्कृति महान संस्कृति है अद्भुत संस्कृति है इसी संस्कृति के साथ आगे बढ़ें।

मौलाना महमूद असअद मदनी महासचिव, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द ने कहा कि यह यात्रा भाईचारे की यात्रा थी जिसमें कोई द्वेष, विरोध, जातिवाद, परिवारवाद, नक्सलवाद और अन्य कोई वाद-विवाद नहीं बल्कि हम सभी का उद्देश्य देश में शान्ति की स्थापना करना है और यही है इस यात्रा के माध्यम से संदेश दिया गया। इस अमन-एकता हरियाली यात्रा के माध्यम से हमने देश में समरसता और स्वच्छता का संदेश देते हुये एक संगम स्थापित करने का संदेश दिया। जिस प्रकार एक छोटा सा बीज विशालता को धारण करता है तो बड़ा सा वृक्ष बन जाता है। हम यात्रा के माध्यम से यही संदेश देना चाहते है कि वृक्षों की तरह विराटता और विशालता को धारण करे और इस देश में एकता के संगम को बनाये रखे।

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