Thursday, 03 September 2026
Breaking News
इंटर स्कूल स्टेट स्तरीय टूर्नामेंट में सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 8 की शानदार उपलब्धि ‘एकम न्याय संवाद’ आयोजित: सांसदों और न्यायिक क्षेत्र के दिग्गजों ने राष्ट्रीय पुरुष आयोग की आवश्यकता पर किया मंथन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी फाउंडेशन फाजिल्का का गठन, एडवोकेट परवीन धन्जू बने प्रधान किराए के मकान से अवैध शराब की 90 पेटियां बरामद, पुलिस को चकमा दे आरोपी पति-पत्नी फरार, छापेमारी जारी राम लीला की तैयारियों को लेकर श्री सेवा समिति रामलीला सभा की बैठक "तीयां सौण दीयां" का शानदार आयोजन  भारत-पाक सरहद के नजदीक वृक्षों पर पक्षियों के लिए दाना सहित घोंसले लगाये असम और मणिपुर में NRC का मुद्दा फिर गरमाया "अश्लीलता" का दायरा और परिभाषा बदलने की ज़रूरत श्री शिव मंदिर, सेक्टर-39 डी में दिव्य गौ कथा एवं भजन संकीर्तन का आयोजन
पंजाब Trending

फार्मास्युटिक कंपनी नेक्टर को वाटर एक्ट की उल्लंघना करने पर 5 लाख का जुर्माना

Read in:Hindi

जीरकपुर, कृतिका:
पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) ने गांव सैदपुर में बनी फार्मास्युटिकल कंपनी नेक्टर लाइफ साइंसेज लिमिटेड को वाटर एक्ट 1974 की उल्लंघन करने के चलते 5 लाख रुपये का जुर्माना किया है। नेक्टर लाइफ साइंसेज एक दवा कंपनी है जो एंटीबायोटिक दवाएं बनाती है। मौके पर जांच दौरान फार्मास्यूटिक नेक्टर कंपनी द्वारा और भी कई उल्लंघन किए गए पाए गए थे। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की टीम ने हाल ही में प्लांट का दौरा किया था। जांच दौरान पानी के सैंपल भरे गए थे जोकि फेल हो गए।

सूखी राख पानी में बहाते अधिकारियों ने पकड़ा था:
आप विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने नेक्टर प्लांट में छापा मारा था और अधिकारियों को मौके पर बुलाया था। पीपीसीबी टीम को जांच दौरान पता चला कि मल्टी इफेक्ट इवेपोरेटर (एमईई) प्लांट के नजदीक एक स्थाई बाइपास बनाया हुआ था जो ड्रेन से सटा था जिसमें सूखी राख फैंकी जा रही थी। इंडस्ट्री को सूखी राख पानी में बहाते हुए पकड़ा गया था। साथ ही ड्रेन में राख का ताजा बहाव देखा गया था जो दर्शाता था कि गंदा पानी ड्रेन में छोड़ा जाता है। लेकिन बोर्ड के मैंबरों ने पाया कि प्लांट द्वारा मुहैया करवाई गई रिटेनिंग वॉल गंदे पानी व सूखी राख को ड्रेन में छोडऩे से रोकने के लिए काफी नहीं है। जांच दौरान यह भी पाया गया कि जेसीबी लगाकर ड्रेन में इक्ट्ठा हुआ गंदा पानी निकाला जा रहा था।
ट्रीट किए पानी के उपयोग के लिए पाइपलाइनें नहीं थी ठीक:
पीपीसीबी टीम ने पाया कि प्लांट ने अलग-अलग हिस्सों में वृक्षारोपण क्षेत्रों का विकास किया है, लेकिन उक्त क्षेत्र में अलग-अलग स्तर हैं और करनाल प्रौद्योगिकी के अनुसार वृक्षारोपण नहीं किया गया है । कुछ जगह 0.5 मीटर से भी अधिक गहरे गड्ढे देखे गए थे। ट्रीट किए पानी के उपयोग के लिए पाइपलाइनों का कोई उचित नेटवर्क नहीं था और कई जगहों पर लचकदार पाइप पड़े देखे गए थे। वृक्षारोपण क्षेत्र से नाले की ओर जाने वाली खाडियां देखी गई, जो यह दर्शाती है कि गंदा पानी नाले में बहाया जाता है। यहां तक कि बागान क्षेत्र के कुछ हिस्सों में पानी का ठहराव देखा गया। पीपीसीबी टीम ने देखा कि इंडस्ट्री अपने उपचारित अपशिष्टों को सिंचाई के उद्देश्य से नाले में लचकदार पाइपों के माध्यम से आंशिक रूप गंदे पानी को पंप कर रहा है। खतरनाक कचरे को संभालने के लिए इंडस्ट्री द्वारा लगाए गए इनसिनरेटरों के संचालन के लिए बने दिशा निर्देशों अनुसार अपेक्षित तापमान को बरकरार नहीं रखा जा रहा था।

प्लांट का दौर किया और वाटर एक्ट 1974 के तहत कई खामियां पाई गई जिस कारण प्लांट को 5 लाख रुपये का जुर्माना किया गया है। पीपीसीबी के निर्देश का पालन करने के लिए आगे के निर्देश दिए गए हैं अगर दोबारा उल्लंघन करते पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
— परमजीत सिंह, पीपीसीबी के सुपरडेंट इंजीनियर

हम पहले ही पीपीसीबी के निर्देशों का पालन कर रहे हैं और उन्हें लिखित रूप में जवाब भी दे दिया गया है।
पुनीत सूद, नेक्टर लाइफ साइंसेज प्लांट हेड