ENGLISH HINDI Tuesday, February 03, 2026
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
लाला अमरनाथ अग्रवाल (नॉर्थ इंडिया के पूर्व सोशल वर्कर) मेमोरियल अंडर-15 कैश प्राइज़ क्रिकेट टूर्नामेंट का 6वां एडिशन 1 मार्च सेमहाशिवरात्रि: शिव–शक्ति के मिलन और आत्मजागरण की पावन रात्रिपांगी में मशालें जलाकर भगाए राक्षस, माइनस तापमान में शुरू हुआ ऐतिहासिक खौउल उत्सव!मेयर सौरभ जोशी ने किया 19 वर्षीय प्राची की पलेठी पुस्तक ईस्ट डायरेक्शन का विमोचनस्टार्टअप, डीप टेक और डेटा सेंटर का नया गढ़ बनेगा हरियाणा, पंचकूला बनेगा उत्तर भारत की सिलिकॉन वैली : नायब सिंह सैनीगैंडे की रक्षा से विकास की पटरी तक: असम ने संरक्षण की मिसाल कायम कीइनकम टैक्स में कोई राहत न देने से व्यापारियों को निराशामिराकल हीलिंग बंद करो व पाखंडवाद मुर्दाबाद के नारों से गुंजायमान हो गया प्लाजा का माहौल
संपादकीय

कुछ याद उन्हें भी कर लो

October 20, 2022 04:30 PM

  पुलिस शहीद स्मृति दिवस 21 अक्टूबर

लक्ष्मीकांता चावला

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल व देश के सभी पुलिस बलों द्वारा हर साल 21 अक्टूबर को "पुलिस स्मृति दिवस” मनाया जाता है। यह दिन, दिनांक 21 अक्टूबर, 1959 को चीन के साथ हमारी सीमाओं की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाने वाले सीआरपी के वीर जवानों के बलिदान की याद में मनाया जाता है।

आज देश की आंतरिक सुरक्षा और बाहरी सुरक्षा के लिए हमारे जवान प्रतिदिन अपने खून से देश की रक्षा कर रहे हैं, बलिदान दे रहे हैं। हम सबका कर्तव्य है कि इस बलिदान दिवस पर उन सबको प्रणाम करें जिन्होंने सीमाओं की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और हम सब यह संकल्प लें कि अपने देश की सीमाओं की सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए तन—मन—धन बलिदान करने के लिए सदैव तैयार रहेंगे।

दीपावली के पवित्र त्यौहार के निकट यह शहीदी दिवस हमें याद करवाता है कि जिन परिवारों के बेटों ने सीमाओं पर अपना जीवन अर्पित किया, पहला दीपक उनके घर में जले यह सुनिश्चित करें।

 
कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और संपादकीय ख़बरें
अध्यक्ष नहीं, काउंसिल अधूरी: भारतीय प्रेस परिषद की कहानी एक साल से ठप प्रेस काउंसिल: क्या बिना पत्रकारों के ‘मीडिया वॉचडॉग’ चल सकता है? आज पूरी पत्रकारिता शर्मसार है! “बांग्लादेश का जन्म और असम का श्राप : शरणार्थियों के बोझ तले दबा एक राज्य” एक तरफ किसानों से बातचीत तो दूसरी और किसानों पर अद्वितीय गोलाबारी क्या यह है 2024 के बाद का भारत एक सैनिक की तरह कैसे रहें अनुशासित ? अगर रोटी नहीं पलटोगे तो जल जाएगी और सत्ता नहीं बदलोगे तो तानाशाह हो जाएगी... MANIPUR SCRIBES PUT EGI IN TROUBLES चुनाव आयोग कि स्वतंत्रता पर सुप्रीम सुनवाई, कितना सही, कितना गलत पुरानी पेंशन योजना बहाली पर नीति आयोग की चिंता, कितना सही, कितना गलत