Monday, 26 October 2026
Breaking News
‘गरिमा सीज़न 8 करवाचौथ: द रॉयल अफेयर’ का भव्य आयोजन सीनियर्स म्यूजिक पैशन ग्रुप की 5वीं वर्षगांठ पर सजी स्वर्णिम गीतों की यादगार संगीतमय शाम मलोया में पहली बार 1100 महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा, भागवत कथा का हुआ आगाज दलित युवक की हत्या : सरकार की कार्यप्रणाली पर भाजपा नेताओं ने उठाए सवाल हिमाचल महासभा ने सागर सहोड़ को न्यूजीलैंड के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में पीएचडी हेतु चयन पर दी बधाई पंचकूला में दिसंबर में लगेगा भव्य स्वदेशी महोत्सव 300 से अधिक स्टॉलों पर दिखेगी ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ताकत चंडीगढ़ में भगवान वाल्मीकि जी की भव्य शोभायात्रा निकली, सैकड़ों महिलाओं सहित श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा ओआरसी सैनिक अकादमी के 7 विद्यार्थियों का RIMC जून 2026 परीक्षा में चयन, संस्थान में खुशी की लहर अजय कुमार हत्याकांड: विधानसभा के बाहर लगातार दूसरे दिन परिवार के साथ धरने में शामिल हुए सुनील जाखड़ अजय हत्याकांड: राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को निष्पक्ष जांच व कार्रवाई के निर्देश
हिमाचल Trending

पांगी में 4 गांव के लोगों ने रथयात्रा के साथ पुर्थी में मनाया बाहरालू जातर मेला

Read in:Hindi

चंबा (पांगी):

जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र पांगी में जुकारू उत्सव के 12वें दिन चार प्रज्जामंडलों ने बाहरालू मेले का आयोजन किया । यह मेला पुर्थी पंचायत में मनाया जाता है। जिसमें रेई, पुर्थी, शौर और थांदल की प्रजामंडल भाग लेते है। कड़ाके की ठंड के बीच लोगों के उत्साह कम नहीं हुआ। लोगों ने मिलकर पुर्थी में बाहरालू मेला मनाया।

चारों प्रजामंडल के लोग 12 दिन के बाद एक-दूसरे के साथ मिलकर इस मेले का आयोजन करते है। लोगों की मान्यता है कि इन चार गांव के लोग 12 दिनों तक एक दूसरे के गांव में नहीं जाते है। और 12 दिनों बात बारहालू मेले के दिन सभी के साथ मिलकर जुकारू पर्व के नाम पर बाहरालू मेले का आयोजन करते है। इस अवसर पर एक दूसरे के गले लगकर खुशी मनाते है।

(SUBHEAD)इस मेले के दिन रेई और शौर से रथ यात्रा निकाली गई। जोकि पुर्थी गांव में एकत्रित होती है। रथ यात्रा के साथ जहां माता के गूर शामिल रहते हैं तो वहीं भारी संख्या में स्थानीय लोग भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाते हैं। सोमवार को तड़के 6:00 बजे मलासनी माता मंदिर में थांदल और पुर्थी के लोग लकड़ी से बनी कुकड़ी की सजावट करने में जुट जाते है और सुबह 9:00 बजे कुकड़ी को आभूषण पहनाकर रथ यात्रा के लिए तैयार करते है। जिस घर की छत पर मेला मनाया जाता है वहां 24 घंटे दीया जलाकर बलिदानो राजा की पूजा की जाती है।

मेले के खत्म होने के अगले दिन यानी मंगलवार की सुबह कुकड़ी को मेले स्थल से वापस लाया जाएगा। परंपरा के मुताबिक कुकड़ी के गहने उतारने से पहले बलि दी जाती थी लेकिन बलि प्रथा बंद होने के बाद अब नारियल चढ़ाया जाता है।

0 Comments