न्याय के लिए सोशल एक्टिविस्ट ने 2 अप्रैल को फरीदकोट बंद का आह्वान किया
फेस2न्यूज /मोहाली
बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में करीब 100 करोड़ के गैर-कानूनी बिल स्कैम और अपने चहेतों की गैर-कानूनी भर्ती का मामला एक बार फिर हेडलाइन में है। लेकिन इस बार सोशल एक्टिविस्ट ने सरकार से एक्शन की मांग करते हुए फरीदकोट शहर के लिए ही बंद का आह्वान किया है।
मोहाली प्रेस क्लब में वीरवार एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सिमरनजीत सिंह मान, बलविंदर सिंह कुंभडा एस-बीसी महापंचायत पंजाब, सांझा एक्शन फ्रंट मोर्चा और एडवोकेट ललिता ने कहा कि एक तरफ तो मरीजों को बेसिक सुविधाएं और दवाएं भी नहीं मिल रही हैं, लेकिन दूसरी तरफ कुछ अधिकारी कथित तौर पर नोटों से अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। यह पूरा मामला बहुत गंभीर है और आम लोगों के स्वास्थ्य अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। यह सब यूनिवर्सिटी के मौजूदा वाइस चांसलर डॉ. राजीव सूद की शह पर हो रहा है। अब यह सिर्फ पंजाब में ही नहीं बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली में भी साफ हो गया है कि यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर कथित भ्रष्टाचार में शामिल हैं। हाल ही में दिल्ली में हुए मेडिकल एसोसिएशन के चुनावों के दौरान वाइस चांसलर को करारी हार का सामना करना पड़ा, जहां उनके विरोधी उम्मीदवार ने जीत हासिल की। यह नतीजा इस बात का साफ सबूत है कि मेडिकल कम्युनिटी और नेशनल लेवल पर भी उनकी करप्ट इमेज सामने आ गई है।
उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ जॉइंट एक्शन फ्रंट ने आंदोलन शुरू किया है। इस आंदोलन का मुख्य मकसद पंजाब सरकार को जगाना है ताकि विजिलेंस जांच पर तुरंत एक्शन लिया जाए और दोषी यूनिवर्सिटी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन इस समय सिर्फ चेतावनी के तौर पर किया जा रहा है। अगर अगले कुछ दिनों में यूनिवर्सिटी अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया तो फरीदकोट में किसान संगठनों के सपोर्ट से 2 अप्रैल को पंजाब लेवल पर अगला आंदोलन किया जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ता स. सिमरनजीत सिंह मान, बलविंदर सिंह कुंभडा और अवतार सिंह नगला ने पंजाब सरकार से अपील की है कि बाबा फरीद जी के नाम पर चल रही इस पवित्र संस्था को बचाने के लिए तुरंत और बिना किसी भेदभाव के एक्शन लिया जाए, ताकि यूनिवर्सिटी का सम्मान और लोगों का भरोसा वापस आ सके।
इस मौके पर चेयरमैन सीएलपी इंडिया अवतार सिंह नगला, हरनेक सिंह मलोआ, सतपाल नगला वगैरह भी मौजूद थे।