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2 सितंबर, 1860 के बाद 18सितंबर,2020 से अधिक मास आरंभ, ऐसा संयोग अब 2039 में फिर बनेगा

September 06, 2020 08:22 AM

मदन गुप्ता सपाटू,ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़,9815619620 

  ठीक 160 साल बाद अर्थात , 2 सितंबर,1860 के बाद अब 18 सितंबर,2020को लीपवर्ष में अधिक मास पड़़ रहा है और साथ ही जान लें कि ऐसा संयोग अब 2039 में फिर बनेगा। 

आश्विन महीने में अधिमास 18 सितंबर से शुरू होकर 16 अक्टूबर तक चलेगा।

नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू , 26 अक्टूबर को दशहरा और 14 नवंबर को दीपावली होगी।

इसके बाद 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाएगा।

मलमास में क्या कर सकते हैं क्या नहीं ?

विवाह की बातचीत , विवाह की मौखिक सहमति, पहले से आरंभ किए गए कार्यों का समापन, प्रापर्टी की रजिस्ट्र्ी, वाहन की बुकिंग, ब्याना, सरकारी कार्य, पढ़ाई, शिक्षा का एडमिशन , नार्मल रोटीन , दैनिक व्यवस्था के कार्य आदि।

कोई भी नई वस्तुएँ जैसे की घर, कार, इत्यादि ना खरीदे |घर के निर्माण का कार्य को शुरू ना करें और ना ही उस से संबंधित कोई भी समान खरीदें |कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, सगाई मुंडन व नए कार्य प्रारंभ नहीं करने चाहिए।

धर्मग्रंथों के अनुसार, खर (मल) मास को भगवान पुरुषोत्तम ने अपना नाम दिया है। इसलिए इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। खरमास, यानि खराब महीना | वो महीना जब हर प्रकार के शुभ काम बंद हो जाते हैं. कोई नया काम शुरू नहीं किया जाता,

मलमास का पंचांग

मलमास का संबंध ग्रहों की चाल से है. पंचांग के अनुसार मलमास या अधिक मास का आधार सूर्य और चंद्रमा की चाल से है. सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है. इन दोनों वर्षों के बीच 11 दिनों का अंतर होता है. यही अंतर तीन साल में एक महीने के बराबर हो जाता है. इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास आता है..बढ़ने वाले इस महीने को ही अधिक मास या मलमास कहा जाता है.

मलिन मास 

मलमास को मलिन मास भी कहा जाता है। मलमास में कोई शुभ कार्य तो नहीं किए जा सकते, लेकिन धार्मिक और दान-पुण्य के काम जरूर करने चाहिए। मलमास में पीले फल, मिठाई, अनाज व वस्त्रों का दान करना शुभकर माना गया है, क्योंकि भगवान विष्णु का प्रिय रंग पीला है और मलमास को भगवान पुरुषोत्तम का मास माना जाता है। इसलिए पीले चीजों के दान का विशेष महत्व होता है।

तुलसी पूजन जरूर करें और रोज संध्या के समय तुलसी के सामने दीप दान कर “ॐ वासुदेवाय नम:” मंत्र का जाप करें। इस मंत्र जाप के साथ तुलसी की 11 बार परिक्रमा करें। इससे आपके घर में सौभाग्य का वास होगा।

मलमास भर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इससे मनुष्य के विचार और कर्म शुद्ध होते हैं और घर मे सुख-शांति का वास होता है।

मलमास भगवान पुरुषोत्तम का महीना होता है, इसलिए इस मास में धर्म-कर्म खूब करना चाहिए। मलमास में सूर्योदय के पहले उठकर स्नान-ध्यान करने का विधान है। साथ ही श्रीमद्भागवत का पाठ करने से अमोघ पुण्यलाभ मिलता है।मलमास में उन लोगों को जरूर दान-पुण्य करना चाहिए जिनकी कुंडली में सूर्य शुभ फल नहीं दे रहा हो।

मलमास में जितना हो सके धर्म से जुड़े कार्य करें और गरीबों की मदद करें। ऐसा करने वाले को भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

मलमास में पूजा पाठ, व्रत, उपासना, दान और साधना को सर्वोत्तम माना गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मलमास में भगवान का स्मरण करना चाहिए. अधिक मास में किए गए दान आदि का कई गुणा पुण्य प्राप्त होता है. इस मास को आत्म की शुद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है. अधिक मास में व्यक्ति को मन की शुद्धि के लिए भी प्रयास करने चाहिए. आत्म चिंतन करते मानव कल्याण की दिशा में विचार करने चाहिए. सृष्टि का आभार व्यक्त करते हुए अपने पूर्वजों का भी धन्यवाद करना चाहिए. ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता को बढ़ावा मिलता है.

तुलसी के सामने गाय के घी का दीपक लगाएँ और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जप करते हुए ११ बार परिक्रमा करें| ऐसा करने से घर के सारे संकट और दुख ख़त्म हो जातें हैं और घर मे सुख शांति का वास होता है|

ब्रह्म मुहर्त मे उठकर स्नान करके भगवान विष्णु को केसर युक्त दूध का अभिषेक करें और तुलसी के माला से ११ बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जप करें|

पीपल के पेड़ मे जल को अर्पण करके गाय के घी का दीपक जलातें है तो आपके ऊपर भगवान विष्णु का आशीर्वाद हमेशा बना रहेगा|

प्रत्येक दिन श्री हरी का ध्यान करें और पीले पुष्प अर्पित करें| इससे आपके सारे मनोकामनाएँ पूरी होंगी|दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करनी चाहिए इस मास मे| कहा जाता है की दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करने से श्री हरीविष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी भ प्रसन्न होती हैं|सुबह उठकर भागवत कथा को पढ़ें| अगर आपको अपना प्रमोशन या पदो उन्नति चाहिए तो खर मास के नवमी तिथि को कन्याओं को अपने घर पे बुला के भोजन कराएँ|

 
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