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एस्ट्रोलॉजी

दिवाली के पंचोत्सव 13 नवंबर से 16 तक सिमट रहें हैं 4 दिनों में, दिवाली पर ग्रहों का ऐसा संयोग 1521 में बना था

November 07, 2020 05:20 PM

 मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य 

2020 में सामाजिक जीवन के साथ साथ धार्मिक गतिविधियों में भी अप्रत्याशित परिवर्तन हुए हैं। श्राद्ध के अगले दिन आरंभ होने वाले नवरात्र एक महीना आगे खिसक गए। चौमासा पंचमासा में बदल गया तो दीवालीके पंच पर्व 4 दिवसीय हो गए हैं। यहां तककि शरद् पूर्णिमा का ‘ब्लू मून’ भूकंप और सुनामी तक ले आया।

अधिकांशत्योहारों को सार्वजनिक रुप से मनाने की बजाय सीमित स्थानों पर और संसधानोंसे मनाना पड़ा। मास्क और सेनीेटाइजर का उपयोग निरंतर करना पड़ रहा है। कावाचा।थ पर चांद की रौनक भी सिमटी सी रही। दिवाली तथा भाई दूज पर, पटाकों,मिठाईयों व उपहारों के आदान प्रदान पर एक अंकुश सा रहेगा। इस वर्ष दिवाली पर गुरु स्वराशि धनु, शनि भी अपनी मकरराशि में तथा शुक्र कन्या में होंगे।

ऐसा दुर्लभ संयोग, लगभग 500 सालपहले 1521 में बना था। गुरु तथा शनि कीस्थिति, धन संबंधी कार्यक्लापों, देश की आथर््िाक स्थिति में सुधार होने के संकेत दे रहे हैं।

दिवाली का त्यौहार, धनतेरस से शुरू होता है और भाई दूज के साथ समाप्त होता है। धनतेरस के दिन, स्वास्थ्य के देवता भगवान धनवंतरी की जयंती भी मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, धन्वंतरि जयंती का त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान धनवंतरी धनतेरस के दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान अमर कलश को अपने हाथों में लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि-विधान से की जाती है। इसके साथ ही इस दिन धन की देवी कुबेर, देवी लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करने का भी विधान है।

पंचोत्सव

जैसे नवरात्रि पर नौ दिन, दुर्गा माता के नौस्वरुपों की आराधना की जाती है, ठीक उसी भांति दीवाली के अवसर पर पंचोत्सव मनानेकी परंपरा है। किस दिन क्या पर्व होगा और उस दिन क्या छोटे छोटे कार्य व उपायकरने चाहिए, उसका दैनिक विवरण संक्षिप्त रुप में हम दे रहे हैं।

विभिन्न पर्वों पर शुभ मुहूर्त
12नवंबर - गुरुवार,- गोवत्स द्वादशी ,
13नवंबर - शुक्रवार- धन त्रयोदशी- धनवंतरी जयंती, हनुमान जयंती
14नवंबर - शनिवार - चर्तुदशी, नरक चौदश , दीवाली
14नवंबर - शनिवार - दीवाली
15नवंबर - रविवार, गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, विश्वकर्मा दिवस
16नवंबर -सोमवार,- यम द्वितीया- भाई दूज

द्वादशी उत्सव के दिन गाय माता एवं उनके बछड़े की पूजा की जाती है। यह त्यौहार एकादशी के एक दिन के बाद द्वादशी को तथा धनतेरस से एक दिन पहले मनाया जाता है। गोवत्स द्वादशी की पूजा गोधूलि बेला में की जाती है। जो लोग गोवत्स द्वादशी का पालन करते हैं, वे दिन में किसी भी गेहूं और दूध के उत्पादों को खाने से परहेज करते हैं।भारत के कुछ हिस्सों मे इसे बछ बारस का पर्व भी कहते हैं। गुजरात में इसे वाघ बरस भी कहते हैं। गोवत्स द्वादशी को नंदिनी व्रत के रूप में भी मनाया जाता है। हिंदू धर्म में नंदिनी गाय को दिव्य माना गया हैं।

गोवत्स द्वादशी पूजा महिलाओं द्वारा पुत्र की मंगल-कामना के लिए किया जाता है। यह पर्व एक वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहला भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को तो दूसरा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में। धार्मिक मान्यताएं के अनुसार, गौमाता में समस्त तीर्थ होने की बात कही गई है। गौमाता के दर्शन से ही बड़े-बड़े यज्ञ, दान आदि कर्मों से भी ज्यादा लाभ प्राप्त होता है।

माता यशोदा ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद इसी दिन गौमाता के दर्शन और पूजन किया था। माना जाता है कि गौमाता को एक ग्रास खिलाने से ही सभी देवी-देवताओं तक यह अपने आप ही पहुंच जाता है।

इस दिन महिलाएं अपने बेटे की दीर्घायु के लिए और परिवार की खुशहाल के लिए व्रत करती हैं। इस दिन विशेषकर परिवार में बाजरे की रोटी बनाई जाती है। साथ ही अंकुरित अनाज की सब्जी भी बनाई जाती है। इस दिन भैंस या बकरी का दूध इस्तेमाल किया जाता है। शास्त्रों में इसका माहात्म्य बताया गया है। इसके अनुसार, बछ बारस के दिन अगर महिलाएं गौमाता की पूजा करती हैं और रोटी समेत हरा चारा खिलाती हैं तो उनके घर में मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।
धनवंतरी जयंती- 13 नवंबर 2020 (शुक्रवार)

पंचांग के अनुसार, धन्वंतरि जयंती का त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इसके साथ ही इस दिन धन की देवी कुबेर, देवी लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करने का भी विधान है। समुद्र मंथन के दौरान, वह कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन प्रकट हुए थे, इसलिए धनवंतरी जयंती दिवाली से दो दिन पहले मनाई जाती है। आयुर्वेद का जन्म भगवान धन्वंतरी के रूप में हुआ था, इसलिए उन्हें आयुर्वेद का जनक भी कहा जाता है।

भगवान धनवंतरी की चार भुजाएँ हैं, जिसमें वे शंख, चक्र, औषधि और अमृत कलश पहनते हैं। भगवान धनवंतरी को देवताओं का वैद्य या स्वास्थ्य का देवता भी कहा जाता है। वह पीतल धातु के बहुत शौकीन हैं, इसलिए इस दिन पीतल के बर्तनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन धनवंतरी की पूजा करने से अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। दरअसल, स्वास्थ्य ही सबकुछ है और इसके बिना धन भी बर्बाद होता है, इसलिए धनतेरस पर भगवान धन्वंतरी की पूजा अच्छे स्वास्थ्य और स्वस्थ शरीर के लिए की जाती है। धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है|
शुभ मुहूर्त

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ- 12 नवंबर, 2020 को रात 09.32 बजे से,
त्रयोदशी तिथि समाप्त होती है 13 नवंबर 2020 को शाम 06.01 तक
पूजा का शुभ मुहूर्त 13 नवंबर 2020 को शाम 05.28 बजे से शाम7-30बजे तक।
इस दिन कुछ नया खरीदने की परंपरा है। विशेषकर पीतल व चांदी के बर्तन खरीदने का रिवाज़ है। मान्यता है कि इस दिन जो कुछ भी खरीदा जाता है उसमें लाभ होता है। धन संपदा में वृद्धि होती है। इसलिये इस दिन लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धन्वंतरि भी इसी दिन अवतरित हुए थे इसी कारण इसे धन तेरस कहा जाता है।

क्या करें?
यह पर्व दीवाली के आगमन की सूचना देता है।
आज 13 नवंबर सायं 5.30 बजे से 7.30 बजे तक खरीदारी कर सकतेे है । प्रदोष काल सायं 5.30 से 8 बजे तक रहेगा। वैद्य एवं चिकित्सक धन्वंतरी की पूजा अर्चना कर सकते हैं।

इस दिन लक्ष्मी के साथ धन्वन्तरि की पूजा की जाती है| दीपावली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है| दीपोत्सव का आरंभ धनतेरस से होता है| जैन आगम (जैन साहित्य प्राचीनत) में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' कहते हैं| मान्यता है, भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे| तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण (मोक्ष) को प्राप्त हुये| तभी से यह दिन जैन आगम में धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ|

क्या करें?
यह पर्व दीवाली के आगमन की सूचना देता है।
आज 13 नवंबर सायं 5.30 बजे से 7.30 बजे तक खरीदारी कर सकतेे है । प्रदोष काल सायं 5.30 से 8 बजे तक रहेगा। वैद्य एवं चिकित्सक धन्वंतरी की पूजा अर्चना कर सकते हैं।
ऽ प्रातः प्रवेश स्थ्ल व द्वार को धो दें और रंगोली बनाएं, वंदनवार , बिजली की झालर लगाएं।
ऽ घर का सारा कूड़ा करकट ,अखबारों की रदद्ी,टूटा फूटा सामान,पुरानी बंद इलेक्ट्र्ानिक चीजें बेच दें।जाले साफ करें।नया रंग रोगन करवाएं।आफिस घर साफ करें। अपने शरीर की सफाई करें।तेल उबटन लगाएं।पार्लर जा सकते हैं।
ऽ पुराने बर्तन बदल के नए लें।चांदी के बर्तन या सोने के जेवर खरीदें।नया वाहन या घर की कोई दीर्घ समय तक प्रयोग की जाने वाली नई चीज लें। खीलें बताशे आज ही खरीदें । धान से बनी सफेद खीलें सुख, समृद्धि व सम्पननता का प्रतीक हैं अतः इसे धनतेरस पर ही घर लाएं।
ऽ इस दिन बाजार से नया बर्तन घर में खाली न लाएं उसमें , मिश्ठान या फल भर के लाएं
ऽ धनतेरस की रात यदि आपको अपने घर में छिपकली दिख जाए तो समझें पूरा वर्श शुभ रहेगा। इस दिन संयोगवश इसके दर्शन दुर्लभ होते हैं।
ऽ सायंकाल मुख्य द्वार पर आटे का चौमुखी दीपक बना कर , चावल या गेहूं की ढेरी पर रखें।साथ में जल, रोली ,गुड़ फूल नैवेद्य रखें । इसे आज से 5 दिन हर शाम जलाएं।
ऽ व्यवसायी अपने बही -खाते, विद्यार्थी पुस्तकों आदि की पूजा करें ।
ऽ आरोग्य हेतु आज धन्वंतरि दिवस पर जरुरत मंदों को दवाई दान दें ।
ऽ नई या पुरानी इलैक्ट्र्ानिक आयटम पर नींबू घुमा के वीरान जगह फेंकें या निचोड़ के फलश में डाल दें।
ऽ इस दिन नए कपडे़ेःपहनने से पूर्व उन पर हल्दी या केसर के छींटे दें।
ऽ नई कार या वाहन खरीदने पर उसके बोनट पर कुमकुम व घी के मिश्रण से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं ,नारियल पर रोली से ओम् बना के वाहन के आगे फोडं़े और प्रशाद बांट दें।
ऽ पुराना फटा पर्स बदल दें,नया पर्स या बैग खरीदें। इसमें क्रिस्टल,श्री यंत्र,गोमती चक्र,कौड़ी,हल्दी की गांठ,पिरामिड,लाल रंग का कपड़ा,लाल लिफाफे में अपनी इच्छा /विश लिख कर रखें। लाल रेशमी धागे में गांठ लगा के पर्स में रख लें ।मनोकामना में विवाह की इच्छा या ऐसा ही कोई रुका कार्य या धन प्राप्ति आदि लिख सकते हैं।
ऽ मेश,सिंह,बृश्चिक व धनु राशि वाले लाल,पीला , नारंगी या भूरे रंग का पर्स या बैग रखें ।, बृश ,तुला, कर्क वाले सफेद, सिल्वर, गोल्डन , आसमानी । मकर व कुंभ राशि के लोग नीले ,काले , ग्रे कलर के , मिथुन तथा कन्या राशि के हरे रंग के पर्स या बैग खरीदें ।
ऽ आज के दिन किसी को उधार न दें।

किस राशि वालों को इस दिन क्या करना चाहिए
1.मेष: सोने का सिक्का ,विद्युत या इलेक्ट्र्निक उपकरण मोबाइल, टी.वी आदि खरीदें। लाल फल. का दान करें।
2.बृष: गोल्ड क्वाएन , साबुत हल्दी, शिक्षा संबंधी उपकरण जैसे लैपटाप या कंप्यूटर ले सकते हैं ।
3.मिथुनः फूड प्रोसेसर, मिक्सी ,केसर, कलई किए बर्तन आदि ले।
4.कर्कः चांदी के बर्तन, मोती का हार या अंगूठी,मकान वाहन का क्रय आज अत्यंत शुभ रहेगा। फ्रिज , वाटर प्योरिफायर या वाटर कूलर खरीदें ।
5.सिंहः सोने के आभूशण या गोल्ड क्वाएन खरीदना धन वृद्धि करेगा। शहद, खजूर उपहार दें ।
6.कन्याः, नया मोबाइल, ब्रॉड बैंड कनेक्शन, टीवी तथा संचार संबंधी उपकरण ,स्टील केे बर्तन , होम अप्लायंस खरीदें। क्रेडिट कार्ड या ऋण लेकर कुछ न खरीदें ।
7.तुलाः चांदी केे बर्तन, क्राकरी लें, परफयूम, रियल एस्टेट में निवेश करें। हर तरफ से धन धान्य की प्राप्ति।
8.बृश्चिकः इलैक्ट््रानिक आयटम में खरीदें। लाल रंग का एप्लायंस अच्छा रहेगा। तांबे केे बर्तन, डेेकोेरेशन पीस खरीदे ।
9.धनुः लक्ष्मी जी का सोने का सिक्का या मूर्ति सामर्थ्यानुसार खरीद कर पूजा स्थान पर स्कापित करें।
10.मकरः प्रापर्टी से कुछ प्राप्त होगा। यदि वाहन या गृहपयोगी बर्तन या बिजली के यंत्र खरीदना चाहें तो काले रंग के लें।
11. कुंभः लोहे की कढ़ाई, कुकर वाहन , फ्रिज, टी.वी आदि काले ,नीले या ग्रे कलर का लें।
12.मीनः पूर्वनिर्मित मकान या फलैट की प्राप्ति। प्रापर्टी का ब्याना देना । तांबे के बर्तन लें ।

मदन गुप्ता सपाटू,  9815619620, 458.सैक्टर 10, पंचकूला  

 
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