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मनरेगा के तहत बड़े घोटाले: जिन लोगों ने रोजाना काम नहीं किया, उनके खातों में पहुंचा पैसा

April 01, 2025 10:28 AM

पिंकी सैनी /डेराबस्सी

गांव हरिपुर के हिंदुओं के बीच पिछली पंचायत बैठक के दौरान मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में घोटाले का आरोप लगाते हुए गांव के ही एक युवक ने सबूतों सहित शिकायत दर्ज कराते हुए जांच की मांग की है। जांच के दौरान पता चला कि ऐसे ग्रामीणों के खातों में भी पैसा जमा कर दिया गया, जिन्होंने कभी मनरेगा के तहत काम ही नहीं किया था। इस तरह के खुलासे के बाद, जांच में शामिल होने के लिए उपस्थित मेट को एक पत्र जारी किया गया।

इतना ही नहीं, 27 लोगों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था, जिनमें से कुछ उपस्थित नहीं हुए। विभाग द्वारा जारी पत्र की प्रतिलिपि शिकायतकर्ता संजीव कुमार निवासी गांव हरिपुर हिंदू को भी भेजी गई है।

शिकायतकर्ता ने बताया कि जांच में पता चला कि प्रेम चंद पुत्र किदारनाथ आईडी नंबर 21 और जसवीर सिंह पुत्र महेंद्र सिंह आईडी नंबर 86 लोगों द्वारा बयान दिया गया है कि उन्होंने मनरेगा के तहत कोई काम नहीं किया है, लेकिन मनरेगा मजदूरी की राशि उनके खाते में स्थानांतरित कर दी गई है। यह राशि 2024 के 9वें और 10वें महीने की मासिक किस्तों के बदले जारी की गई है। इसे देखते हुए तत्कालीन मेट को भी पेश होने को कहा गया है।

कारखानों में काम करने वालों को मनरेगा से दैनिक मजदूरी मिल रही थी। इतना ही नहीं, ठेकेदार ने वोटों के लालच में विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से अनियमितताएं की हैं और अनगिनत बार सरकारी खजाने को लूटा है। चुनाव के दौरान मनरेगा के तहत किए गए कार्यों की सूची तैयार की गई और गांव के आम लोगों के बीच प्रचार किया गया। जो कि पूर्णतः सरकारी निर्देशों/नियमों के विरुद्ध था।


शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि व में हुए सभी कार्यों में प्रयुक्त सामग्री और मजदूरों की मजदूरी में बड़े पैमाने पर घोटाले हुए हैं। मगरेगा व अन्य विकास कार्यों जैसे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन ढांचे, भैंस शेड, गलियों व नालियों आदि के निर्माण में बड़े पैमाने पर लापरवाही बरतकर धन का गबन किया गया है। कार्यकारी एजेंसी व संबंधित विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों की मिलीभगत से धन का गबन किया गया है। उन्होंने फर्जी जॉब कार्ड बनाकर दिहाड़ी मजदूरों के पैसे हड़प लिए हैं। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार बड़े परिवार जिनके पास अच्छी जमीन, बड़े घर और बड़ी कारें हैं, उन्हें भी मनरेगा में काम करने वाले के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

कारखानों में काम करने वालों को मनरेगा से दैनिक मजदूरी मिल रही थी। इतना ही नहीं, ठेकेदार ने वोटों के लालच में विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से अनियमितताएं की हैं और अनगिनत बार सरकारी खजाने को लूटा है। चुनाव के दौरान मनरेगा के तहत किए गए कार्यों की सूची तैयार की गई और गांव के आम लोगों के बीच प्रचार किया गया। जो कि पूर्णतः सरकारी निर्देशों/नियमों के विरुद्ध था।

जांच कर रहे पंचायत सचिव मंदीप सिंह दर्दी ने बताया कि जांच जारी है और बयान लिए जा रहे हैं।

 
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