फेस2न्यूज/अमृतसर
पंजाब वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन ने पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के परिवार द्वारा टेंडर आवंटन में धांधली के आरोपों को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है। यह मामला पूर्व मंत्री के पिता, सुखदेव सिंह भुल्लर द्वारा बाबा नागा एग्री प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए टेंडर पर उठाए गए एतराज से जुड़ा था। कॉर्पोरेशन ने स्पष्ट किया है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी मंत्री के परिवार की शिकायतों तरह पारदर्शी थी और पूर्व का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया है।
कॉर्पोरेशन के सूत्रों के अनुसार, बाबा नागा एग्री प्राइवेट लिमिटेड ने न केवल पट्टी रेल हेड के सबसे नजदीकी साइट की पेशकश की थी, बल्कि उनके द्वारा प्रस्तावित किराए की दरें भी सुखदेव सिंह भुल्लर की ओर से दी गई दरों के मुकाबले काफी कम थीं। पूर्व मंत्री के पिता ने दावा किया था कि उनकी साइट की दूरी रेल हेड से कम है और उन्होंने एल-1 बोलीदाता के चुनाव का विरोध करते हुए नए सर्वेक्षण की मांग की थी। हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जांच में बाबा नागा की साइट ही सबसे उपयुक्त और नजदीक पाई गई, जिसके आधार पर उन्हें यह काम सौंपा गया।
अनाज भंडारण का 2,000 करोड़ का सालाना कारोबार
पंजाब में हर साल पैदा होने वाले लगभग ढाई करोड़ टन अनाज को संभालने के लिए केंद्र सरकार सालाना करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च करती है। भारी-भरकम मुनाफे के कारण ही माझा क्षेत्र में अनाज गोदामों के निर्माण और टेंडर को लेकर राजनीतिक हस्तियों के बीच जबरदस्त खींचतान रहती है।
पंजाब में इस समय कुल 173 लाख मीट्रिक टन अनाज भंडारण की क्षमता है, जिसमें एफसीआई, राज्य एजेंसियां और निजी क्षेत्र के गोदाम शामिल हैं। एफसीआई पंजाब राज्य गोदाम निगम को औसतन 86 से 107 रुपये प्रति टन प्रति माह किराया और संरक्षण शुल्क देती है। आंकड़ों के मुताबिक, अगर औसत 100 रुपये प्रति टन भी माना जाए, तो यह सालाना कारोबार 2,076 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। इस कारोबार की सबसे खास बात यह है कि एक बार एफसीआई या वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के साथ समझौता होने के बाद, केंद्र सरकार की ओर से किराया मिलता रहता है, चाहे गोदाम खाली ही क्यों न रहे।
गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या के बाद लालजीत सिंह भुल्लर को अपनी मंत्री पद की कुर्सी गंवानी पड़ी थी और उन पर कानूनी मामला भी दर्ज हुआ था। आरोप है कि पूर्व मंत्री ने मृतक अधिकारी पर नियमों को ताक पर रखकर टेंडर अपने पिता को दिलाने का दबाव बनाया था। फिलहाल, कॉर्पोरेशन ने इन सभी आरोपों को दरकिनार करते हुए 30 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। (साभार अपना अमृतसर )