• सरकारी अधिकारियों द्वारा निजी सोशल मीडिया मंचों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते केंद्र सरकार से स्पष्ट और व्यापक नीति बनाने की मांग की।
अखिलेश बंसल/ चंडीगढ।
राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता ने राज्यसभा में सरकारी अधिकारियों द्वारा निजी सोशल मीडिया मंचों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से इस संबंध में स्पष्ट और व्यापक नीति बनाने की मांग की।
गुप्ता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी तथा न्यायपालिका से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं, वह अपने आधिकारिक कार्यों से संबंधित सामग्री निजी सोशल मीडिया एकाउंट्स पर साझा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शासन में पारदर्शिता और जनता से संवाद महत्वपूर्ण है, लेकिन संस्थागत संचार और व्यक्तिगत प्रचार के बीच स्पष्ट सीमा बनी रहनी चाहिए। गुप्ता ने कहा कि कई मामलों में कार्रवाई, निरीक्षण या छापेमारी से जुड़े वीडियो निजी एकाउंट्स पर नाटकीय अंदाज में साझा किए जाते हैं, जिनमें स्पेशल इफेक्ट्स और संगीत का भी उपयोग होता है।
गुप्ता ने यह भी कहा कि कुछ अवसरों पर आधिकारिक कार्रवाई से जुड़ी जानकारी सरकारी माध्यमों से औपचारिक रूप से जारी होने से पहले ही निजी सोशल मीडिया खातों पर सामने आ जाती है। उनके अनुसार ऐसी घटनाएं प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े करती हैं और विशेष रूप से तब संवेदनशील हो जाती हैं जब मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा हो।
सांसद के अनुसार यह बढ़ती प्रवृत्ति डिजिटल युग में अद्यतन नियामक दिशानिर्देशों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम, 1968 और केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम, 1964 जैसे मौजूदा ढांचे उस समय बनाए गए थे जब सोशल मीडिया मंच अस्तित्व में नहीं थे।
गुप्ता ने केंद्र सरकार से सार्वजनिक पदों पर आसीन अधिकारियों के लिए व्यापक सोशल मीडिया नीति बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस नीति में आधिकारिक संचार और निजी मंचों के बीच स्पष्ट सीमाएं तय की जाएं, संवेदनशील तथा न्यायालय में विचाराधीन सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा डिजिटल माध्यमों के उपयोग में जवाबदेही तय की जाए।