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राष्ट्रीय

मकान देने में एक वर्ष से ज्यादा की देरी तो 10 प्रतिशत ब्याज के साथ करनी होगी पूरी कीमत वापस

May 18, 2019 10:27 AM

पंचकूला, संजय मिश्रा:
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने एक अहम् फैसले में फ्लैट मालिकों को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि अगर फ्लैट का कब्जा देने में बिल्डर एक वर्ष से ज्यादा की देरी करता है तो उसे पूरी रकम ब्याज के साथ उपभोक्ता को लौटाना होगा। कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि बिल्‍डर अनिश्चित काल तक ग्राहकों को फ्लैट के पजेशन के लिए इंतजार नहीं करवा सकते। हालांकि, अभी तक इस इन्तजार की कोई समयसीमा तय नहीं थी कि पजेशन में कितना विलंब होने पर ग्राहक बिल्‍डर से अपने पैसे वापस मांग सकता है। लेकिन अब राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने इसकी भी समयसीमा तय कर दी है।
शलभ निगम नाम के एक ग्राहक ने गुड़गांव के गीनपोलिस प्रोजेक्‍ट में एक फ्लैट खरीदा था। लगभग एक करोड़ रुपये की कीमत के इस घर के लिए निगम 90 लाख रुपये तक का भुगतान कर चुके थे। बिल्‍डर के साथ हुए एग्रीमेंट के अनुसार, उन्‍हें यह फ्लैट 36 महीने में मिल जाना चाहिए था इसके बाद 6 महीने का ग्रेस पीरियड चल रहा था। लेकिन जब 42 महीने बाद भी निगम को उसके फ्लैट का कब्ज़ा नहीं मिला तो उसने इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग को दी। प्रतिवादी ने आयोग को अपनी दलील में बताया कि खरीददार कॉन्ट्रैक्ट अधिनियम के तहत मुआवजे का हकदार नहीं है। फिर रेरा अधिनियम 2016 के आ जाने से उपभोक्ता मंच में सुनवाई नहीं हो सकती। आयोग ने शिकायत संख्या 1702 ऑफ़ 2016 का निपटारा करते हुए प्रतिवादी के दलील को पूर्णतया ख़ारिज कर दिया और कहा कि उपभोक्ता ने सातवे स्टेज तक क़िस्त की अदायगी की है और बिल्डर के तरफ से अत्यधिक देरी होने के कारण ही उपभोक्ता ने बाकि किस्तों की अदायगी रोक दी। आयोग ने कहा कि तय समयसीमा में ग्राहक को फ्लैट का पजेशन नहीं देने पर बिल्‍डर को 10 फीसदी ब्‍याज के साथ पूरी राशि लौटानी होगी।

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