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फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के बैंक धोखाधड़ी मामले पर सीबीआई कार्रवाई में देरी क्यों, चिराग मदान ने उठाए सवाल

February 14, 2020 10:22 PM

  नई दिल्ली: हालहिं में पर्दाफास हुए फ्रॉस्ट इंटरनेशनल और एफटीए एचआरएसपी सलूशन द्वारा किये गए बैंक घोटाले के सन्दर्भ में सुप्रीम कोर्ट में कार्यत एडवोकेट चिराग मदान ने प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया।

मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस घोटाले की सीबीआई जांच ठीक से नहीं की जा रही, एफआईआर दर्ज हुए एक महिना पूरा होने जा रहा है परंतु अभी तक सीबीआई के हाथ कुछ नहीं लगा। रिपोर्ट के मुताबिक फ्रॉस्ट इंटरनेशनल को एनपीए घोषित किया जा चुका है यानी वह अब लोन की राशी नहीं चुका सकते पर मेरे एंगल से देखा जाए तो फ्रॉस्ट इंटरनेशनल की बहुत सारी सिस्टर कम्पनीज हैं जो वर्तमान समय में अपना व्यापार रन कर रही हैं  और इन कम्पनीज की डायरेक्टर्स कोई और नहीं बल्कि फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के निदेशक उदय और सुजय देसाई के रिश्तेदार ही हैं।

पूरी योजना के साथ इन दोनों निदेशकों ने धीरे-धीरे इस कंपनी से अपने आपको दूर किया जिससे यह दोनों कार्यवाई से बच सकें। मेरी सीबीआई से अपील है कि वह उन कम्पनीज को भी टारगेट करें और जल्द से जल्द इन घोटाले की जांच कर इसकी रिकवरी कराएं। मेरा मानना है कि यह बड़े-बड़े घोटाले सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालते हैं। चिराग ने बताया कि इस बैंक घोटाले को लेकर पहले ही देश के विभिन्न प्राधिकरणों, प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, प्रवर्तन एजेंसियों के मुख्य सतर्कता कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, भारत के महानिदेशक, आयकर निदेशक, सीबीआई जैसे विभिन्न प्राधिकरणों के समक्ष शिकायत दर्ज की थी। मैंने निम्नलिखित शिकायतों का विषय क्रमशः संबंधित मंत्रालयों, परीक्षण एजेंसी और वाहन निर्माताओं के समक्ष दिनांक 18 दिसम्बर 2019 और 6 जनवरी 2020 को की थी जिसमे मैंने इस बैंक घोटाले में शामिल फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के डायरेक्टर, प्रमोटर्स, गयरेंटर के खिलाफ स्ट्रिक्ट एक्शन लेने को कहा भी था। लेकिन इन पर कोई भी तरीके की सुनवाई नहीं हुई।

गौरतलब है कि पिछले महीने जनवरी में सीबीआई ने मुंबई की फ्रॉस्ट इंटरनेशनल और उसके निदेशकों के खिलाफ 3500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। सीबीआई अधिकारी के मुताबिक फ्रॉस्ट के निदेशक उदय और सुजय देसाई के अलावा 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 3500 करोड़ रुपये का यह घोटाला 1-2 नहीं बल्कि 14 बैंकों के साथ किया गया है। सीबीआई के मुताबिक, बैंक ऑफ इंडिया के कानपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की शिकायत पर यह केस दर्ज किया गया है। सीबीआई का दावा है इन लोगों ने कारोबार का झांसा देकर धोखाधड़ी की है। इन लोगों ने बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई वाले कंसोर्शियम से कर्ज लिया और तय तारीख पर उसने अदा नहीं किया।

शिकायत में कहा गया है कि कंपनी, उसके डायरेक्टर, गांरटी देने वाले और कुछ अन्य लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक से फंड हासिल किया और रकम का हेरफेर किया। इस फर्जीवाड़े के जरिए कंपनी और उसके डायरेक्टरों ने 3500 से ज्यदा करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की। बैंक ने 18 जनवरी 2019 को उदय और 10 अन्य लोगों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था। इसके बाद इंडियन ओवरसीज बैंक के कहने पर एक और सर्कुलर जारी किया गया था। इस मौके पर चिराग मदन ने कहा की मेरे द्वारा किये गए शिकायत पर अगर सुनवाई की गयी होती तो हम आज इस बैंक घोटाले को रोक सकते थे।

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