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हरियाणा

भाजपा शासित हरियाणा में आज भी मुख्यमंत्री, मंत्रियों, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, नेता-प्रतिपक्ष के वेतन-भत्तों पर इनकम-टैक्स का सरकारी खजाने से हो रहा भुगतान

November 11, 2024 10:52 AM

गत कुछ वर्षो में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश की भाजपा सरकारों ने अपने अपने कानूनों में संशोधन कर सभी पदाधिकारियों को अपनी जेब से आयकर भरने हेतू की व्यवस्था:  एडवोकेट, प्रधानमंत्री और केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य भी अपनी-अपनी जेब से ही भरते हैं वेतन-भत्तों पर आयकर 

फेस2न्यूज /चंडीगढ़

हरियाणा में हाल ही में नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में बनी दूसरी भाजपा सरकार में में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त नियुक्त 13 अन्य मंत्री, विधानसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर एवं आगामी दिनों में स्पीकर द्वारा सदन में पदांकित किये जाने वाले नेता प्रतिपक्ष (जो प्रमुख विपक्षी कांग्रेस विधायक दल का नेता होगा) अर्थात कुल 17 पदाधिकारियों को प्रतिमाह प्राप्त होने वाले वेतन-भत्तों पर बनने वाला वार्षिक इनकम टैक्स उक्त सभी पदाधिकारी स्वयं अपनी जेब से अदा नहीं करेंगे बल्कि प्रदेश के सरकारी खजाने से उक्त आयकर का भुगतान होगा. 

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और संसदीय मामलों के जानकार हेमंत कुमार (9416887788) ने बताया कि वर्तमान में हरियाणा देश के उन कुछेक राज्यों में से हैं जहाँ आज भी उपरोक्त पदाधिकारियों के वेतन-भत्तों पर इनकम-टैक्स सरकारी खजाने में से अदा किया जाता है.

इसी वर्ष जून में मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ डा. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा‌ सरकार द्वारा निर्णय लिया गया कि आगे से प्रदेश के मुख्यमंत्री‌ और मंत्रियों आदि को प्राप्त होने वाले वेतन - भत्तों आदि पर इनकम टैक्स का भुगतान सरकारी कोष से नहीं बल्कि उनके द्वारा स्वयं अपनी जेब से किया जाएगा. इ

ससे पूर्व 2022 में हिमाचल प्रदेश में तत्कालीन सत्तासीन जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा भी निर्णय लिया गया था कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष और विधायकों के वेतन-भत्तों पर इन्कम टैक्स का भुगतान, जो पहले सरकारी कोष से किया जाता था, वह सम्बंधित पदाधिकारयों को उनकी जेबसे ही अदा करना होगा. 5 वर्ष पूर्व सितम्बर, 2019 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने अपने पहले कार्यकाल मे और उत्तराखण्ड में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में पहली भाजपा सरकार ने मे भी ऐसा निर्णय लेकर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया था. मार्च, 2018 में पंजाब की तत्कालीन अमरेन्द्र सरकार द्वारा भी प्रदेश के मुख्यमंत्री, मंत्रियों, नेता प्रतिपक्ष के सम्बन्ध में ऐसी व्यवस्था लागू की गई थी.यहाँ तक कि देश के प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय मंत्रीपरिषद के सदस्यों,

लोकसभा अध्यक्ष/उपाध्यक्ष एवं लोकसभा/ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा भी वेतन-भत्तो पर आयकर का भुगतान उनकी जेब से ही किया जाता है. 

फरवरी,2018 में एक आर.टी.आई. दायर कर जब इस सम्बन्ध में सूचना मांगी गयी तो उसके जवाब में विधानसभा सचिवालय द्वारा यह स्वीकार किया गया था कि गलती से विधायको के वेतन पर भी आयकर का भुगतान राज्य सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2010-11 से लेकर 2017-18 तक कर दिया गया. बहरहाल, उसके बाद विधायकों के वेतन पर सरकारी खजाने से खर्च हुई कुल 2.87 करोड़ रुपये की वसूली हर तत्कालीन विधायक के मासिक वेतन-भत्तों से और पूर्व विधायकों की पेंशन से हर माह 20 हज़ार रुपये की मासिक किश्त लगाकार वसूली की गईं थी.

बहरहाल, हेमंत ने आगे बताया कि मौजूदा तौर पर हरियाणा में लागू तीन कानूनों अर्थात हरियाणा के मंत्रियों का वेतन और भत्ते कानून, 1970 के अंतर्गत मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वेतन-भत्तों पर, हरियाणा विधानसभा के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का वेतन और भत्ते कानून, 1975 में विधानसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के वेतन-भत्तों पर एवं हरियाणा विधानसभा (सदस्यों का वेतन, भत्ते और पेंशन) कानून, 1975 में सदन में नेता प्रतिपक्ष के वेतन भत्तों पर आयकर का भुगतान प्रदेश सरकार द्वारा अर्थात सरकारी खजाने से करने‌‌ का कानूनी

प्रावधान है.हालांकि इसी 1975 कानून की धारा में विधायकों के केवल भत्तों पर भी सरकार द्वारा आयकर का भुगतान करने का उल्लेख है. 

रोचक बात यह है कि करीब 7 वर्षों तक अर्थात वर्ष 2011 से 2018 तक प्रदेश सरकार द्वारा विधायकों को मिलने वाले मासिक वेतन, जो वर्तमान में प्रतिमाह 40 हजार रुपये है, पर भी आयकर का भुगतान किया गया था.

जब हेमंत द्वारा फरवरी,2018 में एक आर.टी.आई. दायर कर जब इस सम्बन्ध में सूचना मांगी गयी तो उसके जवाब में विधानसभा सचिवालय द्वारा यह स्वीकार किया गया था कि गलती से विधायको के वेतन पर भी आयकर का भुगतान राज्य सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2010-11 से लेकर 2017-18 तक कर दिया गया. बहरहाल, उसके बाद विधायकों के वेतन पर सरकारी खजाने से खर्च हुई कुल 2.87 करोड़ रुपये की वसूली हर तत्कालीन विधायक के मासिक वेतन-भत्तों से और पूर्व विधायकों की पेंशन से हर माह 20 हज़ार रुपये की मासिक किश्त लगाकार वसूली की गईं थी.

 
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