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पंजाब

कंजक पूजन के लिए कन्याएं ढूंढते दिखे लोग

October 07, 2019 11:55 AM

जीरकपुर, जेएस कलेर
नवरात्र के अंतिम दिन रविवार टज्ञेश्र रामनवमी सोमवार को शहर के लोगों ने श्रद्धा भाव से दुर्गा माता का पूजन किया और कन्याओं को भोजन करवाया। लेकिन कन्याओं को ढूंढने और उन्हें घर तक लाने के लिए कई तरह के पापड़ बेलने पड़े। अष्टमी और नवमी के दिन कंजक पूजन के लिए भी लोगों को घरों के आगे लाइन लगाकर नंबर लगाना पड़ा। रविवार को नवरात्र के समापन पर अष्टमी और दुर्गा नवमी को क्षेत्र में सभी लोग अपने घरों में माता की कढ़ाई कर कन्या पूजन कर उन्हें भोजन करवाने का प्रबंध किया गया था।

शहर में सभी स्थानों पर कन्याओं को भोजन करवाने और उनका पूजन करने के लिए लोगों को इधर-उधर भटकते हुए देखा गया। कन्याओं की कमी के चलते लोग खासे परेशान रहे। इसी कारण एक कन्या को दस-दस घरों में भोजन करना पड़ा। नवरात्र में वे लोग प्रसन्न दिखाई दिए जिनके घरों में कन्याएं हैं। नवरात्र के अंतिम दिन आज लोगों को अहसास हुआ की समाज में कन्याओं का कितना महत्व और आवश्यकता है। कंजक पूजन के लिए सुबह से ही कन्याओं वाले घरों में लोग बेटियों को भेजने के लिए चक्कर लगाने लगे। कई गृहिणियों ने दिन उगने से पहले ही कंजकों के लिए कड़ाही चढ़ा दी थी ताकि जल्द पूजन कर लें और उन्हें कन्याओं को घर लाने के लिए भटकना न पड़े। लेकिन फिर भी काफी देर तक उन्हें इंतजार करना पड़ा। कन्याओं की अधिक मांग के चलते कई कन्याओं को तो दस-दस घरों में जाना पड़ा। भोजन से पेट भरा होने के चलते कुछ घरों में तो प्लेट में खाना, फल और पैसे रखकर ही कन्याओं को दिया गया।
आज के पढ़े-लिखे युग में भी लिंगानुपात संभल नहीं पा रहा है। शहर के कई क्षेत्रों में कंजक पूजन के लिए कन्याओं को ढ़ूंढने में लोगों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। आस-पड़ोस में छोटी कन्याएं नहीं मिलने पर झुग्गी झोपड़ियों से कन्याओं को पूजन के लिए लाया गया। जो लोग झुग्गियों के पास से भी नाक-भों सिकोड़कर निकलते थे, आज वही लोग कन्याओं के लिए वहां चक्कर लगाते देखे गए। कई लोग तो कन्याओं को लेने और छोड़ने के लिए बाकायदा कारें लेकर आए और पूजन के बाद उन्हें गाड़ियों में ही छोड़कर गए। झुग्गी-झोपड़ियों में भी बच्चियों को सुबह ही नहला-धुलाकर साफ कपड़े पहना दिए थे।

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