ENGLISH HINDI Monday, October 21, 2019
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संपादकीय
पवित्रता की याद दिलाती है ‘राखी’

‘राखी’ यह त्योहार एक शुभ धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है । अगर इसको आध्यात्मिक दृष्टिकोण से पालन करेंगे तो सभी मनुष्य जातियों को प्रेम और बंधुत्व की भावना में बांधकर सूक्ष्म विकार और बाहर के धोखे से बचाव किया जाता है। स्थुल रूप में रक्षा-बंधन यह ब्राह्मण से अपने यजमान को और बहन से अपने भाई को पवित्र धागा बांधकर एक साधारण रूप से मनाया जाता है, लेकिन इस त्योहार का आध्यात्मिक रहस्य अलग ही है। इसको सही रीति से जानने से मनुष्य के संबंध में जो बाधाएं है वह और समस्याएं दूर हो सकता है।

अपने हृदय सम्राट, पुण्यात्मा, समाज सुधारक स्व: सीताराम जी बागला की पुण्यतिथि पर नतमस्तक हुए क्षेत्रवासी

श्री सीताराम जी बागला संयुक्त पंजाब के ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने भूदान आंदोलन से जुड़ कर अपनी सारी भूमि दान कर दी। बड़ी बात ये है कि स्वयं श्री विनोबा भावे जी ने उनके गांव पंहुच कर जमीनें वितरित की।

सकारात्मक सोच के बिना उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाना सिर्फ एक ढकोसला

सूचित होने का अधिकार एवं इसे दिलाने वाली सेवा सूचनाओं की सप्लाइ, आमजन को नहीं मिल रही है और ये 1986 से आजतक किताबों मे दफन हुई पड़ी है और इसके लिए काफी हद तक उपभोक्ता अधिकार से संबन्धित अधिकारीगण, तथाकथित अधिवक्तागन एवं कई कंज़्यूमर एसोसिएसन के नकारात्मक सोच ज़िम्मेवार है।

रोड़ रेज की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक

बीच चौराहों पर रोड़रोज की घटनाएं ना केवल चिंतनीय हैं बल्कि आज के युवाओं की मानसिकता व गिरती संवेदनशीलता को भी दर्शाती हैं। जरा सी बात पर एक दूसरे पर हमला कर देना आम होता जा रहा है। आखिर यह सब हो क्या रहा है? क्या किसी की जान की कोई कीमत ही नहीं है? सवाल यह है कि आखिर आज का युवा छोटी सी बात पर ही इतना भड़क क्यो जाता है? गुस्से में उसे आगे−पीछे का भी ध्यान नहीं रहता और सामने वाले की जान लेने तक आमादा हो जाना सवाल उठाता है कि आज की युवा पीढ़ी आखिर जा कहां रही है?

नवजोत सिद्धू की गांधीगिरी ने दिया सिखों को तोहफा: गुरु नानक के प्रकाशोत्सव पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, करतारपुर कॉरिडोर को मंजूरी

गुरु नानक देवजी के 550वें प्रकाशोत्सव वर्ष पर सिखों की लंबे वक्त से चली आर रही मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। केंद्र ने गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नाक से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमा तक करतारपुर कॉरिडोर बनाने का फैसला लिया है। बता दें कि यह प्रोजेक्ट सारी आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और इसका खर्च भी केंद्र उठाएगा। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को इस बात की जानकारी दी। 

दश—हरा: पहले राम बनो— तब मुझे जलाने का दंभ भरो

सदियों से जलाते आ रहे हो

और कब तब जलाओगे

आज तक नहीं मिटा तो

कब मिटाओ गे।

मेरे पुतले जला कर खुश होने वालो

मैं तुम्हारें जहन में बैठा हूं

वहां से कब हटाओ गे?

भारत बंद बुद्धि बंद का परिचय

रिकॉर्डतोड़ जीत हासिल करने के बाद अब सरकार महंगाई को लेकर खासे लपेटे में घिर रही है। पिछले दिनों से रूपए की गिरती कीमत तथा पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों को लेकर विपक्षी दल व आम जनता ने एक बार फिर भारत बंद की आवाज को बुलंद किया।

ईवीएम में गड़बड़ी या मात्र विरोध नीति?

2019 लोकसभा चुनावों में कुछ ही माह शेष है। राजनितिक दलों ने चुनावों को लेकर अपनी—अपनी गोटियां फिट करनी शुरू कर दी है। कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों को आभास हो रहा है कि चुनावों में ईवीएम मशीन में सबसे बड़ी गड़बड़ी की संभावना हो सकती है।

कानून की आड़ में अपराध आखिर कब तक?

कानून के रखवालों में से कुछ गद्दारों द्वारा जुर्म करने वालों को शह देना। पद, प्रतिष्ठा पाने तथा तिजोरियां भरने के लिए आड़े आने वाले रोड़े को हटाने के लिए जुर्म करना आम बात हो गई है।

जनता की गाढ़ी कमाई पर सत्ताधारियों की खुली ऐश कल्पेश याज्ञनिकः एक और बलि आरसएस को राष्ट्रीयता का पाठ मां तुझे सलाम! मां की ममता ने बनाया दबंग, अब क्रिमिनल्ज को ले रही आडे हाथों 1 मई अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष : अब उन की ख़्वाब-गाहों में कोई आवाज़ मत करना, बहुत थक-हार कर फ़ुटपाथ पर मज़दूर सोए हैं महंगा फ्यूल, बेबस लोग नासमझी व उतावनेपन के चलते सोना पाने से वचिंत है किसान विकृत धार्मिकता और अंध-आस्था से मुक्ति मिले क्या है पारिवारिक ,सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व ?हरियाली तीज 26 और नाग पंचमी 27 जुलाई को बैंक सेवा प्रभार में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी सरासर अनुचित एवं उपभोक्ताओं पर जबरदस्ती का बोझ अहसास रखना यह तो वित्तीय आपातकाल है? दीवाली छूती है जीवन के हर पहलू को कीचड़ में कमल बने रहने की दरकार अधिकारियों की फौज — करने गई थी मौज सत्ता में दागी मंत्रियों का बोलबाला देश में बेखौफ क्यों हैं तस्कर? दर्द बढ़ता गया— ज्यों ज्यों दवा की जीएसटी बिल— फायदा किसको अर्थ न पकड़ा व्यर्थ में उलझे अन्नदाता कर्जदार क्यों? चुनाव 2017: पंजाब की हाईटेक जनता खड़ी कर सकती है त्रिशंकु विधानसभा हम कितने जागरूक हैं? अर्थ तेरे कितने अर्थ क्या हरियाणा सरकार बादल से सबक लेगी पंतजलि द्वारा कैंसर का भय दिखाना क्या नैतिक है? क्या कानून सम्मत है? भारत का संविधान रो रहा है! क्या हमें संविधान का विलाप सुनाई नहीं देता? लालू के लाल क्या कर पाएंगे बिहार में कमाल ? बस्तर में वकीलों, पत्रकारों पर लगातार हमले का विरोध कच्चे सूत से बँधी पक्की डोर है रक्षाबन्धन