Monday, 19 October 2026
Breaking News
सरगम सोसाइटी ऑफ इंडियन म्यूजिक एंड आर्ट ने  महफिल-ए-म्यूजिक" संगीत कार्यक्रम का किया आयोजन आम के बाग को बचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन जन्म लीला और ब्रज लीला के अलौकिक प्रसंगों से गूँजा पंडाल पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स नई दिल्ली से स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त चिकित्सकों को मेरिट के आधार पर मिलेगी नियुक्ति सामूहिक प्रयास रंग लाया : सीसीईटी के आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत, ड्यूटी पर न आने का आदेश वापस चंडीगढ़ में ‘अल्फा इवेंट्स’ का शुभारंभ, कॉरपोरेट इवेंट्स से लेकर शादियों तक मिलेगी प्रोफेशनल सेवाएं गुरु-भक्ति और ध्यान के रंग में रंगी संगत, 50 श्रद्धालुओं ने धारण किया पीताम्बर स्पोर्ट्स प्रोमोशन सोसाइटी, पंचकूला का बरवाला में "सर्कल कबड्डी" टूर्नामेंट 15 नवंबर को, विजेता टीम को ₹2 लाख का ईनाम एसएसएन मॉडल स्कूल में दशहरा उत्सव, 200 विद्यार्थियों ने बनाए रावण के मॉडल ‘आये तुम याद हमें-8’ के तहत ‘देव-किशोर: द इम्मोर्टल जोड़ी’ कार्यक्रम आयोजित, कलाकारों ने सदाबहार गीतों से बांधा समां
हिमाचल Trending

पांगी में 4 गांव के लोगों ने रथयात्रा के साथ पुर्थी में मनाया बाहरालू जातर मेला

Read in:Hindi

चंबा (पांगी):

जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र पांगी में जुकारू उत्सव के 12वें दिन चार प्रज्जामंडलों ने बाहरालू मेले का आयोजन किया । यह मेला पुर्थी पंचायत में मनाया जाता है। जिसमें रेई, पुर्थी, शौर और थांदल की प्रजामंडल भाग लेते है। कड़ाके की ठंड के बीच लोगों के उत्साह कम नहीं हुआ। लोगों ने मिलकर पुर्थी में बाहरालू मेला मनाया।

चारों प्रजामंडल के लोग 12 दिन के बाद एक-दूसरे के साथ मिलकर इस मेले का आयोजन करते है। लोगों की मान्यता है कि इन चार गांव के लोग 12 दिनों तक एक दूसरे के गांव में नहीं जाते है। और 12 दिनों बात बारहालू मेले के दिन सभी के साथ मिलकर जुकारू पर्व के नाम पर बाहरालू मेले का आयोजन करते है। इस अवसर पर एक दूसरे के गले लगकर खुशी मनाते है।

(SUBHEAD)इस मेले के दिन रेई और शौर से रथ यात्रा निकाली गई। जोकि पुर्थी गांव में एकत्रित होती है। रथ यात्रा के साथ जहां माता के गूर शामिल रहते हैं तो वहीं भारी संख्या में स्थानीय लोग भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाते हैं। सोमवार को तड़के 6:00 बजे मलासनी माता मंदिर में थांदल और पुर्थी के लोग लकड़ी से बनी कुकड़ी की सजावट करने में जुट जाते है और सुबह 9:00 बजे कुकड़ी को आभूषण पहनाकर रथ यात्रा के लिए तैयार करते है। जिस घर की छत पर मेला मनाया जाता है वहां 24 घंटे दीया जलाकर बलिदानो राजा की पूजा की जाती है।

मेले के खत्म होने के अगले दिन यानी मंगलवार की सुबह कुकड़ी को मेले स्थल से वापस लाया जाएगा। परंपरा के मुताबिक कुकड़ी के गहने उतारने से पहले बलि दी जाती थी लेकिन बलि प्रथा बंद होने के बाद अब नारियल चढ़ाया जाता है।

0 Comments