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हिमाचल प्रदेश

पठन पाठन का तौर तरीका बदलना होगा: डिप्टी स्पीकर हंस राज

December 27, 2019 09:57 AM

ज्वालामुखी  (विजयेन्दर शर्मा)

विधानसभा उपाध्यक्ष हंस राज ने  यहां अध्यापकों से स्कूली शिक्षा में पढ़ाने का आहवान करते हुये दलील दी कि महज किताबी ज्ञान से कुछ नहीं होने वाला।

ज्वालामुखी के रविन्दर नाथ टैगोर मेमोरियल स्कूल के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बोलते हुये उन्होंने कहा कि विडंबना है कि हमारी शिक्षा पध्दति में बच्चों की मौलिकता को पूरी तरह नष्ट करने के सारे तत्व विद्यमान हैं। उन्हें एक बने-बनाए शैक्षिक सांचे में ढालने की एक हद तक क्रूर कोशिश जारी है। जो अपनी सोच, तर्कबुध्दि और मौलिकता को परे रखकर आंख-कान बंद करके, होंठ सिलकर इस सांचे में पूरी तरह ढल जाता है, उसे सफल करार दिया जाता है।

ज्वालामुखी के रविन्दर नाथ टैगोर मेमोरियल स्कूल के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में विधानसभा उपाध्यक्ष हंस राज ने  कहा कि विडंबना है कि हमारी शिक्षा पध्दति में बच्चों की मौलिकता को पूरी तरह नष्ट करने के सारे तत्व विद्यमान हैं। उन्हें एक बने-बनाए शैक्षिक सांचे में ढालने की एक हद तक क्रूर कोशिश जारी है। जो अपनी सोच, तर्कबुध्दि और मौलिकता को परे रखकर आंख-कान बंद करके, होंठ सिलकर इस सांचे में पूरी तरह ढल जाता है, उसे सफल करार दिया जाता है।

हंस राज ने कहा कि सफलता का यह ताज प्रावीण्यता के नाम से पहनाया जाता है। जो बच्चे इस सांचे में नहीं ढल पाते या आधे-अधूरे ढलते हैं और अपनी स्वाभाविक, प्राकृतिक बुध्दि के बल पर अलग राह अपनाना चाहते हैं, उन्हें शिक्षा ग्रहण करने के दौरान असफलता का बोझ कई बार ढोना पड़ता है। बाद में वे जिंदगी में सफल हो गए, तो फिर भले उनके लीक से हटकर चलने की तारीफ की जाए।

बकौल उनके शिक्षक और मां-बाप दोनों ही बच्चों के कोमल मन को पढऩे-समझने में अक्सर असफल साबित रहे हैं, जिसका खामियाजा उपरोक्त घटनाओं के रूप में समाज को भुगतना पड़ता है। अगर हम बच्चों को कोमलता, परस्पर सौहाद्र्र, बड़ों का सम्मान, बुर्जुगों की देखभाल, प्रकृति की रक्षा, नैतिकता आदि का व्यावहारिक ज्ञान नहीं देंगे, तो फिर उनसे बदले में ऐसे व्यवहार की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।
उन्होंने दलील दी कि जब हम उन्हें नेतृत्व करने की प्रेरणा देने की जगह सिर झुकाए हर बात मानने को बाध्य करेंगे, तो भविष्य में अच्छे नेताओं की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। जब हम उन्हें निर्णय लेने की जगह निर्णय मानने पर ही बाध्य करेंगे, तो देश के भावी निर्णायकों को कैसे तैयार कर पाएंगे।

जब हम बच्चों को किताबों की जिल्द में ही बांध कर रखेंगे, तो जिंदगी की व्यावहारिक कठिनाइयों में संभलने की शिक्षा कैसे दे पाएंगे। लिहाजा समय का तकाजा है कि पठन पाठन का तौर तरीका बदलना होगा।
इस अवसर पर प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष स्थानीय विधायक रमेश धवाला ने स्कूल प्रबंधन की प्रशंसा करते हुये कहा कि आज के युग में प्राईवेट स्कूल भी शिक्षा के प्रचार प्रसार में बेहतरीन तरीके से काम कर रहे हैं।

इस मौके पर स्कूल के प्रिंसिपल ओ पी वशिष्ठ ने सालाना रिर्पोट पढ़ी। वहीं स्कूली छात्रों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये। मेधावी छात्रों को सम्मानित भी किया गया। अभिभावकों को प्रिति भेाज भी कराया गया। स्कूल के एमडी रमेश चंद ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुये कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिये स्कूल स्टाफ को बधाई दी और आये हुये मेहमानों का आभार जताया। इस अवसर पर अधिवक्ता रमजान खान,अभिषेक पाधा समाज सेवी रमेश खौला
व अन्य गणमान्य व्यक्ति भी थे।

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