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26 अप्रैल, रविवार की अक्षय तृतीया इस बार अत्याधिक शुभ

April 22, 2020 08:47 AM

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य, चंडीगढ़- 098156-19620

निसंदेह लॉकडाउन व कफर््यु के कारण धर्मस्थल और बाजार बंद हैं , ऐसे में कोई पर्व, त्योहार मनाना या कोई धार्मिक अनुष्ठान , संपूर्ण विधिविधान से संपूर्ण करना क्रियात्मक रुप से संभव नहीं है, फिर भी अपनी संस्कृति, धर्म , परंपरा एवं उसके महत्व को जानना परम आवश्यक है। अतः इसे पढ़े व जाने जरुर। इस वर्ष न सही अगली बार इसे प्रतिपादित कर सकते हैं। सीमित साधनों से भी घर में पूजा अर्चना तो की ही जा सकती है।

ज्योतिषीय दृष्टि से चार अबूझ व स्वयंसिद्ध मुहूर्त हैं जिसमें किया गया कोई भी कार्य चिर स्थाई एवं शुभ माना जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया, दशहरा तथा दीवाली। अक्षय का अर्थ है जिसका क्षय न हो। यह तिथि भगवान परशुराम जी का जन्मदिन होने के कारण परशुराम तिथि और चिरंजीवी तिथि भी कहलाती है।

त्रेता युगा का आरंभ भी इसी तिथि से माना गया हैं, अतः इसे युगादितिथि भी कहा गया है। इस दिन किए गए कार्यों का अक्षय फल मिलता है। परशुराम जी का अवतरण भी इसी दिन हुआ था। ब्रहमा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इसी दिन माना जाता है। यह एक सर्वसिद्ध मुहूर्त माना जाता है जिस दिन पंचाग देखे बगैर कोई भी मांगलिक शुभ कार्य किया जा सकता है। नए व्यवसाय या नई संस्था की नींव रखी जा सकती है।

त्रेता युगा का आरंभ भी इसी तिथि से माना गया हैं, अतः इसे युगादितिथि भी कहा गया है। इस दिन किए गए कार्यों का अक्षय फल मिलता है। परशुराम जी का अवतरण भी इसी दिन हुआ था। ब्रहमा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इसी दिन माना जाता है। यह एक सर्वसिद्ध मुहूर्त माना जाता है जिस दिन पंचाग देखे बगैर कोई भी मांगलिक शुभ कार्य किया जा सकता है। नए व्यवसाय या नई संस्था की नींव रखी जा सकती है।

क्यों है इस बार अक्षय तृतीया अधिक प्रभावशाली ? ज्योतिषीय गणना
अक्षय तृतीया 25अप्रैल की प्रातः 11 बजकर 52 मिनट पर आरंभ हो जाएगी और 26 तारीख दिन के 1 बज कर 23 मिनट तक रहेगी। यह संयोग , बृष राशि व, रोहिणी नक्षत्र में बन रहा है। यही नहीं इस बार 6 बड़े योग बन रहे हैं। सूर्याेदय के समय, शंख, नीचभंग,पर्वत योग, अमला, रुचक और शश योग बनेंगे जो इस तृतीया को और अधिक शुभ बनाते हैं।
क्या क्या करें ?
यह अबूझ मुहूर्त सगाई एवं विवाह के लिए सर्वोत्तम है। इसके अतिरिक्त दीर्घकालीन निवेश जैसे प्लाट, फलैट, स्थाई प्रापर्टी, बीमा पालिसी,शेयर, म्युचल फंड, आभूषण, सोना ,चांदी , वाहन क्रय, नौकरी के लिए आवेदन, नया व्यवसाय आरंभ , मकान की नींव आदि , भवन क्रय के लिए एग्रीमेंट, विदेश यात्रा, नया व्यापार आरंभ आदि के लिए चिरंजीवी दिन है।
अक्षय तृतीया के दिन कैसे करें सरल उपाय ?

अक्षय तृतीया के दिन घर के सभी स्वर्ण आभूषणों को कच्चे दूध और गंगाजल से धोने के बाद उन्हें एक लाल कपड़े पर रखकर केसर, कुमकुम से उनका पूजन करें। पूजन करते समय उन पर लाल फूल भी चढ़ाएं। ऐसा करने के बाद महालक्ष्मी के मंत्र 'ऊं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मयै नम:" मंत्र की एक माला कमलगट्टे की माला से जाप करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनकी आरती करें। शाम को इन आभूषणों को तिजोरी में रख दें। 

1. जिन व्यक्तियों के घर में बरकत न हो या रोजगार की व्यवस्था न हो पा रही हो वे निम्नलिखित मंत्र की 51 माला जपें ।

मंत्र : - 'ॐ नमो भाग्य लक्ष्म्यै च विद्महे अष्ट लक्ष्‍म्यै च धीमहि तन्नौ लक्ष्मी प्रचोदयात्।।' 

2. जिन व्यक्तियों को बड़े या कठिन मंत्र पढ़ने में कठिनाई लगे, वे लक्ष्मी एकाक्षरी मंत्र 'श्रीं' का जप करें। इसका उच्चारण इस प्रकार होगा- श्रीम्

3. दुकान या फैक्टरी न चल रही हो या घर पर कलह हो चांदी की डिब्बी में शुद्ध सिन्दूर रखकर तथा 11 गोमती चक्र रखकर उपरोक्त मंत्र कोई सा भी प्रयोग कर वह डिब्बी गल्ले-तिजोरी या पूजा के स्थान पर रखें, निश्चित लाभ होगा। 

4. लक्ष्मी प्राप्ति के लिए प्रयोग- पीत वस्त्रासन, पंचमुखी घृत का दीपक, स्फटिक की माला से उत्तराभिमुख हो रात्रि के समय 'ॐ कमलवासिन्यै श्री श्रियै ह्रीं नम:' की 108 माला जपें। सामने प्रति‍ष्ठित श्री यंत्र या महालक्ष्मी यंत्र रखें। रक्तपुष्प, कमल गट्टा आदि दूध से बने पदार्थ का नैवेद्य लगाकर तथा संभव हो तो 1 माला अंत में हवन करे। पश्चात यंत्र को उठाकर गल्ले या तिजोरी में रख दें। 

5. एकाक्षी नारियल व दक्षिणावर्ती शंख भी इसी प्रकार सिद्ध कर रखे जा सकते हैं। 

6. रजत या ताम्र पात्र में कमल गट्टे भरकर तथा उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित कर केशर से चावल रंगकर प्रति यंत्र 1-2 दाने चढ़ाते जाएं तथा वे सभी चावल इकट्ठे कर बाद में कन्याओं को खीर बनाकर खिलाएं।

अक्षय तृतीया पर कैसे करें पूजा ?
दीवाली की तरह इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा का विशेष महत्व है। आर्थिक सुख समृद्धि एवं धन की आवश्यकता आज मजदूर से लेकर मंत्री तक सब को है। यदि आप इस दिन लक्ष्मी जी का पूजन करना चाहें तो इस अवधि में बहुत ही साधारण विधि से कर सकते हैं। महिलाएं परिवार की सुख समृद्धि व धनागमन हेतु व्रत रख सकती हैं।इस दिन लक्ष्मी जी की आराधना का सर्वाधिक महत्व है । प्रातः स्नान करके पुरुष सफेद तथा महिलाएं लाल वस्त्र पहन कर ,लक्ष्मी जी के चित्र या मूर्ति के आगे बैठ कर इन मंत्रों में से किसी एक या सभी की एक एक माला कर सकते हैं। कमल गटटे या स्फटिक की ही माला का प्रयोग करें।
1.ओम् श्रीं श्रियै नमः !!
2. हृीं ऐश्वर्य श्रीं धन धान्याधिपत्यै ऐं पूर्णत्व लक्ष्मी सिद्धयै नमः!!
3. ओम् नमो ह्ीं श्रीं क्रीं श्रीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी मम गृहे धनं चिन्ता दूरं करोति स्वाहा !!
पूजन के बाद खीर का प्रसाद अवश्य बांटना चाहिये।

इस अवसर पर पूजा विधि का संक्षिप्त व साधारण विधि
सामग्रीः थाली ,हकीक- 9,गोमती चक्र-9 ,लग्न मंडप सुपारी-9,लघु नारियल-9 ,गुलाब या कमल के फूल-3,चावल- सवा किलो ,लाल या सफेद कपड़ा- सवा मीटर, मोतीशंख, ,भोज पत्र, या ,चांदी पर खुदा हुआ अक्षय यंत्र,रौली ,मौली,स्फटिक की माला,दक्षिणा,वस्त्र,
आर्थिक उन्नति तथा अन्य समस्याओं के लिये अक्षय तृतीया पर यह उपाय करें।
विधि: प्रातः काल स्नान आदि करके पूजा स्थान पर कंबल या दरी बिछा का पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठें ।थाली में रोली से अष्ट दल बना के मोतीशंख मध्य में रखें। यह मंत्र 11 या 108 बार पढ़ते हुए
ओम श्रीं ही्ं दारिद्रये विनाशिनये धन धान्य समृद्धि देही देही नमः ।।
सवा किलो साबुत चावल शंख पर चढ़ाते जाएं। कुछ चावल शंख में भरें, लाल कपड़े में बांधें।शेष चावल की खीर बना के बांट दें।शंख को तिजोरी या पूजा स्थान पर रखें।
विशेष समस्या निवारण हेतु मंत्र पढ़ सकते हैं
1.ओम हृ्ीं क्रीं श्रीं श्रिये नमः
2.मम लक्ष्मी मामृनीतीर्ण कुरु कुरु सम्पदः वृद्धिकरोति नमः
3.ओम् श्रीं श्रियेै नमः
4.हृीं ऐश्वर्य श्रीं धन धान्याधिपत्यै
5.ऐं पूर्णत्व लक्ष्मी सिद्धयै नमः !!
अक्षय यंत्र, चांदी के पत्र या साफ कागज या भोज पत्र पर ऐसे बना लें

13
6 -10 -7- 4
9 3-8
1
.विधिः सवा मीटर लाल या सफेद कपड़ा लें।फोल्ड करके बिछा लें। 108 बार मंत्र पढ़ते हुए अक्षत डालते जाएं।उपरोक्त सामग्री एक एक करके इस कपड़े पर रखें। .तांबे/ चांदी पर खुदा यह यन्त्र भी रखें।मन्त्र समाप्ति पर यन्त्र निकाल के बाहर रख लें । .कपड़े में सारी सामग्री बांध के 3 गांठें लगाएं। तीन बार सिर से घुमाएं।इसे दक्षिणा एवं वस्त्र सहित किसी मंदिर में दे दें। अथवा केवल गठड़ी प्रवाहित कर दें और वस्त्र व दक्षिणा किसी जरुरतमंद को दे दें .यन्त्र को प्रवेश द्वार पर लगाएं या घर के पूजा स्थान पर रखें।
प्रार्थना करंे: विवाह शीघ्र हो, आर्थिक समस्या दूर हो। असाध्य रोग दूर हो।ऋण मुक्ति जल्दी हो।सुख समृद्धि हो।गृह क्लेश समाप्त हो।  (मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य, 196 ,सैक्टर 20ए,,चंडीगढ़)

 
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