ENGLISH HINDI Friday, January 30, 2026
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
20 एचसीएस अधिकारियों को मिला सुपर टाइम स्केल, सरकार ने जारी किए आदेशराइट टू सर्विस कमीशन ने प्रभावित आवंटी मनोज वशिष्ठ को 5,000 रुपये तक का मुआवज़ा देने के दिए आदेशमां मनसा देवी निष्काम सेवक संघ चंडीगढ़ के 11वें ब्लड डोनेशन कैंप में 189 यूनिट रक्त एकत्रितपूजा बक्शी ने आईजी नवज्योति गोगोई का किया सम्मानउत्तराखंडी सांस्कृतिक कार्यक्रम "हिंवाऴी कांठी" 31 जनवरी को टैगोर थिएटर मेंचण्डीगढ़ मेयर चुनाव में भाजपा की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक विनोद तावड़े पहुंचे तरुण भंडारी के आवास परसर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजनअध्यक्ष नहीं, काउंसिल अधूरी: भारतीय प्रेस परिषद की कहानी
कविताएँ

शिव पराकाष्ठा हैं

February 15, 2023 11:19 AM

शिव पराकाष्ठा हैं।

राग की, वैराग्य की।
स्थिरता की, दृढ़ता की।
ध्यान की, विज्ञान की।
ज्ञान के प्रकाश की।।
वे समेटे हैं।
प्रेम को, क्रोध को।
शांति को, भ्रांति को।
त्याग को, विश्वास को।
भक्ति को, शक्ति को।।
शिव स्त्रोत हैं।
प्राण का, प्रमाण का।
धर्म का, कर्म का।
आचार का, विचार का ।
अंधकार के विनाश का।।
उनमे समाए हैं।
गीत भी, संगीत भी।
विष भी, अमृत भी।
समय भी, विनय भी।
आरम्भ भी अंत भी।।
लोग कहते है, शिव संहारक हैं,
वो संहार करते हैं,अंत करते हैं।
परंतु वह भूल जाते हैं कि
शंकर अंत करके एक नई शुरुआत का आरम्भ करते हैं।
वे सृजन भी करते हैं, संहार भी करते हैं।
ज़रूरत पड़ने पर चमत्कार भी करते हैं।
शिव ब्रह्मा भी हैं वेद भी।
जीवन का हैं भेद भी ।
शिव नारी भी हैं, पुरुष भी।
माया भी हैं, मोक्ष भी।।
वो निर्गुण भी हैं, सगुण भी।
सात्विक भी है, तामसिक भी।
ध्वनी भी हैं, दृष्टि भी।
श्वास भी हैं, मुक्ति भी।।
वो साधन भी हैं साधना भी।
चिंता भी हैं, और चिंतन भी।
वो अंदर भी हैं, बाहर भी।
और मुझ में भी हैं, तुझ में भी।।

— मेधावी महेंद्र

 
कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें