ENGLISH HINDI Saturday, February 14, 2026
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
वृंदावन में आयोजित भागवत कथा में लीलाधर शर्मा को सम्मानित कियाकंपनी संचालक से 33 करोड़ के गबन मामले में एक अन्य आरोपी दिल्ली से काबू, पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजामहाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में निकाली प्रभातफेरी, ठंड के बावजूद दिखा भोले के भक्तों का जोशचण्डीगढ़ खो-खो टीम ने तीसरा स्थान हासिल कियाधर्म सम्मेलन में सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय मूल्यों पर विस्तृत चर्चा की गईकोच बहनों की मेहनत रंग लाई, खिलाड़ियों ने जीते कई मेडलएम.एम.क्रिकेट अकादमी, अंबाला ने चौथे उत्तर क्षेत्र आर.पी. सिंह मेमोरियल अंडर-23 क्रिकेट टूर्नामेंट का अपना लीग मैच जीत लियास्वर सप्तक सिंगर्स सोसाइटी, पंचकूला ने किया ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह की जयंती का आयोजन
राष्ट्रीय

बिहार चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के मायने

November 15, 2025 09:05 AM

मनमोहन सिंह

बिहार चुनाव में एनडीए ने 200 का आंकड़ा पर कर लिया। इतनी बड़ी जीत की उम्मीद तो खुद एनडीए  ने भी नहीं की होगी। चुनावों का आकलन करने वाले बड़े बड़े पंडित भी हैरान हैं। सब राजनेता अपने अपने तर्क दे रहे हैं।

 एनडीए  के लोग इसे सुशासन, महिला सशक्तिकरण, और जंगल राज से बचाने की जीत बता रहे हैं तो विपक्ष इसे वोट चोरी, महिलाओं को दस दस हज़ार देने, चुनाव आयोग की धांधली जैसे आरोप लगा रहा है। 65 लाख लोगों के नाम काटने और 14 लाख डुप्लीकेट वोटर जोड़ने के आरोप भी चुनाव आयोग पर लग रहे हैं। हो सकता है ये आरोप सही भी हों, पर विपक्ष को इससे अलग अपनी कमियों और खामियों पर भी नज़र डालनी चाहिए।

इतने बड़े चुनाव में जहां लोकतंत्र का दाव लगा हो आप ढीली लड़ाई कैसे लड़ सकते हैं? इन हालत में भी विपक्षी महागठबंधन तानाशाही विकल्प के विहीन था। उसकी वैचारिक राजनीति कमज़ोर थी। वह पूरे चुनाव में संगठनात्मक बिखरेपन का प्रदर्शन करता रहा। वोट चोरी के अलावा, जाती जनगणना, नवउदारवादी नीतियों जैसे मुद्दों को सही ढंग से उठाया ही नहीं गया। नतीजतन तथाकथित गठबंधन अपने सबसे अधिक उत्पीड़ित दलित गरीब तबकों से अलग थलग पड़ गया।

दूसरी तरफ एनडीए  ने अपने पास डबल इंजिन शासन के सहारे हिंदुत्व की आक्रामकता के साथ साथ मुफ्त की रेवड़ी, दान- दक्षिणा और मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना को आगे बढ़ा कर उत्पीड़ित जातियों को अलग अलग साधते हुए परिस्थितियों को अपनी ओर मोड़ लिया। सबसे शर्मनाक और नुकसानदेह रहा महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर खुली फूट। व्यक्तिगत और अवसरवादी लाभ के लिए "दोस्ताना मुकाबला" और अंतर कलह ने काम और खराब कर दिया।

जहां एक व्यापक फासीवाद विरोधी एकता की और न्यूनतम कार्यक्रम की जरूरत थी वहां महागठबंधन के घटक अपनी अपनी पसंद और प्राथमिकता के आधार पर प्रचार कर रहे थे। नतीजा यह हुआ कि अनुकूल हालत के बावजूद विपक्ष प्रभावशाली फासीवाद विरोधी चुनावी हमला करने में विफल रहा। यह चुनाव विपक्ष के लिए खास तौर पर वामपंथी पार्टियों के लिए एक सबक है। उन्हें अपनी समझ और नजरिए को नए सिरे से व्यवस्थित करने की ज़रूरत है।

 
कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और राष्ट्रीय ख़बरें
गैंडे की रक्षा से विकास की पटरी तक: असम ने संरक्षण की मिसाल कायम की 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाओं में कैसे हासिल करें सफलता , शिक्षा जगत के माहिर मोटीवेटर चरणजीत कुमार मित्तल दिए टॉप-10 टिप्स सिंगापुर से आई बुरी खबर: क्या जुबीन को न्याय मिलेगा? पतंगों से सीखे जीवन की उंची और सुखद उड़ान-संतोष दीदी ई एस आई डिस्पेंसरी पंचकूला की दादागिरी- नियम मनवाऊंगा लेकिन मांगने पर नियम की कॉपी नहीं दिखाऊंगा तीन सवाल, जो बना सकता है प्रशासन को जिम्मेवार और बदल सकता है आपका लाइफस्टाइल फ्लाइट कैंसिल होने पर वैकल्पिक व्यवस्था न देना गंभीर सेवा दोष, स्पाइसजेट एयरलाइन पर लगा 60 हजार रुपये का जुर्माना ब्र.कु. नवीना बहन के दिव्य अलौकिक समर्पण समारोह का आयोजन नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज को मिला उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट दायित्व, अनुयायियों में खुशी की लहर खास खबरः 14 साल में भारत में डेंगू के करीब 27 लाख केस