Tuesday, 07 July 2026
Breaking News
रावण बनाम बादशाह अकबर चंदे के धंधे में रसीद का क्या काम? कामरेड जगदीश भारद्वाज का जाना एक युग का अंत श्री गुरु रविदास सभा राम दरबार, फेज-1 की कमेटी भंग वुमेन एंड चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी के इंटर्न विद्यार्थियों ने एक माह का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक किया पूरा पासपोर्ट-बहस के बीच क्या देशव्यापी NRC की तैयारी संभव!  टिहरी गढ़वाल विकास परिषद की नव-निर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न सीए देश की आर्थिक मजबूती के प्रमुख स्तंभ, विकसित भारत के निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका: मुख्यमंत्री श्री अमरनाथ यात्रा पर गए एक यात्री की रहस्यमयी मौत मनोरंजन जगत के दिग्गज सितारों से सजा आइकॉनिक गोल्ड स्ट्रीमिंग अवॉर्ड्स 2026
चंडीगढ़ Trending

नच उठेया, नच उठेया, जिंदड़ी दा तुम्बा नच उठेया…

Read in:Hindi

कँवर ग्रेवाल के सूफी भजन गायन के साथ तू ही तू में सालाना उर्स-ए-मुबारक व सर्वधर्म समागम सम्पन्न

(MOREPIC1) (MOREPIC2) चण्डीगढ़ : माता राम बाई चेरिटेबल ट्रस्ट राम दरबार, चण्डीगढ़ द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी सूफी संत बाबा रूकनुद्दीन (कुंडे वाली सरकार) का 65वां और मर्द-ए-कलन्दर जन्नतनशीन पूजनीय माता राम बाई जी अम्मी हुजूर शहंशाह का 42वां उर्स-ए-मुबारक अपनी कदीमी रिवायात के मुताबिक सर्व धर्म समागम के रूप में तू ही तू, राम दरबार में शहजादा पप्पू सरकार जी गद्दीनशीं के सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया।

संस्था के प्रवक्ता तेजिंदर चौहान, जो हर वर्ष दुनिया के सबसे बड़े रावण के दहन कार्यक्रम के लिए जाने जाते हैं, ने बताया कि समारोह में श्रीमद्भागवत कथा, श्री गुरु ग्रंथ साहब जी व श्री रामचरित मानस के अखंड पाठ रखे गए व पाठों का भोग डालने के बाद अटूट लंगर बरताये गए। इस दौरान सर्व धर्म समागम, हवन व रस्म-ए-झंडा आयोजित करने के बाद फ़रियाद हुई।

समारोह में पंजाबी सूफी महफ़िल में प्रख्यात गायक कलाकार नीलम शर्मा व मानक अली ने शिरकत की। आखिरी दिन प्रख्यात सूफी गायक कँवर ग्रेवाल के सूफी भजन गायन के साथ समारोहों का समापन हो गया। कँवर ग्रेवाल ने जय जगन्नाथ, जय जगन्नाथ भजन से कार्यक्रम शुरू किया।

बाद में उन्होंने न जाइं मस्ता दे वेड़े, तेनू मस्त बना देणगे बीबा, तुंबा बड़ा शैतान कुड़े, तुंबा मेरी जान कुड़े, छल्ला इश्के दा, तकड़ी नानक दी, पूरा-पूरा तोले, इश्क नचावे यार तां नचना पैंदा ए, वे कुछ पुछ जोगी, कुछ कह जोगी तथा नच उठेया, नच उठेया, जिंदड़ी दा तुम्बा नच उठेया आदि एक से बढ़ कर एक भजन व सूफी कलाम प्रस्तुत करके श्रद्धालुओं को झूमा डाला।