ENGLISH HINDI Saturday, May 15, 2021
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
अघोषित बिजली कट्स से परेशान जीरकपुर के लोग पेंपा सेरिंग बने तिब्बत की निर्वासित सरकार के नये प्रधानमंत्रीगुरुद्वारा पातशाही दसवीं सेक्टर 8 में रोछे डायग्नोस्टिक (एनालाइजर) मशीन की शुरुआत:कोविड 19 की आपदा को अवसर में बदला पंजाब यूनिवर्सिटी ने, दाखला टेस्टों के नाम पर आवेदकों से लूटे करोड़ों रुपएजरूरतमंदों को प्लाज्मा दिलवा मदद कर रही चंडीगढ़ की "ब्लड सेवक" संस्थामहिला से शारीरिक संबंध बनाता बठिंडा का एएसआई रंगेहाथ काबू, बरखास्त कोटक महिन्द्रा बैंक के मुलाजिमों की आंखों में मिर्चे डालकर 45 लाख रूपए की लूटदो महीने से नहीं आ रहा बिजली बिल, भरा जा रहा औसत बिल, परेशान और खफा लोग
एस्ट्रोलॉजी

चातुर्मास इस बार 4 की बजाए, 5 मास का रहेगा

June 25, 2020 01:47 PM

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्

 इस वर्ष चातुर्मास जो पहली जुलाई से 25 नवंबर तक है, चार मास की बजाए, पांच मास का रहेगा। इस चौमासे का विवरण रामायण काल में भी मिलता है जब भगवान राम, कहते हैं कि अब चौमासा भी समाप्त होने जा रहा है और सीता जी का कुछ पता नहीं चल रहा। इस बार आश्विन मास, मलमास अर्थात अधिक मास होने से एक की बजाय दो बार आएगा और सभी उत्सव, पर्व एवं त्योहार आदि गत वर्षों की तुलना में लेट आएंगे। अक्सर श्राद्ध समाप्त होते ही अगले दिन नवरात्र, आरंभ हो जाते थे परंतु 2020 में, लीप वर्ष होने के कारण, ऐसा नहीं हो पाएगा। ऐसा यह पहली बार नहीं हो रहा, अक्सर कई बार हो चुका है।
अब श्राद्ध पहली सितंबर से आरंभ होकर 17 सितंबर तक चलेंगे, अर्थात अन्य सालों के विपरीत नवरात्र 17 अक्तूबर से आरंभ होंगे, दशहरा 25 अक्तूबर को पड़ेगा और दीवाली 14 नवंबर को होगी।
चातुर्मास पौराणिक काल में अधिक महत्वपूर्ण था जब ऋतु परिवर्तन के 4 महीने, अधिक वर्षा, बाढ़, भूस्खलन, पर्वतों पर हिमपात, कीड़े मकौड़ों, बीमारियों आदि से भरपूर होते थे और जनसाधारण को कहीं बाहर न निकलने की सलाह दी जाती थी और समय बिताने के लिए, पूजा पाठ का मार्ग बताया जाता था। जैन समाज में भी इस काल की अवधि में संत एक स्थान पर बैठ कर ही तप करते आ रहे हैं।
वर्तमान समय में ऐसा क्रियात्मक रुप से संभव नहीं है और बचाव के अनेक साधन मौजूद हैं फिर भी कोरोना काल में ईश्वर से इससे मुकि्त की प्रार्थना करने में हर्ज क्या है? समय के साथ साथ औचित्य, परिवेश, पाठ -पूजा का तरीका बदल जाता है, अतः 5 मास के इस काल में आप अपनी आवश्यकता एवं समयानुसार, जप तप कर सकते हैं।

 
कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और एस्ट्रोलॉजी ख़बरें
14 मई ,शुक्रवार की अक्षय तृतीया इस बार अत्याधिक शुभ क्या कोरोना काल में क्वारेंटीन, सूतक- पातक जैसी पौराणिक मान्यताओं का आधुनिक रुप है? नव संवत 2078, नवरात्र, वैसाखी,13अप्रैल को, कुम्भ महापर्व हरिद्वार में 14 अप्रैल से कैसा रहेगा 6 अप्रैल को गुरु का राशि परिवर्तन आप और देश के लिए होली आई रे ....परंतु कोरोना के कारण न मनाएं होलाष्टक रहेगा 21मार्च से 28 मार्च तक, जानिए क्यों नहीं करते इसमें शुभ कार्य ? विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त है वसंत पंचमी 7 सितारों का मिलन - बदलेगा धरती का चलन गलत रत्न धारण करने से आप हो सकते है तबाह एवं बर्बाद: ज्योतिषचार्य विष्णु शर्मा ऋण कौन लें , कब लें , कब लौटाएं , उतारने के क्या करें उपाय ?