27 वर्ष की आयु में संगीत विषय में पीएचडी
फेस2न्यूज /चण्डीगढ़ :
सिखों की धार्मिक और संगीत परंपरा के लिए गर्व की खबर सामने आई है। गुरवारिस सिंह ने वर्ष 2026 में मात्र 27 वर्ष की आयु में देश भगत यूनिवर्सिटी, मंडी गोबिंदगढ़ से संगीत विषय में पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर ली है। इस उपलब्धि के साथ अब वे डॉ. गुरवारिस सिंह के नाम से जाने जाएंगे। इतनी कम उम्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करना न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र और संगीत जगत के लिए गर्व की बात माना जा रहा है।
उनके शोध कार्य का विषय “मानव के आध्यात्मिक विकास का मार्ग : गुरमत संगीत” रहा, जिसमें गुरमत संगीत के आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पक्षों का गहन अध्ययन किया गया। शोध के दौरान उन्होंने गुरबाणी कीर्तन की परंपरा, राग प्रणाली और मानव चेतना पर संगीत के प्रभाव जैसे विषयों को विस्तार से प्रस्तुत किया। पीएचडी के लिए उनका पंजीकरण वर्ष 2022 में हुआ था और लगभग चार वर्षों की निरंतर मेहनत के बाद यह शोध कार्य सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
इस महत्वपूर्ण शोध कार्य का मार्गदर्शन प्रसिद्ध आध्यात्मिक लेखक, संगीतकार और विद्वान डॉ. संग्राम सिंह ने किया। उनके नेतृत्व में गुरवारिस सिंह ने शैक्षणिक मानकों के अनुसार गहराई और गंभीरता से अपना शोध पूरा किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस उपलब्धि की विशेष रूप से सराहना की है।
डॉ. गुरवारिस सिंह के पिता भाई लखविंदर सिंह चंडीगढ़ वाले पिछले 30 वर्षों से गुरमत संगीत और कीर्तन सेवा से जुड़े हुए हैं। वे धार्मिक कार्यक्रमों और गुरुद्वारों में कीर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक सेवा करते आ रहे हैं। गुरवारिस सिंह ने बचपन से ही संगीतपूर्ण वातावरण में परवरिश पाई और पिछले 10 वर्षों से अपने पिता के साथ कीर्तन सेवा निभा रहे हैं। इस अनुभव ने उनके शैक्षणिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण को और मजबूत बनाया। उनकी माता गुरप्रीत कौर ने भी उनकी शिक्षा और साधना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. गुरवारिस सिंह के पिता भाई लखविंदर सिंह चंडीगढ़ वाले पिछले 30 वर्षों से गुरमत संगीत और कीर्तन सेवा से जुड़े हुए हैं। वे धार्मिक कार्यक्रमों और गुरुद्वारों में कीर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक सेवा करते आ रहे हैं। गुरवारिस सिंह ने बचपन से ही संगीतपूर्ण वातावरण में परवरिश पाई और पिछले 10 वर्षों से अपने पिता के साथ कीर्तन सेवा निभा रहे हैं। इस अनुभव ने उनके शैक्षणिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण को और मजबूत बनाया। उनकी माता गुरप्रीत कौर ने भी उनकी शिक्षा और साधना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पारिवारिक सहयोग और आध्यात्मिक वातावरण ने गुरवारिस सिंह को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित किया। डॉ. गुरवारिस सिंह ने अपनी इस बड़ी उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और अपने मार्गदर्शक डॉ. संग्राम सिंह को देते हुए कहा कि यह उनकी मार्गदर्शन, आशीर्वाद और निरंतर प्रेरणा का परिणाम है।
संगीत जगत के विद्वानों का मानना है कि “मानव के आध्यात्मिक विकास का मार्ग : गुरमत संगीत” विषय पर किया गया यह शोध भविष्य में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। गुरमत संगीत को केवल धार्मिक प्रस्तुति न मानकर मानव चेतना और आध्यात्मिक उत्थान के साधन के रूप में प्रस्तुत करना इस शोध की विशेषता मानी जा रही है।
क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से डॉ. गुरवारिस सिंह को बधाई संदेश भेजे जा रहे हैं। युवाओं के लिए यह उपलब्धि प्रेरणा का स्रोत है कि लगन, मेहनत और आध्यात्मिक जुड़ाव से बड़ी मंजिलें हासिल की जा सकती हैं।
डॉ. गुरवारिस सिंह की यह सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि गुरमत संगीत के क्षेत्र में एक नया अध्याय भी सिद्ध हो रही है। उम्मीद की जा रही है कि वे भविष्य में भी संगीत और आध्यात्मिक अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।