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एस्ट्रोलॉजी

कोरोना तुम कब जाओगे ? भारत तीसरी स्टेज में नहीं जाएगा, कोरोना की विदाई जुलाई से, परंतु अंतिम यात्रा नवंबर में

May 08, 2020 09:01 AM

फरवरी 2021 में 6 ग्रह एक साथ मकर राशि में होंगे जैसे 1962 में मकर राशि में 8 ग्रह आए थे। रहना होगा सावघान। 2022 से 2030 के मध्य भारत का विश्व गुरु बनना तय।

-मदन गुप्ता सपाटू, ज्योर्तिविद्

 चंडीगढ़आज यदि किसी देश के प्रधानमंत्री, प्रेजीडेंट या वैज्ञानिक से पूछा जाए कि कोरोना कब खत्म होगा, तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं है। न ही कोई नागरिक किसी सरकार से यह प्रशन ही पूछ रहा है। परंतु ज्योतिषियों पर यह प्रशन अवश्य दागे जा रहे हें कि आपने 2019 में क्यों नहीं बताया। अभी भी क्यों नहीं बता रहे। और जब वह बताता है तो प्रशन पूछने वालों की आलोचनाएं पहले से ही तैयार रहती हैं- ज्योतिष विज्ञान है ही नहीं , आप केैेसे कह सकते है ? यह सब बकवास फ्रॉड है।

वैज्ञानिक बता नहीं सकते कि कब क्या होगा और जब भारत के इस वेदांग की सहायता से बताया जाता है तो पूरे ज्योतिष शास्त्र को ही लाला बने बाबा तक नकार देते हैं और इसकी खिल्ली उड़ाते हुए तालियां बजवा कर ही ही करने लगते हैं- शनि क्या इतनी दूर बैठा किसी की चटनी बना देगा? जिनकी व्यक्तिगत भविष्यवाणियां उनके गलत जन्म विवरण या अनुभवहीन व्यक्तियों के कारण गलत हो जाती हैं , वे ज्योतिष के प्रति एक खास विरोधी धारणा बना लेते हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे कोई होम्योपैथी से ठीक न हुआ हो तो , उसके हिसाब से सारी पद्वति ही बकवास मानी जाए!

ज्योतिष शास्त्र की आजतक कितनी ही भविष्यवाणियां सही हुई हैं तो क्या किसी ज्योतिषी को जीते जी या मरणोपरांत, पदमश्री या पदमभूषण दिया गया , जब कि हमारे यहां तबलची या लंगर लगाने वाले को पदमश्री दे दी जाती है। ज्योतिषी के पास न कोई साधन है, न संसाधन है, न कोई लैब है, न कोई सरकारी सहायता या अनुदान फिर भी उससे भविष्यवाणी में बहुत बड़ी अपेक्षाएं रखी जाती है और बदले में आलोचना करने वाले वे लोग होते हैं, जिन्हें न तो अपने देश का ही ठीक से पता होता है और न ही ज्योतिष का क ख ग । हां ! जब कोई अनुभवहीन या नौसिखिया गलत भविष्यवाणी कर देता है तो पूरे ज्योतिष शास्त्र को ही गलत ठहरा दिया जाता है। तब आलोचक यह भूल जाते हैं कि डाक्टर भी कैंसर के मरीज को दावे से ठीक करने की बात नहीं कह सकता। इसरो के वैज्ञानिक भी पहले इस बात का अनुमान नहीं लगा सकते कि चंद्रयान -2 , चांद की सतह पर उतर ही जाएगा। फिर ज्योतिष शास्त्र की एक्युरेसी पर सवाल भी और बवाल भी।

अमरीका की 54.5 प्रतिशत जनता ज्योतिष में विश्वास रखती है , चीन , इंग्लेैंड जैसे देशो का भी इसमें अटूट विश्वास है । हमारे देश में पाराशर, जैमिनी, वराहमिहिर जैसे विद्वान हुए हैं जिन्होंने भारतीय ज्योतिष की नींव रखी जब कि ग्रह नक्षत्रों का विवरण रामायण काल, महाभारत काल से आज तक मिलता आ रहा है। क्या योग दिवस की तरह किसी ने ज्योतिष दिवस मनाने की बात उठाई? क्या कभी महर्षि पाराशर की जयंती मनाई गई? क्या वर्तमान में स्व रमन, कृष्णामूर्ति, भोजराज द्विवेदी, राधा कृष्ण श्रीमाली, लाल किताब के प्रणेता पंडित रुपचंद जैसे मनीषियों का किसी सरकार ने सम्मान किया? ज्योतिष के वर्तमान विद्धानों - पंडित के दूबे पद्मेश, डा अजय भांबी, अनिल वत्स, डा रावत , जी डी वशिष्ठ, श्रीमाली , अरुण बंसल तथा ऐसे ही विद्वानों को समाज का मार्गदर्शन करने या ज्योतिष के विषय में अनुसंधान करने के लिए ,किसी सरकार ने सम्मानित किया ? विरोधियों ने तो इसे विश्वविद्यालयों में ही नहीं जाने दिया। 

अमरीका की 54.5 प्रतिशत जनता ज्योतिष में विश्वास रखती है , चीन , इंग्लेैंड जैसे देशो का भी इसमें अटूट विश्वास है । हमारे देश में पाराशर, जैमिनी, वराहमिहिर जैसे विद्वान हुए हैं जिन्होंने भारतीय ज्योतिष की नींव रखी जब कि ग्रह नक्षत्रों का विवरण रामायण काल, महाभारत काल से आज तक मिलता आ रहा है। क्या योग दिवस की तरह किसी ने ज्योतिष दिवस मनाने की बात उठाई? क्या कभी महर्षि पाराशर की जयंती मनाई गई? क्या वर्तमान में स्व रमन, कृष्णामूर्ति, भोजराज द्विवेदी, राधा कृष्ण श्रीमाली, लाल किताब के प्रणेता पंडित रुपचंद जैसे मनीषियों का किसी सरकार ने सम्मान किया? ज्योतिष के वर्तमान विद्धानों - पंडित के दूबे पद्मेश, डा अजय भांबी, अनिल वत्स, डा रावत , जी डी वशिष्ठ, श्रीमाली , अरुण बंसल तथा ऐसे ही विद्वानों को समाज का मार्गदर्शन करने या ज्योतिष के विषय में अनुसंधान करने के लिए ,किसी सरकार ने सम्मानित किया ? विरोधियों ने तो इसे विश्वविद्यालयों में ही नहीं जाने दिया।
यह बहस उन आलोचकों के लिए है जो अज्ञानता व मूर्खतावश ज्योतिष शास्त्र को सिरे से ही कुतर्क देकर नकारते हैं क्योंकि उनके पास आलोचना केवल आलोचना के लिए होती हे जिसमें तर्क या ज्ञान अंशमात्र नहीं होता ।

विज्ञान भी एक्सपेरीमेंट, बार बार किसी चीज के घटित होने पर आब्जर्वेशन करता है फिर कोई नियम बनाता है। कोरोना वायरस की कोई पहले हिस्ट्र्ी नहीं है, इसी लिए इसकी दवाई या वैक्सीन बनाने और फिर मानव पर उसके प्रयोग में भी समय लग रहा है। कोई भी देश यह नहीं बता सकता कि कब वैक्सीन रामबाण बन जाएगी और प्रयोग करते ही कोरोना का वायरस शरीर से गायब हो जाएगा।

परंतु ज्योतिष यह सब बताने में सक्षम है। इस विषय में पत्र पत्रिकाओं, टी वी , सोशल मीडिया में इसके जन्म से लेकर अभी तक सभी ज्योतिषीय गणनाओं का विवेचन हो चुका है।

मेरी 2019 के दिसंबर में 2020 के बारे राहू और 4 नंबर को लेकर बड़ी भविष्यवाणी प्रकाशित हो चुकी है, जिसमें वायु जनित संक्रमण, बालीवुड से 5 और राजनैतिक क्षेत्र से 5 हस्तियों के दुख सहने की बात भी कही गई थी । इसके अलावा फेसबुक तथा मीडिया में 16 मार्च,2020 को एक लेख के शीर्षक में ही मैंनेें साफ साफ लिखा था कि कोरोनो की विदाई पहली जुलाई के बाद ही आरंभ होगी।

सितंबर 1998 में मेरे द्वारा चंडीगढ़ में आयोजित एक ज्योतिषीय सेमीनार का हवाला देकर 2020 के बारे भी लिखा था यह भी बताया था कि 2020 से एक परिवर्तन का युग आरंभ होगा। 2020 से 2030 के दशक में भारत विश्व का मार्गदर्शन करेगा और यह स्थिति 2022 से और चमकने लगेगी।

आइये आने वाले समय की बात करें । मई जून में संक्रमितों तथा मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। परंतु ीाारत तीसरी स्टेज पर नहीं जाएगा।

कोरोना के संदर्भ में राहु, गुरु ,शनि तथा प्लूटो जैसे ग्रहों तथा 4 अंक की भूमिका की काफी चर्चा रही।
हमारे हिसाब से 30 जून तक राहत मिलने के आसार कम हैं। गुरु 1 जुलाई से पुनः धनु में आएंगे और कोरोना का धीरे धीरे प्रभाव कम होना शुरु होगा। यही 13 सितंबर से मार्गी होंगे तो प्रभाव और कम होगा।

*16 अगस्त से मंगल, मेष में आने से अर्थव्यवस्था सुधरनी आरंभ होगी। मजदूरो का काम पर फिर आने की संभावनाएं जागृत होंगी। 23 सितंबर से मुख्य विलेन राहु के बृष में राशि परिवर्तन से और सुधार होगा तथा किसी अच्छी वैक्सीन का आविष्कार हो जाएगा। संभवतः भारत इसमें अग्रणीय रह सकता है।
*20 नवंबर को गुरु के मकर में प्रवेश करने से कोरोना की भारत से अंतिम यात्रा आरंभ होने की संभावना है।
इस बीच जल से संबंधित छोटे मोटे नए संक्रमण आ सकते हैं जिनका पता 10 फरवरी 2021 के आस पास चलेगा जब 6 ग्रह मकर राशि में एक साथ जुंडली बना लेंगे जेैसे 1962 में मकर राशि में ही 8 ग्रह इक्टठे् हो गए थे और देश को चीन से ही जानमाल का नुक्सान हुआ था। फरवरी 2021 के आसपास हमें सतर्क रहना होगा। आने वाले समय में पूरा विश्व भारत की ओर ही मार्गदर्शन के लिए देखेगा। 2020 से युग परिवर्तन आरंभ हो चुका है जिसमें लाइफ स्टाइल बदलेगा, भारतीय संस्कृति और परंपराओं का नवीनीकरण होगा। 2022 से 2030 के मध्य भारत का विश्व गुरु बनना तय।
- मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, 458 सैक्टर 10, पंचकूला। मो-9815619620,मेल-spatu196@gmail.com

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