Thursday, 21 May 2026
Breaking News
हिमाचल ​के राज्यपाल  ने भाखड़ा बांध का दौरा किया, बिजली उत्पादन के बुनियादी ढांचे की समीक्षा की सांसद साहनी ने पंजाब पर बढ़ते कर्ज, लंबित डीए एवं कॉलेजों को ग्रांट-इन-एड जारी न होने पर चिंता जताई 'कॉकरोच जनता पार्टी' का गठन, बधाई राज काकड़ा की पहली पुस्तक ‘पैंडा: इश्क-ए-मजाज़ी से इश्क-ए-हकीकी तक’ का  लोकार्पण आक्रोषः बरनाला रहा पूर्ण बंद  कंस वध एवं श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं भक्तिरस से ओत-प्रोत किया वर्णन 'कॉकरोच' का सम्मान युवाओं के जोश को सही दिशा देने से वो भटकने से बच सकते हैं : आचार्य प्रशांत अग्रवाल समाज का इतिहास गौरव व गरिमा से परिपूर्ण: मुख्यमंत्री नायब सैनी घर में रख रहें है नौकर- तो पहले करवा लें पुलिस वेरिफिकेशन
एस्ट्रोलॉजी Trending

पूर्णिमा: कैसे करें सुबह की शुरुआत गुरु के दिन

Read in:Hindi

पंडित सुंदर लाल भार्गव(9811213630)

चंडीगढ़: बुधवार को गुरुपूर्णिमा है। इस दिन सुबह बिस्तर पर प्रार्थना करना ‘‘हे महान पूर्णिमा ! हे गुरुपूर्णिमा! इस देह की सम्पूर्ण असली आवश्यकता की तरफ हम आज से कदम रख रहे हैं। उसी समय ध्यान करना। शरीर बिस्तर छोड़े उसके पहले अपने प्रियतम को मिलना।

गुरुदेव का मानसिक पूजन करना। वे तुम्हारे मन की दशा देखकर भीतर-ही-भीतर संतुष्ट होकर अपनी अनुभूति की झलक से तुम्हें आलोकित कर देंगे। उनके पास उधार नहीं है, वे तो नगदधर्मा हैं,इसलिए जरूरी है जीवन में गुरु का होना। हिंदू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा गुरु भक्ति को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पवित्र दिन भी है। भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु को सर्वोपरि माना है। वास्तव में यह दिन गुरु के रूप में ज्ञान की पूजा का है।

गुरु का जीवन में उतना ही महत्व है, जितना माता-पिता का। माता-पिता के कारण इस संसार में हमारा अस्तित्व होता है, किंतु जन्म के बाद एक सदगुरु ही व्यक्ति को ज्ञान और अनुशासन का ऐसा महत्व सिखाता है, जिससे व्यक्ति अपने सतकर्मों और सद्विचारों से जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी अमर हो जाता है। यह अमरत्व गुरु ही दे सकता है।

सदगुरू ने ही भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बना दिया, इसलिए गुरु पूर्णिमा को अनुशासन पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास गुरु ही करता है। जिससे जीवन की कठिन राह को आसान हो जाती है। सार यह है कि गुरु शिष्य के बुरे गुणों को नष्ट कर उसके चरित्र, व्यवहार और जीवन को ऐसे सद्गुणों से भर देता है, जिससे शिष्य का जीवन संसार के लिए एक आदर्श बन जाता है। ऐसे गुरु को ही साक्षात ईश्वर कहा गया है इसलिए जीवन में गुरु का होना जरूरी है।   (पंडित सुंदर लाल भार्गव: 9811213630)