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पंजाब

जीरकपुर में भारी भरकम बिजली बिलों से लोगों को लगा जोरदार 'करंट'

September 17, 2020 09:01 PM

Sumitha Kaler
  कोरोना माहमारी से लोगों के काम काज ठप्प, सवाल कैसे भरें बिजली के बिल

जीरकपुर,सुमिथा कलेर

एक तरफ जहां लॉकडाउन व कोरोना के चलते सभी लोगों के काम धंधे ठप्प है और लोग घरों में बैठने को मजबूर हैं और सरकार भी लोगों की सुविधा के लिए कदम उठाने के दावे कर रही है, वहीं इसके विपरीत पावरकॉम लोगों को किसी तरह की रियायत देने की बजाय पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना बिजली बिल भेजकर वसूली करने में लगा हुआ है।

पावरकॉम ने पहले लॉकडाउन के चलते मीटरों की रीडिंग न होने का कारण बता कर वर्ष 2019 के हिसाब से बिजली के बिल वसूली करने का निर्णय किया था।

इसकी चर्चा शुरू होने पर इस फैसले को वापस ले लिया था।

अब कुछ समय से उपभोक्ताओं को फिर से उनके मोबाइल नंबरों पर मैसेज भेज कर बिल भेजे जा रहे हैं। इसमें भी अधिकतर लोगों के बिल पिछले वर्ष के बिलों से भी दोगुना भेजे जा रहे हैं।

लोगों के बिलों में (संड्री चजेज) के नाम पर भारी भरकम रकम जोड़ दी गई।

कोरोना वायरस संक्रमण के बाद से स्कूल बंद है घर पर ही अधिक समय व्यतीत किया जा रहा है। परिवार के सदस्य केवल एक ही कमरे में रह कर वर्क फर्म होंम व अन्य दिनचर्या पूरी कर रहे हैं केवल जरूरी काम के लिए ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। लेकिन इस अधिक बिजली का बिल आने से काफी परेशान होना स्वाभाविक है। 20 जुलाई को 13060 रुपए का बिल भर था अब 14710 रुपए का बिजली बिल फिर आ गया है जिसे 30 सितंबर तक भरना है।

पावरकॉम के इस फैसले से लोगों पर भारी बोझ पड़ेगा, जबकि लोग पहले ही आर्थिक मंदी और भुखमरी से जूझ रहे हैं। ऐसे में पिछले वर्ष में इस समय के दौरान खर्च हुई यूनिटों को आधार बनाकर और उससे भी अधिक बिलों की वसूली अवैध है। लोगों ने कहा कि कोरोना के इन गंभीर हालातों में सरकार को लोगों पर बोझ डालने की बजाय उन्हें सहूलियतें प्रदान करते हुए इस बार सभी को बिजली के बिल माफ करके राहत प्रदान करनी चाहिए।

कोरोना संकट काल में बहुत ज्यादा बिजली का उपयोग किए जाने के फलस्वरूप बिल की भुगतान राशि बहुत ज्यादा आने से उपभोक्ताओं में आक्रोश व्याप्त हो गया है। अधिकांश उभोक्ताओं ने सरकार से अपील की है कि वह कोरोना काल में आए बिजली बिल को कम कर दे। कोरोना के कारण 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन किया गया, इसके बाद लॉकडाउन का सिलसिला लगातार चलता रहा।

अप्रैल, मई, जून, जुलाई , अगस्त तथा सिंतबर की अब तक की अवधि में ग्राहकों को बिजली बिल के रूप में बहुत धनराशि अदा करनी पड़ रही है। कोरोना संकट में हाथ का काम चले जाने की वजह से लोगों आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है और इस हालत में भारी भरकम बिजली का बिल देखकर लोगों का पसीना छूट जा रहा है।

बिल में अतिरिक्त शुल्क की राशि इतनी ज्यादा दर्ज की गई है कि ग्राहकों को सोचना पड़ रहा है कि इतना बिल भरा तो महिने का बजट गड़बड़ हो जाएगा। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली ग्राहक भारी बिल के कारण बहुत परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों तथा खेत मजदूरों की संख्या ज्यादा होने के कारण यहां के अधिकांश लोगों की आर्थिक स्थिति सामान्य ही है, ऐसे में ज्यादा बिल जमा करने इन किसानों के लिए संभव नहीं होता, लेकिन पावरकॉम को इस बात से कोई लेना-देना नहीं है, उसने छूट देने की जगह दर बढ़ाकर ग्राहकों की समस्या को और ज्यादा बढ़ा दिया है।

लंबे समय से लोगों के कामकाज बंद होने की वजह से सरकार की तिजोरी पर भले ही असर पड़ा हो लेकिन गरीब जनता के बारे में सोचना सरकार की पहली जिम्मेदारी है, ऐसे में कोरोना काल में आए भारी भरकम की बिजली बिल के साथ-साथ बढ़े हुए बिजली दर को वापस लेने की मांग जोरशोर से की जा रही है।

कोरोना वायरस संक्रमण के बाद से स्कूल बंद है घर पर ही अधिक समय व्यतीत किया जा रहा है। परिवार के सदस्य केवल एक ही कमरे में रह कर वर्क फर्म होंम व अन्य दिनचर्या पूरी कर रहे हैं केवल जरूरी काम के लिए ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। लेकिन इस अधिक बिजली का बिल आने से काफी परेशान होना स्वाभाविक है। 20 जुलाई को 13060 रुपए का बिल भर था अब 14710 रुपए का बिजली बिल फिर आ गया है जिसे 30 सितंबर तक भरना है।

बिल में उपभोग की गई यूनिटिस 1025 हैं जिसकी कुल रकम 6537 रुपए दिखाई गई है। जिसमें अतिरिक्त शुल्क 4308 रुपए, किराया 20 रुपए, एम सी टैक्स 144 रुपए, एरियर्स 131 रुपए व संड्री चार्जिस 5886 रुपए जोड़ दिया गया है। इस हिसाब से अगर बिजली की यूनिट देखी जाए जो 14.31 रुपए औसत आ रही है, बिजली बिलों के नाम पर आम नागरिकों की लूट की जा रही है और भारी-भरकम बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। 

 
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