ENGLISH HINDI Friday, February 06, 2026
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
आम आदमी पार्टी के नेता लक्की ओबरॉय की सरेआम हत्यास्कूलों में बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल करने पर एक मार्च से लगेगा प्रतिबंधः मुख्यमंत्रीकनाडाई प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से की मुलाकात, निवेश, नवाचार और कौशल विकास पर हुई सार्थक चर्चाहरियाणा में एचसीएस अधिकारी दीपक कुमार का तबादलासूरजकुंड मेले में दिखा दक्षिण भारत की चित्रकला का वैभव28 अप्रैल से 6 मई, 2026 तक आयोजित की जाएंगी विभागीय परीक्षाएंगवर्नमेंट कॉलेज ऑफ एजुकेशन का 70वाँ वार्षिक एथलेटिक मीट अत्यंत उत्साह, ऊर्जा के साथ हुई आरंभअमेरिकन हिंदू संगठन द्वारा प्रारंभ श्री सनातन धर्म संपर्क यात्रा फाजिल्का पहुंची
कविताएँ

......माँ बहुत झूठ बोलती है............

May 08, 2022 10:42 AM

सुबह जल्दी जगाने, सात बजे को आठ कहती है।
नहा लो, नहा लो, के घर में नारे बुलंद करती है।
मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़ती है।
छोटी छोटी परेशानियों का बड़ा बवंडर करती है।
..........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
.
थाल भर खिलाकर, तेरी भूख मर गयी कहती है।
जो मैं न रहूँ घर पे तो, मेरी पसंद की
कोई चीज़ रसोई में उससे नहीं पकती है।
मेरे मोटापे को भी, कमजोरी की सूज़न बोलती है।
.........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
.
दो ही रोटी रखी है रास्ते के लिए, बोल कर,
मेरे साथ दस लोगों का खाना रख देती है।
कुछ नहीं-कुछ नहीं बोल, नजर बचा बैग में,
छिपी शीशी अचार की बाद में निकलती है।
.........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
.
टोका टाकी से जो मैं झुँझला जाऊँ कभी तो,
समझदार हो, अब न कुछ बोलूँगी मैं,
ऐंसा अक्सर बोलकर वो रूठती है।
अगले ही पल फिर चिंता में हिदायती होती है।
.........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
.
तीन घंटे मैं थियटर में ना बैठ पाऊँगी,
सारी फ़िल्में तो टी वी पे आ जाती हैं,
बाहर का तेल मसाला तबियत खराब करता है,
बहानों से अपने पर होने वाले खर्च टालती है।
..........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
.
मेरी उपलब्धियों को बढ़ा चढ़ा कर बताती है।
सारी खामियों को सब से छिपा लिया करती है।
उसके व्रत, नारियल, धागे, फेरे, सब मेरे नाम,
तारीफ़ ज़माने में कर बहुत शर्मिंदा करती है।
..........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
.
भूल भी जाऊँ दुनिया भर के कामों में उलझ,
उसकी दुनिया में वो मुझे कब भूलती है।
मुझ सा सुंदर उसे दुनिया में ना कोई दिखे,
मेरी चिंता में अपने सुख भी किनारे कर देती है।
..........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
.
मन सागर मेरा हो जाए खाली, ऐंसी वो गागर,
जब भी पूछो, अपनी तबियत हरी बोलती है।
उसके "जाये " हैं, हम भी रग रग जानते हैं।
दुनियादारी में नासमझ, वो भला कहाँ समझती है।
..........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
.
उसके फैलाए सामानों में से जो एक उठा लूँ
खुश होती जैसे, खुद पर उपकार समझती है।
मेरी छोटी सी नाकामयाबी पे उदास होकर,
सोच सोच अपनी तबियत खराब करती है।
..........माँ बहुत झूठ बोलती है।।
.
" हर माँ को समर्पित "

(वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय जैन के सौजन्य से) 

 
कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें