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विदेशों में भारत का पर्याय है हिंदी

August 21, 2020 09:49 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
पंजाब विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा हिंदी माह उत्सव के तहत विशेष व्याख्यान/परिचर्चा श्रृंखला की दूसरी कड़ी में आज 'विदेश में हिंदी' विषय पर परिचर्चा हुई। इस परिचर्चा में विशेष रूप से अमेरिका के पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय से हिंदी पाठ्यक्रम की प्रमुख शुचिस्मिता सेन, रूस के सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी में हिंदी शिक्षिका एकातेरीना कोस्तिना, श्रीलंका के राष्ट्रीय भाषा शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थान से रिद्मा लंसकार और ताशकंद से निलूफर मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। इन सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उनके लिए भारत को जानने का जरिया हिंदी बनी है।
एकातेरीना कोस्तिना ने कहा कि रूस में हिंदी भाषा के विकास में हिंदी सिनेमा और हिंदी गीतों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने आगे बताया कि दादी और नानी द्वारा बॉलीवुड गाने गुनगुनाने से चलकर मैंने देखा है कि मां तथा अन्य महिलाएं बॉलीवुड स्टार मिथुन चक्रवर्ती की प्रशंसक हैं। हिंदी के विद्वान राहुल सांकृत्यायन भी यहां काफी लोकप्रिय हैं।
रिद्मा लंसकार ने बताया कि हिंदी भाषा की एक अपनी अलग ही मिठास है। साथ ही बताया कि भारत और श्रीलंका में सांस्कृतिक समानताएं ज्यादा हैं। 1880 में एक भारतीय ड्रामा मंडल यहां आता है जिससे सिंहली रंगमंच प्रभावित होते हैं तथा वह हिंदी सीखते हैं और कलाओं के साथ-साथ हिंदी भाषा से प्रेम करने लगते हैं तथा लोगों को भी हिंदी सिखाना शुरू कर देते हैं।  

विदेश में हिंदी विषय पर वेब-संवाद


निलूफर ने बताया कि उज्बेकिस्तान में हिंदी को भी अब पढ़ाया जाता है। अनुवाद के क्षेत्र में भी ख़ूब विकास हुआ है। हिंदुस्तानी जर्नलिज्म को भी पढ़ाया जाने लगा है। मैंने खुद प्रेमचंद के हिंदी भाषा से उज्बेकिस्तानी अनुवाद पर रिसर्च किया है। यहां पर हिंदी में पीएचडी होती हैं तथा रिसर्चर की संख्या में भी व्रद्धि हो रही है। यहां भाषा विज्ञान, हिंदी साहित्येतिहास व अनुवाद पर रिसर्च होती हैं।
शुचिस्मिता सेन ने कहा कि अमेरिका में प्रेमचंद सबसे ज्यादा लोकप्रिय लेखक हैं उनके साहित्य का हिंदी को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका रही है। अतः यहां हिंदी को लेकर काफी रुचि देखी जा रही है। एक सवाल के जवाब में इन्होंने बताया कि मैं स्वयं प्रेमचंद को पढ़ना बहुत पसंद करती हूँ तथा यहां बड़े-बड़े शहरों में हिंदी भाषा बखूबी सिखाई जाती है।
व्याख्यान के बाद प्रश्न- उत्तर का सत्र भी हुआ जिसमें देश- विदेश के शोधार्थी एवं प्राध्यापकों ने हिस्सा लिया।
विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि इस वर्ष हिंदी महोत्सव में विशेष तौर पर ऑनलाइन माध्यम का लाभ उठाकर के देश- विदेश के विभिन्न हिस्सों के विद्वानों को जोड़ने की कोशिश की गई है ताकि हमारे विद्यार्थी हिंदी की व्यापक पहुंच से अवगत हो सकें।
इस कड़ी में अगला व्याख्यान 28 अगस्त को 'हिंदीतर प्रदेशों में हिंदी' विषय पर होगा। इस व्याख्यान में मणिपुर विश्वविद्यालय से ई विजय लक्ष्मी, एस. वी. विश्वविद्यालय, तिरुपति से प्रो. राम प्रकाश और केरल से प्रो. शशिधरन मुख्य वक्ता होंगे।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से 80 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिनमें उज्जैन, कोल्हापुर, रोहतक, महेंद्रगढ़, छत्तीसगढ़, अबोहर, तमिलनाडु, मेघालय, कोलकाता, बठिंडा, चेन्नई और महाराष्ट्र शामिल हैं।
कार्यक्रम में प्रो. सत्यपाल सहगल, डॉ. भवनीत भट्टी और प्रो. पंकज मालवीय और प्रो. विजय लक्ष्मी भी शामिल रहीं।
इस हिंदी माह उत्सव में 6 विशेष व्याख्यानों के अलावा 'हिंदी हैं हम' नाम से कविता लेखन प्रतियोगिता भी करवाई जा रही है।

 
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