ENGLISH HINDI Sunday, July 12, 2020
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संपादकीय
विकास दुबे एनकाउंटर— जरूरी या मजबूरी

नि:संदेह भारतीय न्याय व्यवस्था में अनेकों झोल हैं जिस का सहारा लेकर अपराधी व्यक्ति अक्सर कानून के हाथ से बच जाता है। किंतु उस न्याय व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पाया पुलिस तंत्र ही है।

क्या सुप्रीम कोर्ट सिर्फ रसूखदारों की सुनती है आम जनता की नहीं?

सुप्रीम कोर्ट पर ये आक्षेप लगते रहे हैं कि वहां सिर्फ रसूखदारों की याचिका पर सुनवाई होती है और आम जनता की याचिकाएं तो पहली सुनवाई में ही खारिज कर दी जाती है। अभी हाल में ही मीडिया विजिल में प्रकाशित एक रिपोर्ट अनुसार, इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में देश के जानी-मानी वक़ील इंदिरा जयसिंह ने एक सनसनीख़ेज़ बयान देते हुए कह......

प्राकृतिक सम्पदा संभालने का सुनहरा अवसर

देश और दुनिया की सरकारों को समझना होगा कि जब प्रकृति ने खुद ही उनका 70-80 फीसदी काम कर दिया है यानी जल, वायु और धरा को स्वच्छ कर दिया है तो शेष रहता 20-30 फ़ीसदी काम भी अगर वे ना कर पाए तो दुनिया की तबाही के गुनाहगार उन्हें ही माना जाएगा।

श्रापित

आदमी इन्सानियत के
नजदीक हो गया

पवित्रता की याद दिलाती है ‘राखी’

‘राखी’ यह त्योहार एक शुभ धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है । अगर इसको आध्यात्मिक दृष्टिकोण से पालन करेंगे तो सभी मनुष्य जातियों को प्रेम और बंधुत्व की भावना में बांधकर सूक्ष्म विकार और बाहर के धोखे से बचाव किया जाता है। स्थुल रूप में रक्षा-बंधन यह ब्राह्मण से अपने यजमान को और बहन से अपने भाई को पवित्र धागा बांधकर एक साधारण रूप से मनाया जाता है, लेकिन इस त्योहार का आध्यात्मिक रहस्य अलग ही है। इसको सही रीति से जानने से मनुष्य के संबंध में जो बाधाएं है वह और समस्याएं दूर हो सकता है।

प्राकृतिक सम्पदा संभालने का सुनहरा अवसर लॉक डाउन में प्रीपेड मोबाइल को वैलिडिटी एक्सटेंशन का लाभ डी टी एच उपभोक्ता को क्यो नहीं श्रापित दुनिया की ठेकेदार पांच महाशक्तियां सवालों के घेरे में पुत्रमोह मे फँसे भारतीय राजनेता एवं राजनीति, गर्त मे भी जाने को तैयार पवित्रता की याद दिलाती है ‘राखी’ करीब 50 गाँव के बीच में एक आधार केंद्र परबत्ता, 2-3 चक्कर से पहले पूरा नहीं होता कोई काम अपने हृदय सम्राट, पुण्यात्मा, समाज सुधारक स्व: सीताराम जी बागला की पुण्यतिथि पर नतमस्तक हुए क्षेत्रवासी क्या चुनावों में हर बार होती है जनता के साथ ठग्गी? सकारात्मक सोच के बिना उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाना सिर्फ एक ढकोसला क्या देश का चौकीदार सचमुच में चोर है? रोड़ रेज की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक नवजोत सिद्धू की गांधीगिरी ने दिया सिखों को तोहफा: गुरु नानक के प्रकाशोत्सव पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी भीड़ भाड़ वाले बाजारों से दूर लगने चाहिए पटाखों के स्टाल दश—हरा: पहले राम बनो— तब मुझे जलाने का दंभ भरो हिंदुस्तान को वर्तमान का प्रजातंत्र नहीं बल्कि सही मायनों में लोकशाही या तानाशाह की जरूरत भारत बंद बुद्धि बंद का परिचय ईवीएम में गड़बड़ी या मात्र विरोध नीति? कानून की आड़ में अपराध आखिर कब तक? जनता की गाढ़ी कमाई पर सत्ताधारियों की खुली ऐश कल्पेश याज्ञनिकः एक और बलि आरसएस को राष्ट्रीयता का पाठ मां तुझे सलाम! मां की ममता ने बनाया दबंग, अब क्रिमिनल्ज को ले रही आडे हाथों 1 मई अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष : अब उन की ख़्वाब-गाहों में कोई आवाज़ मत करना, बहुत थक-हार कर फ़ुटपाथ पर मज़दूर सोए हैं महंगा फ्यूल, बेबस लोग नासमझी व उतावनेपन के चलते सोना पाने से वचिंत है किसान विकृत धार्मिकता और अंध-आस्था से मुक्ति मिले क्या है पारिवारिक ,सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व ?हरियाली तीज 26 और नाग पंचमी 27 जुलाई को बैंक सेवा प्रभार में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी सरासर अनुचित एवं उपभोक्ताओं पर जबरदस्ती का बोझ अहसास रखना