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श्रावण मास में कैसे करें भगवान शिव को प्रसन्न ? कुछ क्षेत्रों में 16 जुलाई से होगा सावन आरंभ

July 08, 2020 10:02 AM

- मदन गुप्ता सपाटू,ज्योर्तिविद

 इस कोरोना काल में बेहतर होगा यदि हम अपने घर के पूजा स्थान पर ही पत्थर , संगमरमर, चांदी या पारद के छोटे शिवलिंग की स्थापना करके शिवाराधना करें और संक्रमण को ध्यान में रखते हुए मंदिरों में भीड़ न लगाएं। भगवान कण कण में विराजमान हैं।

इस बार सावन माह में पांच सोमवार हैं। तीन व्रत कृष्ण पक्ष और दो शुक्ल पक्ष में हैं। मैदानी क्षेत्रों में छह जुलाई जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में 16 जुलाई से सावन शुरू है,

इस बार सावन महीने की शुरुवात ही सोमवार के दिन से हुआ है. सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है. आज शिव भक्त पहली सावन सोमवार का व्रत रख कर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे. वहीं, सावन की समाप्ति भी सोमवार के दिन ही हो रही है. सावन महीने की शुरुआत और समाप्ति दोनों ही सोमवार के दिन हो रहा है.सावन भगवान शिव की उपासना का महीना माना जाता है.

पौराणिक कथा के अनुसार मां पार्वती ने भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए सावन माह में कठोर तप किया था.ऐसी मान्यता है जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करता है उसकी सभी मनोकामना भोले शंकर जरूर पूरी करते हैं. इस बार सावन की शुरूआत जहां सावन से हुई है वहीं माह का अंत भी सावन सोमवार (3 अगस्त 2020) से ही होगा.

भगवान शिवजी को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से जल चढ़ाना चाहिए. शिवजी को केतकी का सफेद फूल अप्रिय होता है इसलिए पूजा में इस फूल का इस्तेमाल ना करें. केतकी के फूल को झूठ बोलने की वजह से शाप मिला है. शिव पूजन करते समय कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण को प्रिय है. नारियल का प्रयोग कभी भी शिव जी का पूजन करते समय इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. दरअसल नारियल का संबंध देवी लक्ष्मी से होता है और देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी है. शिवलिंग की पूजा में कभी भी कुमकुम का प्रयोग नहीं करना चाहिए। कुमकुम सुहाग की निशानी है. 

श्रावण माह में चंद्र देव की पूजा का भी विधान है। सावन का संबंध श्रावण नक्षत्र से है और इस नक्षत्र का मालिक चंद्रमा है. चंद्रमा शिव के शीश में शोभायमान है. श्रावण माह में सूर्य कर्क राशि में होता है जिसके कारण सूर्य पर चंद्रमा की ठंडक शीतलता प्रदान करती है। इस कारण वर्षा भी होती है.

सावन माह में रोजाना सुबह-शाम शिवजी की आराधना करनी चाहिए. इस पावन माह में शिव का जलाभिषेक करें। वहीं अगर विधिवत पूजा नहीं कर पाते हैं तो दीपक अवश्य जलाएं. इस दौरान ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप 108 बार करें. यह मंत्र रुद्राक्ष की माला के साथ करें.

श्राावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना गया है।

भोले नाथ अपने नाम के अनुरुप अत्यंत भोले हैं और सहज ही प्रसन्न हो जाते हैं।शिवोपासना से जीवन की अनेकानेक कठिनाइयां दूर होती हैं। इस मास में महामृत्युंज्य मंत्र, रुद्राभिषेक,शिव पंचाक्षर स्तोत्र आदि के पाठ से लाभ मिलता है। शिवलिंग पर मात्र बिल्व पत्र चढाने से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त, भांग, धतूरा, जल, कच्चा दूध, दही, बूरा, शहद, दही, गंगा जल, सफेद वस्त्र, आक , कमल गटट्ा, पान , सुपारी, पंचगव्य , पंचमेवा आदि भी चढ़ाए जा सकते हैं। भोलेनाथ ऐसे देवता हैं जो मात्र एक लोटा जल चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाते हैंण् उनकी पूजा में किसी भी तरह के स्वादिष्ट पकवान और प्रसाद को चढ़ाने की जरूरत नहीं होती है।

ओम् नमः शिवाय का जाप या महामृत्यंुज्य का पाठ कर सकते हैं।

शिवलिंग पर नारियल का पानी , चंपा, केतकी, नागकेशर, केवड़ा या मालती के फूल न चढ़ाएं। अन्य कोई भी पुष्प जैसे हार सिंगार,सफेद आक आदि के अर्पित कर सकते हैं। बेल पत्र का चिकना भाग ही शिवलिंग पर रखना चाहिए तथा यह भी ध्यान रखें कि बेल पत्र खंडित न हों।

भगवान शिवजी को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से जल चढ़ाना चाहिए. शिवजी को केतकी का सफेद फूल अप्रिय होता है इसलिए पूजा में इस फूल का इस्तेमाल ना करें. केतकी के फूल को झूठ बोलने की वजह से शाप मिला है. शिव पूजन करते समय कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण को प्रिय है. नारियल का प्रयोग कभी भी शिव जी का पूजन करते समय इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. दरअसल नारियल का संबंध देवी लक्ष्मी से होता है और देवी लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी है. शिवलिंग की पूजा में कभी भी कुमकुम का प्रयोग नहीं करना चाहिए। कुमकुम सुहाग की निशानी है. 

मंगला गौरी का व्रत 

इस मास के प्रत्येक मंगलवार को श्री मंगला गौरी का व्रत , विधिवत पूजन करने से शीघ्र विवाह या वैवाहिक जीवन की समस्याओं से मुक्ति मिलती है और सौभाग्यादि में वृद्धि होती है। 

राशि और शिव पूजन

देवताओं में भगवान शिव सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देव हैं. ऐसे में इस पावन मास में विधि-विधान से शिव का पूजन करके उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है. भगवान शिव के आशीर्वाद से साधक के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और उसे मन वांक्षित फल की प्राप्ति होती है. श्रावण मास में शिव की पूजा करने से शत्रुओं का नाश और रोग-शोक दूर होता है.

आइए जानते हैं कि इस श्रावण मास में किस राशि के जातक को किस विधि से शिव पूजन करना चाहिए-

मेष —गुड़ और दही से अभिषेक करें लाल गुलाल शिवजी को चढ़ाएं।

वृष — भगवान शिव की कृपा पाने के लिए वृष राशि के जातकों को विशेष रूप से दही, शक्कर, चावल, सफेद चंदन आदि से पूजा करना चाहिए. पूजा में सफेद रंग के पुष्प मदार चढ़ाना चाहिए.

मिथुन — मिथुन राशि के जातकों को भगवान शिव का गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिए. बिल्व पत्र के छ: पत्ते चढ़ाने से लाभ होगा।

कर्क —भगवान शिव का घी से अभिषेक करें. शिवलिंग पर कच्चा दूध, सफेद आंकड़े और दही से पूजन करना चाहिए। मावे से बनी मिठाई का भोग लगाने से शिव प्रसन्न होते हैं।

सिंह —शिव साधक अपने देवता की कृपा पाने के लिए गुड़ के जल से अभिषेक करें. शिव मंत्र का जाप रोज करें।

कन्या —भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भांग और पान अर्पण करें. मूंग की दाल से बनी मिठाई का भोग लगाएं। बिल्व पत्र और फल चढ़ाएं।

तुला —शिव कृपा प्राप्ति हेतु दही, शहद और इत्र से भगवान शिव का अभिषेक करें. सावन माह में अष्टमी और एकादशाी तिथि के दिन शिवलिंग पर सफेद वस्त्र चढ़ाएं। माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं।

वृश्चिक — शिव का आशीर्वाद पाने के लिए पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए. पूरे माह शिव मंदिर के बाहर गरीबों की सेवा की जाए तो बुरे प्रभाव से राहत मिल सकती है।

धनु — भगवान शंकर का शीघ्र प्रसन्न करने के लिए धनु राशि के जातक हल्दीयुक्त दूध से शिव का अभिषेक करें. बेसन से बनी मिठाई का भोग लगाएं। पीला वस्त्र अर्पित करें।

मकर — मकर राशि के जातकों को शिव कृपा पाने के लिए जल से अभिषेक करना चाहिए. शिवलिंग पर नीले फूल चढ़ाएं। दीपक जलाकर शिवजी का पूजन करें।

कुंभ — तिल के तेल से भगवान शिव का अभिषेक करना कुंभ राशि के लिए विशेष फल प्रदान करने वाला रहेगा. शिवजी और शनि की प्रसन्नता के लिए किसी जरूरतमंद विद्यार्थी की आर्थिक मदद करनी चाहिए।

मीन — मीन रशि के जातकों को इस श्रावण मास भगवान शिव केसरयुक्त दूध से जलाभिषेक करना चाहिए.

- मदन गुप्ता सपाटू,ज्योर्तिविद,98156.19620 , 458 सैक्टर 10, पंचकुला.134109

 
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