ENGLISH HINDI Saturday, March 28, 2026
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
गौड़ीय मठ का सनातन सेवा में योगदान सराहनीय : गुलाब चंद कटारियाहरियाणा में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल, 63 आईएएस और एचसीएस इधर से उधर वैश्विक ऊर्जा संकट: सुखना झील जैसे ध्वनि प्रदूषण मुक्त घोषित क्षेत्र में एयर शो के औचित्य पर सवाल उठाए वसीम मीर नेचण्डीगढ़ के सबसे बड़े कंजक पूजन का आयोजन किया हरिशंकर मिश्रा नेउपलब्धि : श्री चैतन्य गौड़ीय मठ संस्थान के अध्यक्ष भक्ति विचार विष्णु महाराज जी वर्ल्ड वैष्णव एसोसिएशन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्तहर्षोल्लास पूर्वक मनाया श्री राम नवमी उत्सवबाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी में 100 करोड़ का घोटाला! डिवाइन कराओके क्लब द्वारा संगीत ही जिन्दगी है-3 का आयोजन 29 को
कविताएँ

शिव पराकाष्ठा हैं

February 15, 2023 11:19 AM

शिव पराकाष्ठा हैं।

राग की, वैराग्य की।
स्थिरता की, दृढ़ता की।
ध्यान की, विज्ञान की।
ज्ञान के प्रकाश की।।
वे समेटे हैं।
प्रेम को, क्रोध को।
शांति को, भ्रांति को।
त्याग को, विश्वास को।
भक्ति को, शक्ति को।।
शिव स्त्रोत हैं।
प्राण का, प्रमाण का।
धर्म का, कर्म का।
आचार का, विचार का ।
अंधकार के विनाश का।।
उनमे समाए हैं।
गीत भी, संगीत भी।
विष भी, अमृत भी।
समय भी, विनय भी।
आरम्भ भी अंत भी।।
लोग कहते है, शिव संहारक हैं,
वो संहार करते हैं,अंत करते हैं।
परंतु वह भूल जाते हैं कि
शंकर अंत करके एक नई शुरुआत का आरम्भ करते हैं।
वे सृजन भी करते हैं, संहार भी करते हैं।
ज़रूरत पड़ने पर चमत्कार भी करते हैं।
शिव ब्रह्मा भी हैं वेद भी।
जीवन का हैं भेद भी ।
शिव नारी भी हैं, पुरुष भी।
माया भी हैं, मोक्ष भी।।
वो निर्गुण भी हैं, सगुण भी।
सात्विक भी है, तामसिक भी।
ध्वनी भी हैं, दृष्टि भी।
श्वास भी हैं, मुक्ति भी।।
वो साधन भी हैं साधना भी।
चिंता भी हैं, और चिंतन भी।
वो अंदर भी हैं, बाहर भी।
और मुझ में भी हैं, तुझ में भी।।

— मेधावी महेंद्र

 
कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें