ENGLISH HINDI Wednesday, October 23, 2019
Follow us on
 
 
 
राष्ट्रीय
प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल

इंडिया बनने से पहले जब यह देश भारत था, तो पेड़ के पत्तों के दोने, पत्तल, मिट्टी के कुल्लड़, केले के पत्ते जैसी कटलरी, कागज़ के लिफाफे औऱ कपड़े के थैले, जैसी प्राकृतिक चीज़ों का इस्तेमाल करता था जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिहाज से सुरक्षित थीं।

उन्मूलन के लिए टीबी दर गिरना काफ़ी नहीं, गिरावट में तेज़ी अनिवार्य: नयी WHO रिपोर्ट बिना मानवाधिकार उल्लंघन के, व्यापार करे उद्योग: वैश्विक संधि की ओर प्रगति प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल चिकित्सकों व नर्सिंग कर्मचारियों का ट्रॉमा केयर में दक्ष होना नितांत आवश्यक कूड़ा मुक्त, कुरीति मुक्त भारत बने अनुभव व नवीनतम तकनीकि ज्ञान का लाभ मरीजों को मिले: प्रो. कांत जीरकपुर, : त्योहारी सीजन में कैश लैस हुए एटीएम जल संरक्षण पर कार्य करने की जरूरत 40 लाख एडवांस लेकर नहीं करवाई प्लाट की रजिस्ट्री, कंपनी के डायरेक्टर सहित 5 पर केस दर्ज हिमालयी क्षेत्रों में बड़े उद्योगों के बजाय लघु उद्योगों को महत्व दिया जाये कोटद्वार में 300 बैड के सुपर स्पेशियल हाॅस्पिटल की स्वीकृति हिमालयी राज्य सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण : त्रिवेन्द्र सिंह रावत डिजिटल मीडिया एसोसिएशन गठित देश भर के 400 नेत्र चिकित्सक पहुंचेंगे एम्स ऋषिकेश गुरद्वारा बंगला साहिब में प्लास्टिक सामाग्री का नहीं होगा उपयोग साल दर साल 40 से 50 हजार बढ़ रहे हैं अंधेपन के रोगी ट्रॉमा से जुड़े मरीजों को मिल सकेगी बेहतर सुविधा मानसा में 900 किलो मिलावटी देसी घी ज़ब्त 30 के करीब कैंसर मरीजों की जांच की स्वामी चिदानन्द सरस्वती ’’वर्ल्ड पीस सम्मान’’ से सम्मानित, पुणे में विज्ञान, धर्म और दर्शन सभा का आयोजन पीर मुछल्ला में दो मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरी, तीन घायल 'स्वच्छता ही सेवा' के तहत योगदान के लिए सामुहिक शपथ ली आपदा प्रबंधन समिति ने की बिहार में बाढ स्थिति की समीक्षा एयर मार्शल हरजीत सिंह एवीएसएम एडीसी ने वायुसेना उप-प्रमुख का पदभार संभाला राजमार्ग निर्माण में प्‍लास्टिक कचरे के इस्‍तेमाल की हुई शुरूआत गांधी जयंती को समर्पित दौड़ से दिया फिट इंडिया व प्लास्टिक मुक्त भारत का संदेश 2 अक्टूबर को किए जाएंगे देशभर में 2,000 से अधिक प्लॉग रन आयोजित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण रक्षा मंत्री ने डेफएक्‍सपो-2020 वेबसाइट लॉन्‍च की वर्ष में एक बार उत्तराखंड व अपने गांव आएं अनिवासी