Tuesday, 28 July 2026
Breaking News
संगरूर में भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला गौ हत्या बंद कराने और गौ माता को राष्ट्र माता घोषित कराने एडीसी को दिया ज्ञापन नागा पहाड़ियों में विकास परियोजनाएं और अवैध खनन: असम की बाढ़ त्रासदी का कारण ! सप्त शक्ति कमांड में मनाया गया कारगिल विजय क्या अब धर्मपुर में भी किसी की जान जाने का इंतज़ार है? टी.एस.एम. स्पोर्ट्स चंडीगढ़ विजयी और रनर-अप करनाल नरवाल क्रिकेट अकादमी सफाई सेवकों पर हुए लाठीचार्ज से महिला आयोग ने मांगी रिपोर्ट वरिष्ठ नागरिक ने गमाडा के हाउसिंग प्रोजेक्ट में अनियमितताओं पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की एनडीपीएस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से आरोपी को नियमित जमानत असम में भूमि आंदोलन पर कार्रवाई की गूंज दुनिया तक
चर्चा Trending

गौड़ीय मठ में गोवर्धन पूजा महोत्सव में उमड़ा जनसैलाब, चावलों से बनाया गया गोवर्धन पर्वत का रूप रहा मुख्य आकर्षण

Read in:Hindi

आर के शर्मा/चंडीगढ़

श्री चैतन्य गौड़ीय मठ, से. 20, चण्डीगढ़ में गोवर्धन पूजा अन्नकूट महोत्सव अखिल भारतीय श्री चैतन्य गौड़ीय मठ संस्थान के आचार्य एवं अध्यक्ष श्री भक्ति विचार विष्णु महाराज जी के सानिध्य में आयोजित किया गया।

मठ के प्रवक्ता जयप्रकाश गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि सुबह मंगला आरती के पश्चात प्रभात फेरी का आयोजन किया गया। भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामीभक्ति विचार विष्णु महाराज जी ने कहा कि जब ब्रज वासियों ने इंद्र देवता की पूजा करने से मना कर दिया तो क्रोधित होकर इंद्र देवता ने ब्रज मंडल को बारिश द्वारा पानी में डुबोने का निर्णय ले लिया, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी तर्जनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा कर ब्रजवासियों को पर्वत के नीचे बुला कर उनकी पानी और वर्षा से रक्षा की।(SUBHEAD)

आज ही के दिन भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा की थी, इसलिए गोवर्धन पूजा हजारों वर्षों से मनाया जा रहा है। आज के कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण चावलों से गोवर्धन पर्वत का रूप बनाया गया था। हजारों की संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर भगवान श्री गोवर्धन धाम लीला के दर्शन किए एवं अपने श्रद्धासुमन भेंट किए।

भगवान गोवर्धन को 56 भोग के व्यंजन अर्पित किए गए व भोग आरती के पश्चात हजारों की संख्या में लोगों ने भंडारा प्रसाद ग्रहण किया। भक्तों के चेहरों पर उमंग उल्लास झलक रहा था। उन्होंने हरि नाम संकीर्तन नृत्यगान कर अपनी श्रद्धा प्रकट की और गिरिराज धरण को नतमस्तक किया।