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पहली अप्रैल अष्टमी या 2 अप्रैल नवमी पर वीडियो कान्फ्रैंसिंग से करें कन्या पूजन

March 31, 2020 04:30 PM


- मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषविद्, चंडीगढ
काफी लोगों के मन में कफ्र्यू, लॉक डाउन, मौसम तथा कोरोना खौफ के कारण नवरात्र के दौरान असमंजस की स्थिति है और अब श्री दुर्गाष्टमी तथा कन्या पूजन को लेकर भी है जिसका स्पष्टीकरण तथा समाधान हम यहां दे रहे हैं। कैसे करें कन्या पूजन ऐसे हालात में?

पहली अप्रैल को पूरा दिन अष्टमी रहेगी।
कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
अमृत काल- 9 बजे से 10 बजकर 50 मिनट तक
अशुभ राहु काल- दोपहर 12:27 से 2 बजे तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 2: 32 से 3:22 तक

नवमी 2 अप्रैल
देश, काल तथा पात्र अर्थात परिस्थिति अनुसार जितना भी क्रियात्मक रुप से संभव हो, आप अपने घर परिवार में ही पूजा पाठ कर सकते हैं। माता का कोई भी चित्र या मूर्ति रख कर पूजा अर्चना कर सकते हैं।
घर की छोटी कन्याओं का पूजन कर सकते हैं। सांकेतिक रुप में उन्हें कुछ धन राशि उपहार स्वरुप दे सकते हैं। वर्तमान में मोबाइल के वीडियो कालिंग, कान्फेंसिंग आदि से भी 9 कन्याओं को जोड़ सकते हें। उनके उपहार संकल्प करके अपने पास रख लें और हालात ठीक होने पर उन्हें भिजवा सकते हैं। या उनके या उनके अभिभावकों के एकाउंट में ऑन लाइन या पे टी एम, पे यू आदि जैसी सुविधाओं से उपहार राशि दे सकते हैं। आजकल घरों में काम करने वाली सहायकों के पास मोबाइलभी हैं और बैंक खाते भी। अन्यथा कर्फ्यू में ढील के समय भी यह दान किया जा सकता है।

कन्या पूजन
इस दिन यूं तो पारंपरिक तौर पर दुर्गाष्टमी को कन्या पूजन करके व्रतादि का उद्यापन करा जाता है। अष्टमी पर 9 वर्ष की कन्या 9 कन्याओं तथा एक बालक को अपने निवास पर आमंत्रित करते हैं। लाल पुष्पों की माला पहनाएं उनका पूजन करके उन्हें हलुवा, पूरी, काले चने का प्रसाद देते हैं। चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेते हैं। उन्हें लाल चुनरी या लाल परिधान तभा उचित दक्षिणा एवं उपयोगी उपहार सहित विदा करते हैं। कन्या रक्षा का भी संकल्प लिया जाता है।

अष्टम स्वरुप महागौरी
देवी का अष्टम स्वरुप महागौरी का है। इसे श्री दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है। भगवती का सुंदर, सौम्य, मोहक स्वरुप महागौरी में विद्यमान है। वे सिंह की पीठ पर सवार हैं। मस्तक पर चंद्र का मुकट सुशोभित है। चार भुजाओं में शंख, चक्र,धनुष और बाण हैं।
सबसे महत्वपूर्ण है कि माता का यह स्वरुप सौन्दर्य से संबंधित है। इनकी आराधना से सौन्दर्य प्रदान होता है।जो युवक युवतियां सौन्दर्य के क्षेत्र में जाने के इच्छुक हैं, वे आज महागौरी की आराधना करें।फिल्म, ग्लैमर व रंगमंच की दुनिया की इच्छा रखने वाले या सौन्दर्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने जा रहे ,युवा वर्ग आज व्रत के साथ साथ निम्न मंत्र का जाप भी अवश्य करें।

जिनके वैवाहिक संबंध सुंदर न होने के कारण नहीं हो रहे या टूट रहे हों वे आज अवश्य उपासना करें।
चौकी पर श्वेत रेशमी वस्त्र बिछा कर माता की प्रतिमा या चित्र रखें । घी का दीपक जला कर चित्र पर नैवेद्य अर्पित करें। दूध निर्मित प्रसाद चढ़ाएं।
मंत्र- ओम् ऐं हृीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै! ओम् महागौरी देव्यै नमः!!
की एक या 11 माला करें ।अपनी मनोकामना अभिव्यक्त करें। आज अष्टमी पर मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी ।

दुर्गा अष्टमी की रात अचूक उपाय-
1- दुर्गा अष्टमी की रात में अपने घर के मुख्य दरवाजे पर रात 12 बजे गाय के घी का एक दीपक जलाने से सारे दुर्भाग्य दूर हो जाते हैं।
2- संभव हो तो रात में किसी प्राचीन दुर्गा मंदिर में जाकर देवी मां के चरणों में 8 कमल के पुष्प चढ़ाने माता रानी शीघ्र प्रसन्न हो जाती है।
3- अष्टमी की रात को अपने घर में या दुर्गा मंदिर में दुर्गाष्टमी का पाठ करने से घर परिवार में सदैव सुख-शांति बनी रहती है।
4- दुर्गा अष्टमी को सूर्यास्त के ठीक बाद किसी वेदपाठी ब्राह्मण की कुंवारी कन्या को उसकी पसंद के कपडे दान करने से किस्मत के बंद दरवाजे खुल जाते हैं।
5- अष्टमी का रात को महागौरी के स्वरूप को दूध से भरी कटोरी में विराजित कर चांदी का सिक्का चढ़ाएं, और दूसरे दिन से उस सिक्के को हमेशा अपनी जेब में रखने से धन आवक बढ़ने लगेगी।
6- रात एक पान में गुलाब के फूल की 7 पंखुरियां रखकर मां दुर्गा को अर्पित करने से मां लक्ष्मी हमेशा आपके घर में निवास करने लगेगी।
7- सूर्यास्त के बाद ग्यारह सुहागिनों महिलाओं को लाल चूड़ियां एवं सिंदूर भेंट करने से धन लाभ होने के योग बनना शुरू हो जाते हैं।
8- अष्टमी की रात में देवी मंदिर में चुपके से माता रानी के सोलह श्रृंगार की सामग्री भेंट करने से जीवन में आने वाली समस्त बाधाएं दूर हो जाती है।
9- रात में लाल कम्बल के आसन पर बैठकर इस बीज मंत्रों का जप एक हजार बार करें।

मंत्र-
।। ऊँ ऐं हृीं क्लीं महागौर्ये नमः ।।

 
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