पंजाब

कोरोना का करंट! औसत बिजली बिल आने से भड़के शहर वासी, जब काम धंधा नहीं कहा से भरेंगे बिल

April 09, 2020 09:18 PM

कहां हैं सरकार जी?

जीरकपुर, जेएस कलेर

कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए किए गए लॉक डाउन और कर्फ्यू में ऐसे बहुत से लोगों को एक अलग तरह के संकट में लाकर खड़ा कर दिया है जो आजीविका चलाने के लिए रोजमर्रा की आमदनी पर निर्भर है। कोरोना को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए 21 दिन के लॉकडाउन और राज्य सर्क्सर द्वारा 14 अप्रैल तक शहर में लगाए गए कर्फ्यू के कारण शहर में 18 दिन से लोगों के काम धंदे चौपट पड़े है को और ऊपर से पंजाब के बिजली विभाग पीएसपीसीएल ने लोगों को ई-बिल के जरिए अप्रैल महीने का बिजली बिल पिछले तीन महीनों के औसत के आधार पर भेजने शुरू कर दिए हैं जिससे शहर में सरकार के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है।

शहर के स्कूल-कॉलेज बंद होने से उसके ईर्दगिर्द खाने-पीने की चीजें बेचकर गुज़ारा करने वालों की बिक्री कम हो गई है तो ऑटो, रिक्शा, स्कूल वैन ड्राइवर भी इस मंदी के शिकार हो गए हैं। मध्यम वर्गीय लोगों का कहना है कि उनकी कम्पनियां, फेक्ट्री आदि बन्द हो चुके है, आजीविका के साधन नही बचे तनख्वाह आई नहीं घर में खाने को बमुश्किल राश है तो इस स्थिति में बिजली का बिल कहां से भर दें। लोग कह रहे हैं कि कोरोना महामारी संकट के दौरान उन्हें गरीबी में जाने का खतरा है।

कोरोना से बढ़ते खौफ के बीच विभिन्न राज्य सरकारें लोगों को राहत देने की तमाम कोशिशें कर रही हैं तो वहीं जीरकपुर क्षेत्र में अब पंजाब सरकार के बिजली विभाग पीएसपीसीएल ने लोगों को बिजली के बिल भेजने शुरू कर दिए हैं जिससे लोगों में नाराजगी व्याप्त है। लोगों का कहना है कि एक तरफ तो कर्फ्यू के चलते उनके काम धंदे पिछले 18 दिन से चौपट हैं सरकारी आदेश निकले जा रहे हैं कि इस महीने किरायेदारों से मकान मालिक किराया ना वसूलें, स्कूलों को फीस न दे वहीं दूसरी ओर अब नई खबर आ रही है कि पंजाब के बिजली विभाग ने अप्रैल महीने का बिजली का बिल उपभोक्ता के तीन महीने की बिजली खपत के औसत के आधार पर भेज भी दिया है जिसको भरने की आखरी तारिक 27 अप्रैल है इससे लोग कशमकश की स्थिति में हैं कि काम धंदा चौपट होने से अब तक जो लोग पैसे के अभाव में खाने पीने का जुगाड़ बमुश्किल चला रहे हैं अब उन्हें इस संकटमय समय में बिजली का बिल भी भरना पड़ेगा।

लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस जीवन के संकट के साथ-साथ आर्थिक संकट भी लेकर आया है। बड़े उद्योगपति इस संकट को झेल लेंगे लेकिन छोटे-छोटे कामगार, रोज़ कमाने-खाने वालों के लिए हर दिन मुश्किल है।

शहर के स्कूल-कॉलेज बंद होने से उसके ईर्दगिर्द खाने-पीने की चीजें बेचकर गुज़ारा करने वालों की बिक्री कम हो गई है तो ऑटो, रिक्शा, स्कूल वैन ड्राइवर भी इस मंदी के शिकार हो गए हैं। मध्यम वर्गीय लोगों का कहना है कि उनकी कम्पनियां, फेक्ट्री आदि बन्द हो चुके है, आजीविका के साधन नही बचे तनख्वाह आई नहीं घर में खाने को बमुश्किल राश है तो इस स्थिति में बिजली का बिल कहां से भर दें। लोग कह रहे हैं कि कोरोना महामारी संकट के दौरान उन्हें गरीबी में जाने का खतरा है।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और पंजाब ख़बरें
पंजाब में भी होंगी गुरुकुल शिक्षा केंद्रों की स्थापना शराब के ग़ैर-कानूनी कारोबार और तस्करी जांच के लिए विशेष जांच टीम के गठन का ऐलान माह तक 6 एमसीएच अस्पताल कार्यशील कर दिए जाएंगे: सिद्धू संगरूर के कैप्टन करम सिंह नगर के लोग कर सकेंगे आधुनिक मशीनों से कसरत पकड़ा गया नशा तस्कर निकला कोरोना संक्रमित, पुलिस में मचा हड़कंप कैमिकल फैक्ट्री में बिना मंजूरी खड़ी कर दी तीन मंजिला बिल्डिंग लापरवाही: अस्पताल से रैफर हुई नवजन्मी बच्ची को लिटाया कोरोना सैंपल ले जा रही वैन में कांग्रेसी नेता के पुत्र की मौत पर शोक की लहर, अंतिम संस्कार अधिकारियों/कर्मचारियों की तरक्की जल्द करने के आदेश कोविड संकट दौरान सिविल डिफेंस द्वारा जरूरतमन्दों को दवाएं पहुंचाने का सिलसिला जारी