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एस्ट्रोलॉजी
कैसे और क्यों मनाएं निर्जला एकादशी ?

प्रत्येक वर्ष 24 एकादशियां पड़ती हैं।अधिक मास अर्थात मलमास की अवधि में इनकी संख्या 26 हो जाती हैं। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता हैै। इस साल यह एकादशी 13 जून,गुरुवार को पड़रही है। वास्तव में यह एकादशी बुधवार की सायं 6 बजकर 27 मिनट पर आरंभ हो जाएगी और गुरुवार  की शाम 4 बज कर 50 मिनट तक रहेगी।  यह व्रत एकादशी के सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक 24 घ्ंाटे की अवधि का  माना जाता है।

राम नवमी और राम की आधुनिक युग में सार्थकता

14 अप्रैल को राम नवमी मनाई जाएगी। इस बार राम नवमी पुष्य नक्षत्र के योग में है। पुष्य नक्षत्र सभी 27 नक्षत्रों में सबसे सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र माना गया है। भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ था। 
चैत्र नवरात्र के आठवें दिन अष्टमी व नवमी एक साथ मनाई जाएंगी। अष्टमी के दिन ही सुबह 8.19 बजे नवमी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन सुबह 6.04 बजे तक रहेगी। भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में दोपहर 12 बजे हुआ था। इसलिए रामनवमी 14 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से पहले मनाना शुभ रहेगा।

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