Thursday, 20 August 2026
Breaking News
चंदन गुप्ता बनीं तीज क्वीन:  हरियाली तीज उत्सव में नारीशक्ति और परंपरा का दिखा संगम जागो ग्राहक जागो - ड्यूटी पर जाते या आते समय रास्ते में दुर्घटना तो मुआवजा के लिए कंपनी जिम्मेवार, सुप्रीम कोर्ट संस्मरण: आज 67 साल का हो गया मेरा कॉलेज! काज़ीरंगा होटल परियोजना का विरोध कर रहे प्रणब डोले को जमानत के बाद NSA हिरासत, उठे सवाल ऐ मेरे प्यारे वतन... आउटसोर्स कर्मचारियों की जॉब सिक्योर पॉलिसी पर स्वास्थ्य मंत्रालय का चण्डीगढ़ प्रशासन को पत्र आयुर्वेद के पुनर्जागरण से नई पीढ़ी जुड़े: गुलाब चंद कटारिया जीएमसीएच-32 का चंडीगढ़ मॉडल बुजुर्गों में डिजिटल स्वास्थ्य साक्षरता को  दे रहा है बढ़ावा “विरसा पंजाब दा” तीज समारोह में सना बनी तीज क्वीन, माही और शिल्पा ने भी जीते खिताब स्वतंत्रता दिवस पर एरोफ्लाई इंटरनेशनल एविएशन अकादमी में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन
एस्ट्रोलॉजी Trending

पूर्णिमा: कैसे करें सुबह की शुरुआत गुरु के दिन

Read in:Hindi

पंडित सुंदर लाल भार्गव(9811213630)

चंडीगढ़: बुधवार को गुरुपूर्णिमा है। इस दिन सुबह बिस्तर पर प्रार्थना करना ‘‘हे महान पूर्णिमा ! हे गुरुपूर्णिमा! इस देह की सम्पूर्ण असली आवश्यकता की तरफ हम आज से कदम रख रहे हैं। उसी समय ध्यान करना। शरीर बिस्तर छोड़े उसके पहले अपने प्रियतम को मिलना।

गुरुदेव का मानसिक पूजन करना। वे तुम्हारे मन की दशा देखकर भीतर-ही-भीतर संतुष्ट होकर अपनी अनुभूति की झलक से तुम्हें आलोकित कर देंगे। उनके पास उधार नहीं है, वे तो नगदधर्मा हैं,इसलिए जरूरी है जीवन में गुरु का होना। हिंदू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा गुरु भक्ति को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पवित्र दिन भी है। भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु को सर्वोपरि माना है। वास्तव में यह दिन गुरु के रूप में ज्ञान की पूजा का है।

गुरु का जीवन में उतना ही महत्व है, जितना माता-पिता का। माता-पिता के कारण इस संसार में हमारा अस्तित्व होता है, किंतु जन्म के बाद एक सदगुरु ही व्यक्ति को ज्ञान और अनुशासन का ऐसा महत्व सिखाता है, जिससे व्यक्ति अपने सतकर्मों और सद्विचारों से जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी अमर हो जाता है। यह अमरत्व गुरु ही दे सकता है।

सदगुरू ने ही भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बना दिया, इसलिए गुरु पूर्णिमा को अनुशासन पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास गुरु ही करता है। जिससे जीवन की कठिन राह को आसान हो जाती है। सार यह है कि गुरु शिष्य के बुरे गुणों को नष्ट कर उसके चरित्र, व्यवहार और जीवन को ऐसे सद्गुणों से भर देता है, जिससे शिष्य का जीवन संसार के लिए एक आदर्श बन जाता है। ऐसे गुरु को ही साक्षात ईश्वर कहा गया है इसलिए जीवन में गुरु का होना जरूरी है।   (पंडित सुंदर लाल भार्गव: 9811213630)