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एस्ट्रोलॉजी

कोरोना काल में कैसे करें 24 अक्तूबर ,शनिवार को कन्या पूजन ?

October 20, 2020 07:54 AM

  मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, 9815619620

काफी लोगों के मन में अष्टमी तथा कन्या पूजन को लेकर असमंजस की स्थिति है जिसका सपष्टीकरण हम यहां दे रहे हैं।
पंचांग के अनुसार , 23 अक्तूबर, शुक्रवार की प्रातः सप्तमी 6 बजकर 57 मिनट पर समाप्त हो जाएगी और अष्टमी आरंभ हो जाएगी जो 24 तारीख को सुबह 6ः59 तक रहेगी। जहां सूर्योदय 6.35 के बाद है , वहां श्री दुर्गाष्टमी 23 तारीख को मनाई जाएगी। इस नियम के अनुसार दिल्ली , हरियाणा आदि में अष्टमी 24 को मनाई जाएगी। अब यह आस्था ओैेर सुविधानुसार आप दोनों में से किसी दिन भी मना सकते हैं। कुछ लोग सप्तमी का व्रत रखते हैं। आप कन्या पूजन अष्टमी और नवमी पर कर सकते हैं।

कोरोना काल में कैसे करें कंजक पूजन ?

वर्तमान परिस्थितियों में जहां फेस्टिवल सीजन में पराली दहन, आपसी दूरी बना कर न रखना, मास्क न पहनने के कारण, संक्रमण बढ़ सकता हे , ऐसे में आप घर में उपलबध ही कन्याओं औेर एक छोटे बालक के पूजन से ही काम चलाएं। शगुन एवं परंपरा के लिए हलवा , पूरी , काले चने उतना ही बनाएं जितना बांट सकें। गरीब बस्तियों में आप इसके और उपहार के पैकेट बना कर नियमों का पालन करते हुए वितरित कर सकते हैं।

कन्या पूजन का पारंपरिक विधान

दुर्गाष्टमी को कन्या पूजन करके व्रतादि का उद्यापन करना शुभ रहेगा। अष्टमी पर 9 वर्ष की कन्या 9 कन्याओं तथा एक बालक को अपने निवास पर आमंत्रित करें। उनके चरण धोएं। मस्तक पर लाल टीका लगाएं, कलाई पर मौली बांधें। लाल पुष्पों की माला पहनाएं उनका पूजन करके उन्हें हलुवा , पूरी, काले चने का प्रसाद दें या घर पर ही इसे खिलाएं। चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें ।उन्हें लाल चुनरी या लाल परिधान तथा उचित दक्षिणा एवं उपयोगी उपहार सहित विदा करें । आज कन्या रक्षा का भी संकल्प लें ।

कोरोना काल में कैसे करें कंजक पूजन ?

वर्तमान परिस्थितियों में जहां फेस्टिवल सीजन में पराली दहन, आपसी दूरी बना कर न रखना, मास्क न पहनने के कारण, संक्रमण बढ़ सकता हे , ऐसे में आप घर में उपलबध ही कन्याओं औेर एक छोटे बालक के पूजन से ही काम चलाएं। शगुन एवं परंपरा के लिए हलवा , पूरी , काले चने उतना ही बनाएं जितना बांट सकें। गरीब बस्तियों में आप इसके और उपहार के पैकेट बना कर नियमों का पालन करते हुए वितरित कर सकते हैं।

श्री दुर्गाष्टमी

देवी का अष्टम स्वरुप महागौरी का है ।इसे श्री दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है। भगवती का सुंदर ,सौम्य ,मोहक स्वरुप महागौरी में विद्यमान है। वे सिंह की पीठ पर सवार हैं। मस्तक पर चंद्र का मुकट सुशोभित है। चार भुजाओं में शंख, चक्र,धनुष और बाण हैं।

सबसे महत्वपूर्ण है कि माता का यह स्वरुप सौन्दर्य से संबंधित है। इनकी आराधना से सौन्दर्य प्रदान होता है।जो युवक युवतियां सौन्दर्य के क्षेत्र में जाने के इच्छुक हैं, वे आज महागौरी की आराधना करें।फिल्म, ग्लैमर व रंगमंच की दुनिया की इच्छा रखने वाले या सौन्दर्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने जा रहे ,युवा वर्ग आज व्रत के साथ साथ निम्न मंत्र का जाप भी अवश्य करे ं।जिनके वैवाहिक संबंध सुंदर न होने के कारण नहीं हो रहे या टूट रहे हों वे आज अवश्य उपासना करें।
चौकी पर श्वेत रेशमी वस्त्र बिछा कर माता की प्रतिमा या चित्र रखें । घी का दीपक जला कर चित्र पर नैवेद्य अर्पित करें ।दूध निर्मित प्रसाद चढ़ाएं।

मंत्र- ओम् ऐं हृीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै! ओम् महागौरी देव्यै नमः!!
की एक या 11 माला करें ।अपनी मनोकामना अभिव्यक्त करें। आज अष्टमी पर मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी ।

नौ देवियों के रूप में नौ कन्याएं

शास्त्रों में कहा गया है कि नौ देवियों के रूप में अष्टमी या नवमी के दिन व्रत का परायण करने से पहले नौ कन्याओं का पूजन करना चाहिए। ये नौ कन्याएं नौ देवियों का ही रूप हैं। हर कन्या एक देवी का रूप है जिसका पूजन करते हुए उपासक परोक्ष रूप से उस देवी का ही पूजन करता है।

इसमें दो साल की बच्ची कुमारीए तीन साल की त्रिमूर्तिए चार साल की कल्याणीए पांच साल की रोहिणीए छरू साल की कालिकाए सात साल की चंडिकाए आठ साल की शाम्भवीए नौ साल की दुर्गा और दस साल की कन्या सुभद्रा का स्वरूप होती हैं। जरूरी नहीं कि नौ ही कन्याएं पूजन के लिए आएं अगर ज्यादा कन्याएं आ गई हैं तो उनका भी विधिवत पूजन करें और प्रसाद वितरित करें। अगर कन्याओं की संख्या ज्यादा न हो पाए तो भी चिंता न करेंए केवल दो कन्याओं को पूजने से भी व्रत का परायण संपन्न हो सकता है। बस इस बात का ध्यान रखें कि कन्याओं की उम्र 9 साल से ज्यादा न हो।

वैसे भी शास्त्रों के अनुसार एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य की प्राप्त होती है। दो कन्याओं की पूजा से भोग और मोक्ष साथ साथ मिलते हैं। तीन कन्याओं के पूजन से धर्म के साथ साथ अर्थ व काम की भी प्राप्ति होती है। चार कन्याओं की पूजा से राजयोग मिलता है और पांच कन्याओं के पूजन से विद्या धन की प्राप्ति होती है। छह कन्याओं का पूजन छह तरह की सिद्धि दिाता है और सात कन्याओं का पूजन राज्य में राज का सुख मिलता है। आठ कन्याओं के पूजन से संपूर्ण संपदा और नौ कन्याओं के पूजन से धरती के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।

मनपसंद गिफ्ट देकर कंजकों को करें खुश

वैसे समय अब काफी मॉडर्न हो गया हैं इसलिए आप प्रसाद के साथ उन्हें मनपसंद चीजें उपहार में भी दे सकते हैं क्योंकि गिफ्ट पाकर हर बच्चा खुश होता है। बाजार में आपको ऐसी बहुत सारी चीजें मिल जाएंगी जिन्हें आप कंजक पूजन में बच्चों को दे सकते हैं। ध्यान रहें ऐसी कोई भी गिफ्ट उन्हें ना दें जो उनके काम ना आए। ये उपहार उनकी उम्र के हिसाब से हो तो अच्छा है। कंजक पूजन में दिए जाने वाले गिफ्ट को लेकर बाजारों में खूब धूम मची हुई हैं। बस अपनी पसंद की चीजें लाएं और बच्चों को खुश करें।

एक्सेसरीज- लड़कियों को एक्सैसरीज बहुत पसंद आती है। आप उनके लिए नेकलेस, कलरफुल बैंग्ल्स ब्रैस्लेट हेयरबैंड क्लिप्स हेयरपिन छोटे इयररिंग आदि दे सकते हैं। लेकिन ये चीजें 6 से 9 साल की लड़कियों को दें तो अच्छा हैं क्योंकि वह इन चीजों का इस्तेमाल करना बखूबी जानती हैं।

स्टेशनरी- छोटे बच्चों को स्टेशनरी का सामान गिफ्ट में दिया जाए तो सबसे बढ़िया हैं ये चीजें उनके बहुत काम आती हैं। आप उन्हें पैंसिल बॉक्स, शॉर्पनर, पेंन, रबड़ और ड्राइंग कलर दे सकते हैं। अगर बच्चे 4 से 5 साल के हैं तो उन्हें आप कविता-कहानी से जुड़ी किताबें भी दे सकते हैं।

खिलौने- 2 से 3 साल के बच्चे खिलौने से खेलना ज्यादा पसंद करते हैं तो आप इन्हें बैलून टैंडी कलरफुल ब्लॉक गेम्स एल्फाबेट्स गेमस आदि दे सकते हैं।

स्कूल आइटम- बच्चे स्कूल में टिफ्फन वॉटर बोतल सिप्पर आदि की जरूरत तो पड़ती ही हैं आप उन्हें उनके मनपसंद कार्टून करैक्टर वाली ये चीजें भी दे सकते हैं।

पिग्गी बैंक- अगर आप बच्चों को देने के लिए कोई चीज सिलैक्ट नहीं कर पा रहे तो उन्हें पिग्गी बैंक दीजिए। इससे उन्हें अपनी पॉकेट मनी सेव करने की अच्छी आदत भी पड़ेगी। इसे आप हर उम्र के बच्चे को दे सकते हैं।

- मदन गुप्ता सपाटू, 458, सैक्टर 10, पंचकूला, मो- 98156-19620, 0172-2577458

 
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