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एस्ट्रोलॉजी

कोरोना से राहत 21 अप्रैल से , पूरा छुटकारा 1 जुलाई के बाद

March 16, 2020 10:50 PM

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़, 9815619620

  सांसारिक ज्योतिष अर्थात मंडेन एस्ट््रोलॉजी में कोरोना जैसी महामारी का उल्लेख प्रायः होता रहा है परंतु ज्योतिष को कई बार गंभीरता से नहीं लिया गया। जब भी किसी शताब्दी के अंत में शून्य , जीरोे आया है, उसी कालखंड में कोई न कोई महामारी आई है जिसने पूरे विश्व में जनता को अपना ग्रास बनाया है।

यों तो ईसा पूर्व की शताब्दियों में भी इसका उल्लेख मिलता है परंतु लिखित रिकार्ड 1520 से मिल जाता है

जब अफ्रीकी गुलामों के कारण यूरोप में चेचक और प्लेग के कारण काफी लोग मरे थे । इसके बाद 1620 में भी इसी तरह का जानलेवा संक्रमण फैेला और मानव जीवन को नुक्सान पहुंचा। यहां तक कि 1620 में केवल इटली में ही 17 लाख लोग प्लेग से मरे और उत्तरी अफ्रीका में 50000 लोग मारे गए। बुबानिक प्लेग ने भी फ्रांस में लगभग 100,000 लोगों की जान ली । फिर 1820 में थाईलैंड, इंडोनेशिया और फिलीपींस में हैजा फैल गया। अगली शती अर्थात 1920 में ,स्पेनिश फलू जिसे इन्फलूएंजा कहा गया, फेैल गया। अब 2020 में चीन के वुहान से आई ,कोरोना नामक महामारी का दोगुना प्रभाव हो गया जिससे विश्व के कितने ही देश चपेट में आ गए हैं। यह देखने में आया है कि जब भी किसी साल में 0 शून्य आया है, उस साल कोई न कोई प्लेग, हैजा, कुष्ठ रोग, तपेदिक, चेचक, फलू, एड्स, हैपीटाइटिस जैसा कोई न कोई वायरस विश्व में छाया है।

क्या कहा नारद संहिता के ज्योतिष ने ?

नारद संहिता में एक श्लोक में इस युग में एक बड़े महारोग के बारे हजारों साल पहले लिखा गया है कि सूर्य ग्रहण के पश्चात् पूर्वी देश से एक महारोग आएगा । 26 दिसंबर ,2019 को सूर्य ग्रहण लगा और इसी के लगते ही ,चीन के वुहान से इस महारोग की यात्रा आरंभ हो गई। संवत 2076 वैसे भी शनि प्रधान था जबकि 25 मार्च,2020, को आरंभ होने वाले नवसंवत 2077, में राजा बुध ओर मंत्री चंद्र है।

क्या कहा नारद संहिता के ज्योतिष ने ?

नारद संहिता में एक श्लोक में इस युग में एक बड़े महारोग के बारे हजारों साल पहले लिखा गया है कि सूर्य ग्रहण के पश्चात् पूर्वी देश से एक महारोग आएगा । 26 दिसंबर ,2019 को सूर्य ग्रहण लगा और इसी के लगते ही ,चीन के वुहान से इस महारोग की यात्रा आरंभ हो गई। संवत 2076 वैसे भी शनि प्रधान था जबकि 25 मार्च,2020, को आरंभ होने वाले नवसंवत 2077, में राजा बुध ओर मंत्री चंद्र है।

नास्त्रेदमस और एक किताब द आइज ऑफ डार्कनेस

465 साल पहले फ्रांसीसी भविष्यवेत्ता नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणियों की पुस्तक सेंचुरीज में लगभग 950 भविष्यवाणी किए जाने उल्लेख मिलता है। कुछ लोग दाव कर रहे हैं कि उन्होंने अपनी भविष्वाणी की पुस्तक के छंद 2:53 में कोराना वायरस का जिक्र किया है।उनके मुताबिक नास्त्रेदमस ने इस छंद या चौपाई में कहा है कि समुद्र से सटे एक शहर में बड़ी महामारी फैलेगी, जिसके लाखों लोग शिकार होंगे। कहा जा रहा है कि जिस शहर का जिक्र नास्त्रेदमस ने किया है, लगता है वह चीन का वुहान शहर ही है। यहां समुद्री जीवों का कारोबार होता है। चीन के इसी शहर से कोरोना वायरस फैला है। सिर्फ इसी शहर में कोराना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या लाखों में है।

द आइज ऑफ डार्कनेस और 4 का अंक

चीन के वुहान क्षेत्र से दुनियाभर में फैल रहे कोरोना वायरस के संबंध में कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस चीन का घातक हथियार है जिसे उसने टेस्ट किया है। लोग डीन आर कुंट्ज की 40 साल पहले लिखी गई एक किताब द आइज ऑफ डार्कनेस (the eyes of darkness) हवाला देकर कह रहे हैं कि यह चीन की साजिश है।इस किताब में एक संक्रमण का जिक्र है जिसे वुहान 400 का ही नाम दिया गया है। वुहान 400 कोड रखे जाने का तर्क किताब में यह दिया गया है कि इसे वुहान प्रांत के बाहरी क्षेत्र में बनाया गया और कोड में 400 इसलिए जोड़ा गया क्योंकि यह इस लैब में तैयार 400 वां ऐसा हथियार था। खैर, यह कहना अभी संदेह से भरा है कि क्या यह सच में चीन का रासायनिक हथियार है या कि सचमुच ही एक वायरस।

इसमें लिखा है कि कॅरोना वायरस की तरह का एक वायरस वुहान 400 को चीन ने अपने शहर वुहान की एक लैब में सबसे छुपा कर निर्मित किया था ताकि समय आने पर वह इस्का इस्तेमाल अपनी गरीब आबादी कम करने के लिए कर सके ताकि उसे सुपर पावर बनने में आसानी हो। इसका उपयोग वह किसी बायोलॉजिकल हथियार के रूप में 2020 के आसपास विश्वव्यापी स्तर पर कर सकता है। और ये आज 2020 में चीन ने अमल में ले लिया है, जिसे आज दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। 

साल 2020 का योग 4 आता है जो राहु का प्रतीक है। इस वर्ष प्रौद्योगिकी में विकास के साथ साथ संक्रमण से कैसे बचा जा सकता था ?

राहु ग्रह, त्वचा रोगों, खुजली, , जहर फैलाना, , क्रानिक बीमारियां, महामारी, इत्यादि का कारक होता है.

भारतीय ज्योतिष में वायरस का कारक राहु और शनि को माना जाता है। इन्हीं के प्रकोप के कारण कोरोना महामारी फैली है। शनि के स्वराशि मकर में होने के कारण इस महामारी का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है। हालांकि, सूर्य जब मेष राशि में प्रवेश करेंगे, तब कोरोना का अंत भी संभव हो पाएगा। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य 14 अप्रैल 2020 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे। वर्तमान में राहु उच्च राशि मिथुन में गोचर कर रहे हैं । इसे कालपुरुष की कुंडली में मुंह, नाक, कान, गले का कारक माना जाता है। राहु लग्नस्थ और साथ ही शुक्र षष्टेश होकर शनि के साथ तृतीयस्थ हैं। अर्थात तृतीय भाव से श्वांस नली, दमा, खांसी, फेफड़े, श्वांस संबंधी रोग हो रहे हैं।चूंकि वायरस हवा के माध्यम से फैल रहा है और आक्सीजन का कारण चंद्र हैं।

आर्द्रा नक्षत्र

जब से राहु ने आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश किया है तभी से कोरोना वायरस का इस दुनिया मे संक्रमण फैला है। राहु का गोचर मिथुन राशि व आर्द्रा नक्षत्र में चल रहा है।मिथुन राशि वायु तत्व राशि होती है। और आर्द्रा का अर्थ भी नमी होता है। राहु वायरस है। और इसका विस्तार वायु व नमी में ही बहुत तेजी से होता है। इसलिए राहु को मिथुन राशि व आर्द्रा नक्षत्र में सबसे ज्यादा बलशाली भी माना जाता है।आर्द्रा नक्षत्र के मध्य में इसका ज्यादा प्रभाव रहेगा और नक्षत्र के लास्ट में इसका प्रभाव भी कम हो जाएगा। इसका असर 14 अप्रैल से कम होना शुरू हो जाएगा।

गुरु ग्रह

यहां गुरु ग्रह की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते। पांच नवंबर 2019 को जेैसे ही गुरु और केतु धनु राशि में आए, पूरे विश्वमें एक विषैले वायरस का जन्म हो गया। 26 दिसंबर के ग्रहण ने इस में और आग लगादी।

जब देव गुरु बृहस्पति 30 मार्च को अपनी नीच राशि मकर में गोचर करेंगे, तब इसका प्रभाव बढ़ सकता है।

यहां गुरु ग्रह की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते। पांच नवंबर 2019 को जेैसे ही गुरु और केतु धनु राशि में आए, पूरे विश्व में एक विषैले वायरस का जन्म हो गया। 26 दिसंबर के ग्रहण ने इस में और आग लगा दी।

जब देव गुरु बृहस्पति 30 मार्च को अपनी नीच राशि मकर में गोचर करेंगेए तब इसका प्रभाव बढ़ सकता है।

फिर गुरु 30 जून को पुनः धनु में आ जाएंगे। कोरोना का रोना पहली जुलाई को बिल्कुल समाप्त हो जाएगा।

अंकशास्त्र - 4 अंक की भूमिका

अंकशास्त्र के अनुसार भी 2022 का अंक राहु का 4 है। कोरोना का पहला मरीज 4 दिसंबर ,2019 अर्थात 4 अंक वाली डेट को मिला। अब 4 महीने समाप्त होने यानी चौथे महीने के बाद ही इस महामारी से कुछ राहत मिलेगी, पूरी तो पहली जुलाई के बाद ही छुटकारा होगा। परंतु 2022 राहु का साल होने से , किसी न किसी ऐसी और आपदा से इंकार नहीं किया जा सकता।                                                                    196,सैक्टर 20ए, चंडीगढ़, मो -9815619620

 

 
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