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नवरात्र में 4 ग्रहों की विशेष चौकड़ी कारोना का संहार करेगी

March 24, 2020 10:28 PM

30 मार्च से 30 जून के मध्य , गुरु के नीच राशि में जाने से कारोना की विदाई संभव 

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषविद्,9815619620

22 मार्च को मंगल मकर राशि में आ चुके हैं। शनि पहले ही मकर में हेैं और 30 मार्च को गुरु भी इसी राशि में जुड़ रहे हैं । नवरात्र के दौेरान ही 28 मार्च को शुक्र भी मेष से बृष राशि में आ गए हैं जो 1 अगस्त को बृष में जाएंगे ।सूर्य भी 21 अपै्रल से अपनी उच्च राशि मेष में आकर आग बरसाएगा।

यही चौकड़ी कारोना का संहार करेगी

मंगल एक बलवान ग्रह है। जिन लोगों की कुंडली में कारक स्थिति में उनके लिए यह फायदेमंद है, वहीं जिनकी राशि में मंगल नकारात्मक स्थान पर बैठें हैं उनके लिए थोड़ा परेशान करने वाला हो सकता है। मंगल ग्रह 22 मार्च से राशि बदलने के बाद 4 मई तक मकर राशि में रहेंगे, इसके बाद वो राशि बदलेंगे। 4 मई के बाद मंगल ग्रह मकर राशि से मेष राशि में जाएंगे। फिलहाल 22 मार्च को रहे राशि परिवर्तन से सिर्फ 3 राशि के लोगों के लिए अच्छी स्थिति बनती दिख रही है। इन राशियों में सिंह, वृश्चिक और मीन राशि शामिल हैं। 

  गुरु (बृहस्पति) 30 मार्च 2020 को अपनी स्वराशि धनु से शनि ग्रह की राशि मकर में प्रवेश करेंगे। लेकिन पुनः 30 जून को वक्री होकर धनु राशि में आ जाएंगे और फिर 20 नवंबर को गुरु वापस मकर राशि में संचरण करेंगे। गुरु को एक शुभ ग्रह माना जाता है। यह ज्ञान, धर्म-अध्यात्म और नैतिक कार्यों का कारक है।

राशियों में इसे धनु और मीन राशियों का स्वामित्व प्राप्त है। गुरु ग्रह करीब 12 साल में राशि चक्र पूरा करता है यानी 12 वर्षों में करीब 1-1 वर्ष के सभी राशियों में रुकता है। मकर राशि में गुरु नीच का रहता है। इस राशि में गुरु प्रसन्न नहीं रहता। 14 मई से इसी राशि में गुरु वक्री होगा। 29 जून से वक्री रहकर ही धनु राशि में फिर से जाएगा। धनु में वक्री रहेगा। 13 सितंबर से धनु राशि में मार्गी हो जाएगा और 20 नवंबर को मकर में प्रवेश कर नीच का हो जाएगा। 

चैत्र नवरात्रि 24 मार्च दोपहर 2:57 बजे से शुरु हैं। ग्रहों के आधार पर किसी भी ग्रह के स्थान परिवर्तन करने से सभी राशियों पर उसका अच्छा और बुरा प्रभाव देखने को मिलता है। 

मेष- ये तीनों ग्रह दशम रहेंगे। राशि स्वामी मंगल उच्च का रहेगा। अत: कार्य की अधिकता करने वाला होगा। विवादों में विजय दिलाने वाला होगा। पद प्राप्ति होगी। परिश्रम एवं पराक्रम में वृद्धि, पिता से लाभ, मनोबल वृद्धि, क्रोध में वृद्धि

वृषभ- तीनों ग्रह नवम रहेंगे। अत्यंत सचेत रहें। विचारों में द्वंद रहेगा। आय अच्छी रहेगी, पर संतुष्टि नही हो पाएंगी। मूल्यवान सामान गुम हो सकता है। धन का लेन-देन नगदी में करने से बचें। भाग्य एवं धन वृद्धि ,आय में वृद्धि ,राज्य से लाभ,पराक्रम एवं सम्मान में वृद्धि

मिथुन- अत्यंत सावधानी से रहने का समय होगा। स्वयं पर नियंत्रण रखें और जोखिम के कार्यों से दूरी बनाएंगे तो बेहतर रहेगा। शत्रु हावी होने का प्रयास करेंगे और उनके मौके भी प्राप्त होंगे। क्रोध एवं वाणी में तीव्रता, पेट की समस्या,आय में वृद्धि, धन वृद्धि में अवरोध, पराक्रम में वृद्धि

कर्क- राशि के ठीक सामने सप्तम स्थान पर यह युति होगी। इस युति से लाभ-हानि बराबर रहेगी। किसी प्रकार के बड़े नुकसान की संभावना नहीं है। कुछ योजनाएं बिगड़ सकती हैं एवं कुछ नई सफल भी होंगी। दाम्पत्य में तनाव, वाणी में तीव्रता, क्रोध में वृद्धि, सरकारी लाभ, राज्य लाभ, सम्मान में वृद्धि

सिंह- यह युति विरोधियों का शमन करने वाली भी होगी और बढ़ाने वाली भी होगी। विचलित भी रखेगी। क्रोध को बढ़ा सकती है। संयम से लाभ होगा। रोग ऋण शत्रुओं की पराजय, मन अशान्त पढ़ाई में अवरोध, खर्च में वृद्धि, यात्रा का योग

कन्या- नौकरी में बदलाव के साथ आर्थिक लाभ भी प्राप्त होगा। जमीन से लाभ एवं संतान से सुख प्राप्त होगा। लाभ में अवरोध, सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि, अध्ययन अध्यापन में अवरोध, अचानक खर्च में वृद्धि

तुला- संभलकर रहने का समय है। योजनाएं बिगड़ सकती हैं। विरोधी नुकसान पंहुचाने का प्रयास करेंगे। कीमती सामान की सुरक्षा करें एवं वाहनादि का प्रयोग में सावधानी रखें। पराक्रम वृद्धि, भाग्य वृद्धि, पिता का सहयोग, दाम्पत्य को लेकर चिंता

वृश्चिक- भाइयों से प्रेम बढ़ेगा और सहयोग मिलेगा। विरोधी भी परास्त होंगे। व्यापार में आगे बढऩे के मौके प्राप्त होंगे एवं पराक्रम श्रेष्ठ रहेगा। पराक्रम में वृद्धि, राज्य लाभ, भाग्य वृद्धि, धन लाभ की स्थिति, भाई से सहयोग

धनु- स्थाई संपत्ति के लिए यह अत्यंत लाभकारी होगी, साथ ही समस्याओं का स्थाई समाधान प्राप्त होगा। नई जगहों पर जाने का मौका प्राप्त होगा। वाणी में तीव्रता, पेट की समस्या, भाग्य में वृद्धि, अध्ययन-अध्यापन में वृद्धि, संतान से लाभ

मकर- यह अत्यंत सफलता दिलाने वाला होगा। शनि के कारण सम्मान एवं धन की प्राप्ति होगी एवं मंगल के कारण शत्रु परास्त करने में सफलता मिलेगी। गुरु नीच का होने के कारण कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। गृह एवं वाहन सुख में वृद्धि, दाम्पत्य में सामान्य तनाव, रोग ऋण शत्रु विजय, क्रोध में वृद्धि, आय में वृद्धि

कुंभ- यह युति व्यय की अधिकता को बढ़ाने वाली होगी। कार्य स्थल पर मन नहीं रहेगा। विचलन ज्यादा होगी। समस्याएं एक के बाद एक आती जाएंगी। खर्च में वृद्धि, अध्ययन में अवरोध, शत्रु विजय, पराक्रम में वृद्धि, दाम्पत्य में अवरोध

मीन- पदोन्नती, समस्याओं का निदान और विरोधी परास्त होंगे। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। धन लाभ में वृद्धि और संपत्ति में वृद्धिकारक होगा। राज्य से लाभ, कार्य एवं भाग्य मे वृद्धि, वाणी तीव्र, धन लाभ, रोग ऋण शत्रुओं पर विजय, अध्ययन में अवरोध 

बृहस्पति के लिए क्या करें

· जिन राशि के जातकों के लिए गुरु नेष्टकारी हो वे गुरु की शांति के लिए बृहस्पति स्तोत्र, बृहस्पति कवच का पाठ करें।

· गुरु मंत्र ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः या ऊं गुं गुरवे नमः के 19 हजार जाप स्वयं करें या पंडित से करवाएं।

· गुरुवार का व्रत करें, पीले धान्य का भोजन करें एवं पीले वस्त्र गुरुवार को धारण करें।

· श्रीहरि का नियमित पूजन करें। पीपल, केले के वृक्ष का पूजन करें।

· गुरु यंत्र को घर में स्थापित करके पूजन करें। गुरु के बीज मंत्रों से हवन करें।

· तर्जनी अंगुली में पुखराज रत्न या उपरत्न सुनहला- लाजवर्त मणि धारण करें।

· पीले वस्त्र, पीले धान जैसे चने की दाल, पीतल, कांसा पात्र, हल्दी, सुवर्ण, धार्मिक ग्रंथ रामायण, गीता आदि दान करें।

 
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