फेस2न्यूज /चण्डीगढ़ :
श्री चैतन्य गौड़ीय मठ, सेक्टर 20 में भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु जी का 540वां अवतरण दिवस पर गौर पूर्णिमा महोत्सव को हर्षोल्लास व विधि विधान के साथ धूमधाम से मनाया गया। प्रातः काल से ही मठ मंदिर में चहल-पहल प्रारंभ हो गई थी।
मंगला आरती के पश्चात प्रभातफेरी का आयोजन किया गया एवं प्रवचन संकीर्ण और चैतन्य भागवत पठन-पाठन का कार्यक्रम पूरा दिन चला रहा। भक्तों ने आज भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु जी के अवतरण दिवस के उपलक्ष पर उपवास रखा।
मठ में होली महोत्सव रंग बिरंगे महक दार फूलों के साथ खेली गई। भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु जी को उनके अवतरण दिवस के उपलक्ष पर शुद्ध गाय का देसी घी, शहद, गंगाजल, दही, गाय का दूध एवं ताजे फलों के रस के साथ पंचामृत से अभिषेक किया गया। उसके पश्चात उनको सुंदर आकर्षक पोशाक भेंट कर 56 तरह के व्यंजनों का भोग लगाया गया।
मठ मंदिर के प्रवक्ता जयप्रकाश गुप्ता ने बताया कि आज चंद्र ग्रहण होने के कारण भगवान की आरती एवं अभिषेक विलंब से प्रारंभ किया गया। मठ मंदिर के प्रभारी एवं सन्यासी बामन जी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि आज से लगभग 540 वर्ष पहले पश्चिम बंगाल के नदिया जिला स्थित मायापुर नामक स्थान पर इनका जन्म हुआ था।
चैतन्य महाप्रभु जी का इस धरातल पर अवतरण प्रेम अवतारी के रूप में हुआ था, क्योंकि द्वापर और त्रेता युग में भगवान ने अवतार लेकर दुष्टों का संहार शस्त्र और अस्त्र द्वारा किया था लेकिन कलयुग में इन्होंने अवतार लेकर दुष्टों संहार नहीं किया बल्कि प्रेम पूर्वक हरि नाम संकीर्तन करवा कर उनका उद्धार किया, इसलिए इनको प्रेम अवतारी कहा जाता है। उनकी शिक्षा थी कि हरि भजन करने के लिए कोई जाति कोई धर्म की आवश्यकता नहीं है, मनुष्य शरीर प्राप्त होना ही एकमात्र हरि भजन भगवान को प्राप्त करने का प्रमाण पत्र है। पूरे विश्व में आज जो हरि नाम संकीर्तन की गूंज सुनाई पड़ती है उसके जनक भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु जी ही है।
मठ में होली महोत्सव रंग बिरंगे महक दार फूलों के साथ खेली गई। भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु जी को उनके अवतरण दिवस के उपलक्ष पर शुद्ध गाय का देसी घी, शहद, गंगाजल, दही, गाय का दूध एवं ताजे फलों के रस के साथ पंचामृत से अभिषेक किया गया। उसके पश्चात उनको सुंदर आकर्षक पोशाक भेंट कर 56 तरह के व्यंजनों का भोग लगाया गया।
बड़ी संख्या में उपस्थित भक्त जनों ने बड़े उल्लास के साथ नृत्य संकीर्तन कर कार्यक्रम को अत्यधिक आनंदमय बना दिया। कार्यक्रम के पश्चात भगवान को अर्पित फलाहार प्रसाद वितरित किया गया।